राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6

संदर्भ:
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने हाल ही में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की रिपोर्ट (2023-24) जारी की है। यह सर्वेक्षण इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पापुलेशन साइंसेज (IIPS), मुंबई द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में देश के 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों में आयोजित किया गया।
NFHS-6 के प्रमुख सकारात्मक निष्कर्ष:
- मातृ स्वास्थ्य में सुधार (Maternal Health):
- संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries): अस्पताल में होने वाले प्रसव की दर NFHS-5 के 88.6% से बढ़कर 90.6% हो गई है।
- प्रसव पूर्व देखभाल (Antenatal Care – ANC): पहली तिमाही में ANC पंजीकरण 70% से बढ़कर 76.2% हो गया है, जबकि कम से कम 4 ANC जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 65.2% पहुंच गया है।
- सहायक योजनाएं: जननी सुरक्षा योजना (JSY) और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY 2.0) का इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा।
- बाल टीकाकरण और स्वास्थ्य (Child Immunization):
- पूर्ण टीकाकरण: 12-23 महीने के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8% से बढ़कर 87.1% हो गया है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य पर निर्भरता: लगभग 95.6% बच्चों का टीकाकरण सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से हुआ, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
- रोटावायरस टीकाकरण: सरकारी प्रयासों के कारण रोटावायरस वैक्सीन का कवरेज 36.4% से सीधे 85.4% (दोगुने से अधिक) हो गया है।
- बाल पोषण में सुधार (Child Nutrition):
- स्टंटिंग (Stunting – उम्र के अनुपात में कम लंबाई): 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में यह 35.5% से घटकर 29.3% पर आ गई है।
- सीवियर वेस्टिंग (Severe Wasting – लंबाई के अनुपात में अत्यधिक कम वजन): यह गंभीर कुपोषण 7.7% से घटकर 5.2% रह गया है, जो ‘पोषण अभियान’ की सफलता की ओर संकेत करता है।
- वित्तीय सुरक्षा और बीमा (Financial Protection):
- स्वास्थ्य बीमा कवरेज: आयुष्मान भारत-PMJAY और राज्य स्तरीय योजनाओं के कारण स्वास्थ्य बीमा कवरेज 41.0% से बढ़कर 60.2% हो गया है, जिससे स्वास्थ्य पर होने वाले जेब के खर्च (Out-of-Pocket Expenditure) में कमी आएगी।
- महिला अधिकारिता और डिजिटल समावेशन:
- इंटरनेट का उपयोग: इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी होकर 64.3% हो गई है (NFHS-5 में 33.3%)।
- बैंक खाते: खुद का बैंक खाता संचालित करने वाली महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर 89.0% हो गया है।
सर्वे में उल्लेखित उभरती चुनौतियाँ:
- गैर-संचारी रोगों (NCDs) का बढ़ता बोझ और मोटापा:
- मोटापा (Obesity): 15-49 वर्ष की महिलाओं में मोटापे की दर 24% से बढ़कर 30.7% और पुरुषों में 22.9% से बढ़कर 27.3% हो गई है। शहरी क्षेत्रों में 42.8% महिलाएं मोटापे की शिकार हैं।
- मधुमेह (Diabetes): उच्च रक्त शर्करा (High Blood Sugar) से पीड़ित पुरुषों की संख्या 20.9% और महिलाओं की संख्या 17.8% हो गई है। यह भारत में “Undernutrition और Overnutrition” के दोहरे बोझ (Double Burden) को दर्शाता है।
- सिजेरियन (C-Section) प्रसव में अत्यधिक वृद्धि:
- भारत में C-Section प्रसव की दर 21.5% से बढ़कर 27.2% हो गई है।
- निजी अस्पतालों में यह दर 54.1% है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आदर्श मानक (10-15%) से बहुत अधिक है और चिकित्सा के बढ़ते व्यवसायीकरण की ओर इशारा करती है।
- शिशु आहार पद्धतियों में सुस्ती:
- 6 महीने से कम उम्र के बच्चों में विशेष स्तनपान (Exclusive Breastfeeding) की दर में गिरावट देखी गई है, जो नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय है।
NFHS-5 बनाम NFHS-6: तुलनात्मक मैट्रिक्स:
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संकेतक (Indicators) |
NFHS-5 (2019-21) |
NFHS-6 (2023-24) |
रुझान / प्रभाव (Trend) |
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संस्थागत प्रसव |
88.6% |
90.6% |
सकारात्मक वृद्धि |
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पूर्ण बाल टीकाकरण |
83.8% |
87.1% |
स्वास्थ्य प्रणालियों में सुधार |
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बच्चों में स्टंटिंग |
35.5% |
29.3% |
कुपोषण में उल्लेखनीय कमी |
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स्वास्थ्य बीमा कवरेज |
41.0% |
60.2% |
सामाजिक सुरक्षा का विस्तार |
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महिलाओं द्वारा इंटरनेट उपयोग |
33.3% |
64.3% |
डिजिटल सशक्तिकरण |
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महिला मोटापा (15-49 वर्ष) |
24.0% |
30.7% |
जीवनशैली जनित गंभीर चुनौती |
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कुल प्रजनन दर (TFR) |
2.0 |
2.0 |
प्रतिस्थापन स्तर (2.1) से नीचे स्थिर |
रणनीतिक सुझाव:
- निवारक स्वास्थ्य सेवा (Preventive Healthcare): राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के अनुरूप, भारत को अब संक्रामक रोगों के साथ-साथ जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (NCDs) से निपटने के लिए ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स’ को मजबूत करना होगा।
- आहार विविधता (Dietary Diversity): स्टंटिंग में कमी के बावजूद सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में मोटे अनाजों (Millets) और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों को शामिल करना आवश्यक है।
- निजी चिकित्सा क्षेत्र का नियमन: निजी अस्पतालों में अनावश्यक C-Section प्रसव को नियंत्रित करने के लिए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का कड़ाई से प्रवर्तन किया जाना चाहिए।