Rajasthan revokes election ban on two children
संदर्भ:
हाल ही में राजस्थान कैबिनेट ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में ‘दो बच्चों के नियम’ को समाप्त करने की मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तीन दशकों पुराने इस प्रतिबंध को “अप्रासंगिक” और “पुराना” माना गया।
प्रमुख विधायी संशोधन:
- राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026: यह बिल राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19 में संशोधन करेगा। इसके माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के चुनावों में दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों पर लगी अयोग्यता को हटाया जाएगा।
- राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026: यह बिल राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 को संशोधित करेगा। इसके तहत शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए ‘दो संतान’ की पात्रता शर्त को समाप्त कर दिया जाएगा।
नियम हटाने के मुख्य कारण:
- प्रजनन दर (TFR) में गिरावट: राजस्थान की कुल प्रजनन दर 1990 के दशक के 3.6 से गिरकर अब 2.0 (NFHS-5) पर आ गई है। रिप्लेसमेंट लेवल प्राप्त होने के बाद अब जनसंख्या नियंत्रण के कड़े कानूनों की आवश्यकता नहीं समझी गई।
- लोकतांत्रिक समावेशिता: पुराना नियम कई योग्य उम्मीदवारों, विशेषकर ग्रामीण और वंचित वर्ग के युवाओं को नेतृत्व से वंचित कर रहा था। इसे हटाने से जमीनी लोकतंत्र अधिक समावेशी बनेगा।
- नीतिगत विसंगति: सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) के लिए ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं था। कैबिनेट ने इस “भेदभावपूर्ण” विसंगति को दूर कर स्थानीय और राज्य स्तर के बीच समानता स्थापित की है।
- जनसांख्यिकीय बदलाव: पिछले तीन दशकों में बढ़ी शिक्षा और जागरूकता के कारण लोग स्वतः ही छोटे परिवार का विकल्प चुन रहे हैं, जिससे अब कानूनी बाध्यता “अप्रासंगिक” हो गई है।
- विकेंद्रीकरण (73वें और 74वें संशोधन): यह निर्णय स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को अधिक सशक्त और जन-उन्मुख बनाने की दिशा में एक कदम है।

