Tetragonula yikhumensis: डंक रहित मधुमक्खी की नई प्रजाति टेट्रागोनुला यिखुमेंसिस की खोज
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संदर्भ:
हाल ही में नागालैंड विश्वविद्यालय और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के शोधकर्ताओं ने डंक रहित मधुमक्खी की एक नई प्रजाति ‘टेट्रागोनुला यिखुमेंसिस’ (Tetragonula yikhumensis) की खोज की। यह भारत में पाई जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी डंक रहित मधुमक्खी प्रजाति (Largest Stingless Bee) है।
टेट्रागोनुला यिखुमेंसिस (Tetragonula Yikhumensis) के बारे में:
- शोधकर्ता: यह महत्वपूर्ण खोज नागालैंड विश्वविद्यालय की शोधकर्ता नोयिंगबेनी एम. ओड्युओ (Noyingbeni M. Odyuo) के नेतृत्व में सुदीप्त डे, बेंडंग एओ, रंजीत कुमार और ए. रमेशकुमार की टीम द्वारा की गई है।
- सहयोगी संस्थान: नागालैंड विश्वविद्यालय (NU) और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI)।
- प्रकाशन: इस नई प्रजाति का विस्तृत वैज्ञानिक विवरण 22 जुलाई 2026 को प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘सोशियोबायोलॉजी’ (Sociobiology) में प्रकाशित हुआ।
- खोज स्थल: यह प्रजाति उत्तर-पूर्वी भारत के नागालैंड के वोखा (Wokha) जिले से खोजी गई है।
- नामकरण: इसका नाम वोखा जिले के ‘यिखुम’ (Yikhum) गाँव के नाम पर रखा गया है, जहाँ से इसका पहला छत्ता या घोंसला (Nest Sample) एकत्र किया गया था।
- वर्गीकरण:
- जगत (Kingdom): एनिमेलिया (Animalia)
- कुल/परिवार (Family): एपिडे (Apidae)
- जनजाति (Tribe): मेलिपोनीनी (Meliponini – डंक रहित मधुमक्खियों का समूह)
- वंश/जीनस (Genus): टेट्रागोनुला (Tetragonula)
- प्रजाति (Species): टी. यिखुमेंसिस (T. yikhumensis)
- शारीरिक आकार (Body Length): इसकी शारीरिक लंबाई लगभग 5.59 मिलीमीटर (mm) है, जो इसे भारत में दर्ज सभी डंक रहित मधुमक्खियों में सबसे विशालकाय बनाती है।
- पहचान के लक्षण: शोधकर्ताओं ने एकीकृत वर्गीकरण दृष्टिकोण (Integrative Taxonomic Approach) और डीएनए बारकोडिंग (DNA Barcoding) के माध्यम से इसके चेहरे की अनूठी संरचना, शरीर के अनुपात, रंग पैटर्न और नर जननांग की विशिष्ट बनावट की पुष्टि की।
- निवास: यह एक भूमिगत (Subterranean) या जमीन के नीचे रहने वाली प्रजाति है। यह भारत में खोजी गई टेट्रागोनुला वंश की केवल दूसरी ऐसी प्रजाति है जो जमीन के अंदर रहती है।
- इसकी कॉलोनियां या छत्ते जमीन के नीचे दो मीटर से अधिक की गहराई पर पाए गए हैं।
- इनके घोंसलों में शहद, पराग (Pollen) और अंडों (Brood) के लिए अलग-अलग कक्ष (Chambers) बने होते हैं।
- ये कक्ष ‘बैटुमेन’ (Batumen – मोम और राल का मिश्रण) की कठोर परतों से सुरक्षित होते हैं और सतह से एक संकरी सुरंग (Entrance Tunnel) द्वारा जुड़े रहते हैं।
- भोजन: ये मधुमक्खियां (Honey Bees) मुख्य रूप से स्थानीय वन वनस्पतियों और कृषि फसलों के फूलों के अमृत (Nectar) और पराग पर निर्भर रहती हैं।
- परागणकर्ता (Polligators): डंक रहित मधुमक्खियां उष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी प्रणालियों में प्रमुख परागणकर्ता (Polligators) की भूमिका निभाती हैं। ये जंगली पौधों और फसलों के प्रजनन व फल उत्पादन में अनिवार्य योगदान देती हैं।
- स्थानीय नाम: वोखा की स्थानीय ‘लोथा नागा’ (Lotha Community) जनजाति इन भूमिगत मधुमक्खियों को पारंपरिक रूप से “लित्सुक” (Litsuk) या ‘ग्राउंड बी’ कहती है।
- औषधीय महत्व: इनके द्वारा उत्पादित औषधीय शहद (Medicinal Honey) और पराग को स्थानीय समुदाय द्वारा स्वास्थ्य उपचारों के लिए अत्यधिक मूल्यवान माना जाता है।
- संरक्षण स्थिति: वर्तमान में यह प्रजाति डेटा की कमी (Data Deficient) श्रेणी में है।
- सांख्यिकीय महत्व: इस खोज के साथ ही भारत में ज्ञात डंक रहित मधुमक्खी प्रजातियों की संख्या 25 से बढ़कर 26 हो गई है, जबकि देश में अकेले टेट्रागोनुला (Tetragonula) वंश की कुल संख्या 18 हो चुकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: टेट्रागोनुला यिखुमेंसिस क्या है?
उत्तर: यह भारत में खोजी गई डंक रहित (स्टिंगलेस) मधुमक्खी की एक नई भूमिगत प्रजाति (Stingless Bee) है, जो आकार में देश की सबसे बड़ी स्टिंगलेस मधुमक्खी है।
प्रश्न 2: यह नई मधुमक्खी की प्रजाति कहाँ खोजी गई?
उत्तर: इस विशिष्ट प्रजाति की खोज भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैंड के वोखा जिले के यिखुम गाँव में की गई है।
प्रश्न 3: डंक रहित मधुमक्खियाँ क्यों महत्वपूर्ण होती हैं?
उत्तर: ये मधुमक्खियां मनुष्यों को बिना नुकसान पहुँचाए पर्यावरण में महत्वपूर्ण परागण करती हैं और इनका शहद उच्च औषधीय गुणों से भरपूर होता है।
प्रश्न 4: इस खोज का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
उत्तर: इस खोज से भारत में डंक रहित मधुमक्खियों की कुल ज्ञात प्रजातियों की संख्या 25 से बढ़कर 26 हो गई है, जिससे कीट जैव विविधता का डेटाबेस समृद्ध हुआ है।
प्रश्न 5: परागण (Pollination) में इन मधुमक्खियों की क्या भूमिका है?
उत्तर: ये मधुमक्खियां जंगली वनस्पतियों और कृषि फसलों के फूलों का परागण करके पौधों के प्रजनन, वनों के अस्तित्व और कृषि उत्पादकता को बनाए रखती हैं।
प्रश्न 6: इस नई प्रजाति की पहचान कैसे की गई?
उत्तर: शोधकर्ताओं ने पारंपरिक शारीरिक संरचनात्मक विश्लेषण (Morphology) के साथ-साथ आधुनिक डीएनए बारकोडिंग (DNA Barcoding) तकनीक का उपयोग करके इसकी अनूठी पहचान स्थापित की है।
