Uniform civil code
संदर्भ:
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने समान नागरिक संहिता (UCC) का पुनः समर्थन किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुस्लिम उत्तराधिकार कानून की कुछ धाराओं को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे “भेदभावपूर्ण कानूनों का सबसे प्रभावी उत्तर” करार दिया।
समान नागरिक संहिता (UCC) क्या हैं?
UCC का अर्थ है एक ऐसा साझा कानून जो भारत के सभी नागरिकों पर उनके धर्म, जाति या पंथ के आधार के बिना व्यक्तिगत मामलों (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार) में समान रूप से लागू हो। वर्तमान में, भारत में ये मामले ‘पर्सनल लॉ’ (Personal Laws) द्वारा संचालित होते हैं, जो धर्म के आधार पर भिन्न हैं।
मुख्य उद्देश्य (Objectives):
- लैंगिक न्याय: व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद पितृसत्तात्मक विसंगतियों को दूर कर महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देना।
- राष्ट्रीय एकता: विभिन्न धर्मों के अलग-अलग कानूनों के कारण पैदा होने वाले विरोधाभासों को समाप्त कर एक साझा नागरिक पहचान बनाना।
- कानून का सरलीकरण: जटिल और पुराने व्यक्तिगत कानूनों को हटाकर एक आधुनिक, सरल कानूनी ढांचा तैयार करना।
संवैधानिक आधार (Constitutional Context):
- अनुच्छेद 44 (DPSP): यह राज्य को निर्देश देता है कि वह पूरे देश में नागरिकों के लिए UCC सुनिश्चित करने का प्रयास करे।
- अनुच्छेद 14 और 15: समानता का अधिकार और भेदभाव का निषेध, जो UCC के मूल तर्क का आधार बनते हैं।
- समवर्ती सूची: विवाह और उत्तराधिकार जैसे विषय संविधान की 7वीं अनुसूची की समवर्ती सूची में हैं, जिससे केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं।
प्रमुख फोकस क्षेत्र (Major Focus Areas):
- बहुविवाह पर रोक: सभी धर्मों के लिए केवल एक विवाह (Monogamy) अनिवार्य करना।
- विवाह की आयु: लड़कियों और लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु में एकरूपता।
- उत्तराधिकार: पैतृक संपत्ति में पुत्र और पुत्री को बराबर का हिस्सा।
- लिव-इन रिलेशनशिप: उत्तराखंड मॉडल की तरह लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण और उससे जन्मे बच्चों को वैध मानना।
महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले (Landmark Judgments):
- शाह बानो मामला (1985): कोर्ट ने कहा कि UCC राष्ट्रीय अखंडता में मदद करेगा।
- सरला मुद्गल मामला (1995): केवल दूसरी शादी के लिए धर्म परिवर्तन को अवैध बताया और UCC की आवश्यकता पर बल दिया।
- शायरा बानो मामला (2017): ‘ट्रिपल तलाक’ को असंवैधानिक घोषित करते हुए व्यक्तिगत कानूनों में सुधार का मार्ग प्रशस्त किया।
वर्तमान स्थिति (Current Status 2026):
- उत्तराखंड: UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य (फरवरी 2024)।
- गोवा: पुर्तगाली नागरिक संहिता (1962 का गोवा दमन और दीव प्रशासन अधिनियम) के रूप में पहले से ही UCC लागू है।
- असम और गुजरात: इन राज्यों ने 2025-26 में चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है।
मुख्य सिफारिश:
- विधि आयोग (22वें): आयोग ने व्यापक परामर्श के बाद “चरणबद्ध कार्यान्वयन” और “जनजातीय समुदायों को संरक्षण” देने की सिफारिश की है।
प्रमुख चुनौतियाँ:
- व्यक्तिगत अधिकार बनाम राज्य का हस्तक्षेप: अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिससे राज्य के हस्तक्षेप और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
- 5वीं और 6वीं अनुसूची आदिवासी रीति-रिवाजों और विश्वासों की सुरक्षा करती हैं, जिनके साथ समन्वय करना आवश्यक है।
- धार्मिक समूहों और नेताओं का विरोध: कई धार्मिक समूहों को आशंका है कि UCC उनके धार्मिक कानूनों और परंपराओं में हस्तक्षेप करेगा। इससे सामाजिक और राजनीतिक तनाव उत्पन्न हो सकते हैं।
