नागपुर में स्वदेशी Bhargavastra Counter Drone System का सफल ट्रायल हुआ
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय सेना की उपस्थिति में नागपुर में स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम ‘भार्गवास्त्र’ (Bhargavastra Counter Drone System) का सफल तकनीकी प्रदर्शन और परीक्षण किया। यह प्रणाली भविष्य के ड्रोन युद्धों से निपटने में सक्षम है।
भार्गवास्त्र काउंटर-ड्रोन सिस्टम (Bhargavastra Counter Drone System) क्या है?
- परिचय: यह वाहन-जनित, बहु-स्तरीय काउंटर-स्वार्म ड्रोन सिस्टम (Counter-Swarm Drone System) है। यह मुख्य रूप से एक हार्ड-किल प्रणाली (Hard-kill System) के रूप में कार्य करती है, जो दुश्मन के स्वायत्त ड्रोनों को केवल जाम करने के बजाय भौतिक रूप से हवा में ही नष्ट कर देती है।
- विकासकर्ता: इस रक्षा प्रणाली का निर्माण भारतीय निजी रक्षा कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा किया गया है।
- सहयोगी संस्था: इसके निर्माण में ‘इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड’ (EEL) ने महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग दिया है।
- कार्यक्रम: यह परियोजना रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) के मेक-II कार्यक्रम (Make-II Programme) के तहत उद्योग-वित्त पोषित प्रोटोटाइप विकास के रूप में विकसित की जा रही है।
- विशेषताएं:
- बहु-स्तरीय मारक क्षमता (Multi-layered Kill Mechanism): भार्गवास्त्र दोहरी परत वाली मारक तकनीक पर आधारित है:
- प्रथम परत (Layer 1): इसमें बिना गाइडेंस वाले माइक्रो-रॉकेट्स (Unguided Micro-rockets) का उपयोग होता है, जिनका घातक घेरा (Lethal Radius) 20 मीटर है। यह एक साथ पूरे ड्रोन झुंड (Drone Swarms) को तबाह कर सकता है।
- द्वितीय परत (Layer 2): इसमें सटीक-निर्देशित माइक्रो-मिसाइलें (Precision-guided Micro-missiles) शामिल हैं, जो अत्यधिक मूल्यवान या चकमा देने वाले हवाई लक्ष्यों को सटीकता से भेदती हैं।
- मारक और पहचान क्षमता (Interception & Detection Range): यह प्रणाली दुश्मन के बड़े मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) को 10 किमी और छोटे ड्रोनों को 6 किमी की दूरी पर पहचान सकती है। इसकी प्रभावी इंटरसेप्शन रेंज 2.5 किलोमीटर तक है।
- सेंसर्स का एकीकरण (Sensor Integration): इसमें रडार (Radar), इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सेंसर्स और पैसिव रेडियो-फ्रीक्वेंसी (RF) डिटेक्टर्स को एकीकृत किया गया है, जो दिन और रात दोनों समय सटीक ट्रैकिंग प्रदान करते हैं।
- C4I कमांड आर्किटेक्चर: यह नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली (C4I Suite) से लैस है, जो वास्तविक समय में हवाई स्थिति की तस्वीर (Real-time Air Picture) जनरेट कर लांचर को स्वचालित रूप से लक्ष्य सौंपती है।
- गतिशीलता और मारक क्षमता (Mobility & Loadout): यह पूरी तरह ऑल-टेरेन सैन्य वाहनों (All-Terrain Vehicles) पर माउंटेड है। एक सिंगल ट्रक प्लेटफॉर्म पर 4 लांचर ब्लॉक होते हैं, जो एक साथ 64 से अधिक माइक्रो-मिसाइलें दागने की क्षमता (Salvo Mode) रखते हैं।
- बहु-स्तरीय मारक क्षमता (Multi-layered Kill Mechanism): भार्गवास्त्र दोहरी परत वाली मारक तकनीक पर आधारित है:
- सफल प्रदर्शन: 23-24 जुलाई 2026 को नागपुर फैसिलिटी में तीनों रक्षा सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के समक्ष इसका पूर्ण कॉन्फ़िगरेशन अलर्ट और कमांड प्रदर्शन सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
- आगामी योजना: इसके आंतरिक परीक्षण (Internal Trials) अगले दो से तीन महीनों में पूरे कर लिए जाएंगे। इसके बाद यह प्रणाली भारत के महत्वाकांक्षी ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा कार्यक्रम (Sudarshan Chakra Air Defence Programme) को वर्ष 2030 तक मजबूत आधार प्रदान करेगी।
भारतीय सेना के लिए भार्गवास्त्र का महत्व:
- स्वायत्त खतरों से सुरक्षा (Countering Autonomous Threats): आधुनिक युद्धों (जैसे यूक्रेन और पश्चिम एशिया संघर्ष) में ऐसे ड्रोन प्रयुक्त हो रहे हैं जो इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या स्पूफिंग (Soft-kill) के प्रति प्रतिरोधी हैं। भार्गवास्त्र का ‘हार्ड-किल’ मैकेनिज्म इन्हें हवा में ही नष्ट कर अभेद्य सुरक्षा देता है।
- लागत प्रभावी समाधान (Cost-Effective Solution): पारंपरिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (SAMs) बेहद महंगी होती हैं। सस्ते ड्रोनों को मार गिराने के लिए भार्गवास्त्र की स्वदेशी माइक्रो-मिसाइलें एक किफायती विकल्प प्रदान कर ‘लागत-विनिमय अनुपात’ (Cost-exchange Ratio) को भारत के पक्ष में करती हैं।
- ड्रोन झुंड का मुकाबला (Neutralising Drone Swarms): युद्ध के मैदान में एक साथ आने वाले सैकड़ों ड्रोनों के झुंड (Swarm Drones) पारंपरिक एयर डिफेंस को चोक कर देते हैं। इसकी साल्वो फायरिंग क्षमता एक साथ कई लक्ष्यों को भेदकर इस खतरे को समाप्त करती है।
- कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में तैनाती (Operational Versatility): यह प्रणाली समुद्र तल से 5,000 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम करने के लिए अनुकूलित है। यह इसे लद्दाख जैसे उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों (High-altitude Regions) के साथ-साथ राजस्थान के रेगिस्तानों और पंजाब के मैदानों में सुरक्षा के लिए उपयुक्त बनाती है।
- आपूर्ति श्रृंखला पर संप्रभु नियंत्रण (Supply Chain Control): सेंसर्स, सॉफ़्टवेयर और युद्धपोतों का 100% स्वदेशी डिजाइन होने के कारण युद्धकाल में भारत को विदेशी कलपुर्जों या प्रतिबंधों का डर नहीं रहेगा, जिससे रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहेगी।
- वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़त: पूर्ण एकीकृत वाहन-जनित काउंटर-स्वार्म क्षमता वाली यह दुनिया की पहली चुनिंदा प्रणालियों में से एक है। यह भविष्य में भारत को वैश्विक रक्षा निर्यात (Defence Exports) के बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भार्गवास्त्र काउंटर-ड्रोन सिस्टम क्या है?
उत्तर: यह भारत का पहला स्वदेशी, वाहन-जनित बहु-स्तरीय एंटी-ड्रोन मारक ढांचा है जो दुश्मन के स्वायत्त ड्रोन और उनके झुंडों को ‘हार्ड-किल’ (भौतिक रूप से नष्ट) करता है।
प्रश्न 2: इसे किसने विकसित किया है?
उत्तर: इस अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक (Anti Drone Technology) को भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने विकसित किया है।
प्रश्न 3: यह सिस्टम कैसे काम करता है?
उत्तर: इसके एकीकृत रडार और सेंसर्स खतरे को पहचानते हैं, जिसके बाद इसका उन्नत C4I नेटवर्क लक्ष्यों को चिह्नित कर गाइडेड माइक्रो-मिसाइलें और रॉकेट दागता है।
प्रश्न 4: भार्गवास्त्र किन प्रकार के ड्रोन को निष्क्रिय कर सकता है?
उत्तर: यह हथियारबंद ड्रोनों (Weaponised Drones), आत्मघाती लोइटरिंग म्यूनिशन्स (Loitering Munitions) और जैमिंग-प्रतिरोधी स्वायत्त ड्रोन झुंडों (Autonomous Drone Swarms) को पूरी तरह नष्ट कर सकता है।
प्रश्न 5: भारतीय सेना के लिए इसका क्या महत्व है?
उत्तर: यह सेना को पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बेहद कम लागत पर सीमाओं, संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों और उच्च-ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्रों में पूर्ण हवाई सुरक्षा प्रदान करता है।
प्रश्न 6: क्या यह पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली है?
उत्तर: हाँ, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इसके रडार, सेंसर्स, कमांड सॉफ्टवेयर, वाहन और मिसाइल म्यूनिशन्स पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और निर्मित किए गए हैं।
