Global Conference on the Role of Women in Agri-Food Systems
संदर्भ:
हाल ही में कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए नई दिल्ली में GCWAS-2026 (Global Conference on Women in Agri-Food Systems) का आयोजन किया गया।
कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (GCWAS 2026):
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- परिचय: यह सम्मेलन ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026’ के उपलक्ष्य में आयोजित वैश्विक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कृषि में महिलाओं के अदृश्य योगदान को पहचान दिलाना है।
- आयोजन तिथि: 12-14 मार्च, 2026।
- आयोजक: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE)।
- मुख्य फोकस क्षेत्र:
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- भूमि अधिकारों पर जोर: सम्मेलन का एक मुख्य एजेंडा महिलाओं के लिए ‘भूमि स्वामित्व’ सुनिश्चित करना है, क्योंकि कानूनी अधिकारों के बिना वे ऋण और सरकारी सब्सिडी से वंचित रह जाती हैं।
- तकनीकी समावेश: ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से कृषि में AI और ड्रोन के उपयोग पर चर्चा हुई, ताकि शारीरिक श्रम (Drudgery) को कम किया जा सके।
- जलवायु अनुकूलन (Climate Resilience): विशेषज्ञों ने चर्चा की कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव महिला किसानों पर पड़ता है; अतः उन्हें ‘क्लाइमेट-स्मार्ट’ बीजों तक पहुँच दी जानी चाहिए।
- आर्थिक सशक्तिकरण: ‘लखपति दीदी’ पहल के तहत 3 करोड़ महिलाओं को कृषि-उद्यमी बनाने का लक्ष्य साझा किया गया।
- वित्तीय सुलभता: डिजिटल भुगतान और सूक्ष्म-वित्त (Micro-finance) के माध्यम से महिलाओं को सीधे बाजारों (e-NAM) से जोड़ने की रणनीति बनाई गई।
- पोषण सुरक्षा (Nutrition): ‘पोषण वाटिका’ के माध्यम से महिलाओं द्वारा परिवार और समाज के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
- क्षमता निर्माण: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से 10 करोड़ महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने का वैश्विक मॉडल पेश किया गया।
- नीतिगत सुधार: सदस्य देशों ने कृषि गणना (Agri-Census) में लिंग-विशिष्ट डेटा (Gender-disaggregated data) एकत्र करने पर सहमति जताई।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी: कॉर्पोरेट जगत को महिला नेतृत्व वाले ‘किसान उत्पादक संगठनों’ (FPOs) में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- दिल्ली घोषणापत्र: सम्मेलन के अंत में एक साझा संकल्प अपनाया गया, जो 2030 तक कृषि क्षेत्र में लैंगिक अंतराल (Gender Gap) को समाप्त करने का रोडमैप प्रदान करता है।
भारत में कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की स्थिति:
- PLFS रिपोर्ट (2022-23): भारत में ग्रामीण महिलाओं का 77% हिस्सा कृषि में कार्यरत है, जो ‘कृषि के नारीकरण’ (Feminization of Agriculture) को दर्शाता है।
- भूमि स्वामित्व की चुनौती: कृषि जनगणना के अनुसार, केवल 13.9% महिलाओं के पास भूमि का मालिकाना हक है, जिससे वे संस्थागत ऋण (Institutional Credit) से वंचित रह जाती हैं।
- मजदूरी अंतराल: पुरुष और महिला कृषि श्रमिकों के बीच वेतन में लगभग 20-30% का अंतर बना हुआ है, जो एक बड़ी ढांचागत चुनौती है।
- पशुपालन में उपलब्धि: डेयरी क्षेत्र में 70% से अधिक कार्यबल महिलाओं का है; भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक इन्हीं के श्रम से बना है।
- यंत्रीकरण की कमी: अधिकांश कृषि उपकरण पुरुषों हेतु डिजाइन हैं, जिससे महिलाओं के शारीरिक श्रम (Drudgery) में वृद्धि होती है।
- नमो ड्रोन दीदी (Achievement): 15,000 महिला SHGs को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर उन्हें Agri-entrepreneurs बनाया जा रहा है।
- लखपति दीदी लक्ष्य: सरकार ने 3 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को सालाना ₹1 लाख से अधिक आय सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।
- FAO रिपोर्ट: यदि महिलाओं को संसाधनों तक समान पहुंच मिले, तो कृषि उत्पादन 20-30% बढ़ सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ होगी।
