लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स 2024-25

संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए भारत का पहला लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPPI) लॉन्च किया। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) के 37वें स्थापना दिवस पर इस बेंचमार्किंग फ्रेमवर्क को जारी किया गया।
लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPPI) क्या हैं?
लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPPI) भारत सरकार के केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रीय बेंचमार्किंग ढांचा है। इसे भारत के समुद्री और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में पारदर्शिता, परिचालन दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया गया है।
लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPPI) के मुख्य बिंदु:
- सागर आकलन (Sagar Aankalan): LPPI को पूरी तरह से स्वदेशी ‘सागर आकलन’ फ्रेमवर्क के तहत तैयार किया गया है। यह राष्ट्रीय स्तर पर बंदरगाहों की दक्षता मापने की पहली व्यापक प्रणाली है।
- नीतिगत समन्वय: यह सूचकांक भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP), मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- कार्यप्रणाली: LPPI मे बंदरगाह को उनके निरंतर सुधार के आधार पर महत्व दिया गया है। इसके मूल्यांकन ढांचे में दो घटकों को समान महत्व दिया गया है:
- पूर्ण प्रदर्शन (Absolute Performance): वर्तमान वित्तीय वर्ष में बंदरगाह का वास्तविक परिचालन स्तर (50% वेटेज)।
- वर्ष-दर-वर्ष सुधार (Year-on-Year Improvement): पिछले वर्ष की तुलना में बंदरगाह ने अपनी कमियों को कितना सुधारा है (50% वेटेज)।
- परिचालन संकेतक: सूचकांक में बंदरगाहों का मूल्यांकन निम्नलिखित 6 कड़े मानदंडों पर किया जाता है:
- वेसल टर्नअराउंड टाइम (Vessel Turnaround Time): एक जहाज के बंदरगाह में प्रवेश करने से लेकर वापस जाने तक का कुल समय।
- बर्थ आइडल टाइम (Berth Idle Time): जहाज के बर्थ पर रहने के दौरान वह समय जब कोई लोडिंग या अनलोडिंग का काम नहीं हो रहा हो।
- प्री-बर्थिंग वेटिंग टाइम (Pre-Berthing Waiting Time): बंदरगाह पर पहुंचने के बाद जहाज को बर्थ मिलने में लगने वाला प्रतीक्षा समय।
- कंटेनर ड्वेल टाइम (Container Dwell Time): कार्गो या कंटेनर का बंदरगाह परिसर के भीतर रुकने की अवधि।
- शिप बर्थ डे आउटपुट (Ship Berth Day Output): एक निश्चित बर्थ पर प्रति दिन संभाला जाने वाला कुल कार्गो वॉल्यूम।
- कुल कार्गो हैंडलिंग (Total Cargo Handled): बंदरगाह द्वारा प्रबंधित वार्षिक टन भार।
- कार्गो श्रेणियां: उचित तुलना सुनिश्चित करने के लिए बंदरगाहों को तीन मुख्य कार्गो खंडों और उनकी वॉल्यूम क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है:
- ड्राई बल्क कार्गो (Dry Bulk Cargo): इसमें कोयला, लौह अयस्क और अनाज जैसे शुष्क सामान शामिल हैं। इस श्रेणी (5 मिलियन टन से अधिक हैंडलिंग) में पारादीप पोर्ट अथॉरिटी (ओडिशा) ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
- लिक्विड बल्क कार्गो (Liquid Bulk Cargo): इसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और रसायन शामिल हैं। गुजरात का सिक्का पोर्ट और टर्मिनल्स इस श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ बंदरगाह बनकर उभरा है।
- कंटेनर कार्गो (Container Cargo): वैश्विक व्यापार के इस सबसे महत्वपूर्ण खंड (0.5 मिलियन TEUs से अधिक) में गुजरात का मुंद्रा पोर्ट पहले स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र का जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) दूसरे स्थान पर रहा।
अन्य समवर्ती डिजिटल सुधार:
LPPI के प्रभाव को धरातल पर मजबूत करने के लिए नौवहन महानिदेशालय (DGS) द्वारा विकसित चार अत्याधुनिक डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किए गए हैं, जो लॉजिस्टिक्स सुगमता को बढ़ाते हैं:
- e-Navik प्लेटफॉर्म (24×7 शिकायत निवारण): अंतरराष्ट्रीय ‘समुद्री श्रम कन्वेंशन (MLC), 2006’ के तहत भारतीय नाविकों के लिए दुनिया के किसी भी कोने से व्हाट्सएप, हेल्पलाइन या ईमेल के जरिए शिकायत दर्ज करने की सुविधा।
- e-Samudra प्लेटफॉर्म (जहाज पंजीकरण मॉड्यूल): भारत में जहाजों के फ्लैगिंग (Flagging) और पंजीकरण की कागजी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाने के लिए वैश्विक मानकों का मॉड्यूल।
- मेडिकल प्रैक्टिशनर मॉड्यूल: नाविकों को जारी किए जाने वाले फर्जी स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने के लिए अधिकृत डॉक्टरों का एक केंद्रीकृत और सत्यापित डेटाबेस।
- एकीकृत जहाज पुनर्चक्रण क्रेडिट नोट मॉड्यूल: सतत शिपिंग (Sustainable Shipping) को बढ़ावा देने के लिए सरकार के ₹70,000 करोड़ के समुद्री पैकेज का हिस्सा।
- इसके तहत हांगकांग कन्वेंशन-अनुपालक भारतीय यार्डों में जहाजों को रीसायकल करने पर मालिकों को स्क्रैप मूल्य का 40% क्रेडिट नोट मिलेगा, जिसे भारत में नए जहाज निर्माण के लिए भुनाया जा सकेगा।
महत्व:
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: भारत की वर्तमान लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 13-14% है, जिसे सरकार घटाकर 8-9% के वैश्विक स्तर पर लाना चाहती है। LPPI बंदरगाहों की अक्षमताओं को उजागर कर इस लागत को कम करने में मदद करेगा।
- प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism): राज्यों के सार्वजनिक और निजी बंदरगाहों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा होगी, जिससे बुनियादी ढांचे का तेजी से आधुनिकीकरण होगा।
- वैश्विक रैंकिंग में उछाल: विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPI) की ‘अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट’ श्रेणी में भारत पहले ही 44वें से 22वें स्थान पर आ चुका है। घरेलू स्तर पर LPPI लागू होने से भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में विश्वसनीयता और मजबूत होगी।