India-Japan Bilateral Currency Swap Agreement
संदर्भ:
हाल ही में भारत और जापान के बीच हुए द्विपक्षीय मुद्रा विनिमय समझौते (Bilateral Swap Arrangement – BSA) को 28 फरवरी, 2026 से प्रभावी रूप से नवीनीकृत कर दिया गया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 2 मार्च, 2026 को जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस समझौते का आकार 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर अपरिवर्तित रखा गया है।
द्विपक्षीय मुद्रा विनिमय समझौता क्या हैं?
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- परिचय: द्विपक्षीय मुद्रा विनिमय समझौता (BSA) दो देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच किया गया एक औपचारिक अनुबंध है, जिसके तहत वे एक-दूसरे के साथ अपनी स्थानीय मुद्राओं का विनिमय (Swap) कर सकते हैं।
- विनिमय नियम: एक निश्चित विनिमय दर पर, एक देश का केंद्रीय बैंक दूसरे देश से विदेशी मुद्रा प्राप्त करता है और बदले में अपनी घरेलू मुद्रा को ‘संपार्श्विक’ के रूप में रखता है। एक निर्धारित अवधि के बाद, उसी विनिमय दर और पूर्व-सहमत ब्याज दर पर मुद्राओं को वापस बदल दिया जाता है।
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- यह एक ‘टू-वे’ व्यवस्था है। भारत अपनी घरेलू मुद्रा (रुपया) के बदले जापान से डॉलर प्राप्त कर सकता है, और इसी तरह जापान भी जरूरत पड़ने पर भारतीय रुपये के बदले डॉलर मांग सकता है।
- उद्देश्य: BSA का प्राथमिक उद्देश्य भुगतान संतुलन (Balance of Payments) संकट या विदेशी मुद्रा की कमी के दौरान ‘तरलता’ (Liquidity) प्रदान करना है। यह देशों को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्त शर्तों वाले ऋणों के बिना तत्काल धन उपलब्ध कराता है।
भारत के द्विपक्षीय मुद्रा विनिमय समझौते:
- SAARC मुद्रा विनिमय ढांचा (2024-27): भारत सरकार ने 2024 से 2027 की अवधि के लिए सार्क देशों के लिए एक संशोधित ढांचा तैयार किया है।
- INR स्वैप विंडो: पहली बार भारतीय रुपये (INR) में स्वैप के लिए ₹250 अरब का एक अलग फंड रखा गया है।
- USD/Euro विंडो: इसके अलावा 2 अरब अमेरिकी डॉलर/यूरो की एक अलग सुविधा भी उपलब्ध है।
- मालदीव के साथ समझौता: अक्टूबर 2024 में, RBI ने मालदीव के साथ इस ढांचे के तहत समझौता किया, जिसमें 400 मिलियन डॉलर और ₹30 अरब की सहायता शामिल है।
- स्थानीय मुद्रा में व्यापार: भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और मॉरीशस जैसे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं (रुपया और दिरहम/रुपया) में व्यापार निपटाने के लिए भी समझौते किए हैं, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम हो सके।
- अन्य समझौते: भारत का श्रीलंका के साथ भी द्विपक्षीय स्वैप समझौता रहा है, जो जनवरी 2022 में आरबीआई के माध्यम से 400 मिलियन डॉलर का था। इसमें एशियाई क्लियरिंग यूनियन (ACU) के तहत लगभग 2.5 बिलियन डॉलर की आस्थगित देनदारियां शामिल हैं।
महत्व:
- मुद्रा स्थिरता: जब किसी देश की मुद्रा में अत्यधिक गिरावट आती है, तो केंद्रीय बैंक BSA के माध्यम से डॉलर प्राप्त कर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है, जिससे विनिमय दर में स्थिरता आती है।
- क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण: यह समझौता देशों के बीच विश्वास को बढ़ाता है और व्यापारिक जोखिमों को कम करता है। भारत और जापान के बीच $75 बिलियन का समझौता वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े द्विपक्षीय विनिमय समझौतों में से एक है।
- डॉलर पर निर्भरता का प्रबंधन: हालाँकि कई BSA डॉलर में होते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में स्थानीय मुद्राओं (जैसे रुपया-येन) में सीधे विनिमय की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे वैश्विक व्यापार में डॉलर की प्रधानता के जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।
- निवेशक विश्वास: यह विदेशी निवेशकों को आश्वस्त करता है कि देश के पास वित्तीय संकट से निपटने के लिए पर्याप्त बैकअप संसाधन हैं।

