IGI हवाईअड्डे पर स्काईकास्ट प्रणाली का शुभारंभ

संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने विमानन सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर देश की पहली ‘स्काईकास्ट’ (SkyCast) प्रणाली का उद्घाटन किया।
- केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत ‘मिशन मौसम’ (Mission Mausam) के तहत विकसित यह प्रणाली भारत को ‘कोहरा-मुक्त और मौसम-अनुकूल विमानन’ युग में ले जाएगी। इस प्रणाली की स्थापना के साथ ही भारत विमानन मौसम निगरानी हेतु एकीकृत वायुमंडलीय रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग करने वाला दुनिया का 19वां देश बन गया है। [1, 2, 3, 4]
स्काईकास्ट प्रणाली क्या हैं?
- परिचय: स्काईकास्ट एक अत्याधुनिक एविएशन वेदर इंटेलिजेंस और नाउकास्टिंग प्रणाली है। यह प्रणाली विमानन क्षेत्र के लिए रियल-टाइम (वास्तविक समय) में सटीक मौसम पूर्वानुमान और खतरे की चेतावनी प्रदान करती है।
- नोडल मंत्रालय एवं विकास: यह प्रणाली भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) द्वारा संचालित ‘मिशन मौसम’ के तहत विकसित की गई है।
- इसके तकनीकी विकास का नेतृत्व भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संयुक्त रूप से किया है।
मुख्य विशेषताएं:
- तकनीकी आधार: यह प्रणाली वर्ष 2015 से संचालित विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) के वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित है।
- बहु-सेंसर एकीकरण (Multi-Sensor Integration): स्काईकास्ट में निम्नलिखित अत्याधुनिक उपकरणों को एकीकृत किया गया है:
- राडार विंड प्रोफाइलर (RWP): 3 किमी की ऊंचाई तक हवा की गति, दिशा और वर्टिकल वेलोसिटी का मापन।
- सोडार (SODAR) और माइक्रोवेव रेडियोमीटर: वायुमंडलीय स्थिरता और तापमान की स्थिति।
- ग्राउंड-बेस्ड फॉग एयरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (GFAS): दिल्ली के प्रदूषण और कोहरे (Aerosol-Fog Interaction) के सूक्ष्म कणों का अध्ययन।
- CL61 लिडार-आधारित सीलोमीटर: कोहरे की ऊर्ध्वाधर संरचना और दृश्यता स्तर की ट्रैकिंग।
- डेटा अपडेट: यह प्रणाली प्रत्येक 5 मिनट में रियल-टाइम अपडेट प्रदान करती है और इसकी पूर्वानुमान क्षमता (Thermodynamic Profiling) धरातल से 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक प्रभावी है।
- सटीक नाउकास्टिंग (Nowcasting): स्काईकास्ट पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स (ATC) को 3 घंटे का संक्षिप्त अग्रिम अलर्ट विंडो प्रदान करता है। इससे अंतिम समय पर होने वाले विमान विपथन से बचा जा सकता है।
- जोखिम पहचान क्षमता: यह प्रणाली टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय उत्पन्न होने वाले खतरों जैसे कि विंड शियर (Wind Shear), लो-लेवल जेट्स, टर्बुलेंस, वायुमंडलीय प्रतिलोमन (Inversion) और आइसिंग (Icing) की रियल-टाइम चेतावनी जारी करती है।
- एयरोसोल-कोहरा इंटरैक्शन ट्रैकिंग: दिल्ली की भौगोलिक स्थिति और शीतकालीन प्रदूषण को देखते हुए, यह प्रणाली हाइड्रोस्कोपिक एरोसोल कणों की पहचान करती है जो दृश्यता को तेजी से प्रभावित करते हैं।
महत्व:
- नागरिक उड्डयन क्षेत्र: भारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली हवाई अड्डा प्रतिदिन 1,300 से अधिक उड़ानों का संचालन करता है। शीतकाल में कोहरे के कारण होने वाले विलंब और रद्दीकरण से एयरलाइनों को भारी वित्तीय नुकसान होता है और यात्रियों को असुविधा होती है। स्काईकास्ट विमान संचालन की दक्षता को बढ़ाकर ‘इज ऑफ ट्रैवल’ (Ease of Travel) सुनिश्चित करेगा।
- आपदा न्यूनीकरण एवं सुरक्षा: विमानन क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण चरण लैंडिंग का होता है। स्काईकास्ट द्वारा मिलने वाले सटीक डेटा से पायलटों को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सुरक्षित लैंडिंग निर्णय लेने में सहायता मिलेगी, जिससे विमान दुर्घटनाओं का जोखिम न्यूनतम हो जाएगा।
- नीतिगत रणनीतियाँ: यह पहल भारत को जलवायु-स्मार्ट (Climate-smart) राष्ट्र बनाने की दिशा में रणनीतिक कदम है। इस प्रणाली से प्राप्त डेटा का उपयोग न केवल विमानन बल्कि निम्नलिखित क्षेत्रों में भी किया जा सकेगा:
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मौसम पूर्वानुमान मॉडल का सुदृढ़ीकरण।
- शहरी प्रदूषण प्रबंधन और परिवहन संवेदीकरण (Transport Advisories)।
- चरम मौसमी घटनाओं के लिए आपदा प्रबंधन तैयारियों को सुदृढ़ करना।
आगामी विस्तार:
सरकार की योजना के अनुसार, दिल्ली के IGI हवाई अड्डे के बाद देश का दूसरा स्काईकास्ट सिस्टम जेवर (नोएडा) अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थापित किया जाएगा। इसके पश्चात इसका विस्तार वाराणसी, अहमदाबाद और देश के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर भी किया जाएगा ताकि संपूर्ण भारतीय हवाई क्षेत्र को ‘वेदर-स्मार्ट’ इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जा सके।