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Rajasthan State Water Plan 2047 – जानिए राजस्थान सरकार का जल नियोजन प्लान

Rajasthan State Water Plan 2047 – जानिए राजस्थान सरकार का जल नियोजन प्लान

Rajasthan State Water Plan 2047

संदर्भ:

हाल ही में राजस्थान सरकार ने जयपुर में आयोजित ‘राजस्थान वाटर कॉन्क्लेव 2026’ में राजस्थान राज्य जल योजना 2047 (Rajasthan State Water Plan 2047) का शुभारंभ किया। जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की आगामी पीढ़ियों के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

Rajasthan State Water Plan 2047 प्लान के मुख्य बिंदु:

  • रामजल सेतु लिंक परियोजना (Ramjal Setu Link Project): यह इस योजना का सबसे प्रमुख स्तंभ है। इसके तहत राज्य के 17 जिलों को पेयजल सुरक्षा (Drinking Water Security) प्रदान की जाएगी तथा लगभग 4.84 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए सिंचाई नेटवर्क (Irrigation Network) का विस्तार किया जाएगा। 
  • यमुना जल समझौता (Yamuna Water Agreement): इसके अंतर्गत 295 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक पाइपलाइन के माध्यम से 1,917 क्यूसेक यमुना जल को शेखावाटी क्षेत्र तक पहुँचाया जाएगा। इससे सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों के लगभग 75 लाख नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
  • देवास तृतीय और चतुर्थ परियोजनाएं: उदयपुर जिले के लिए ₹1,691 करोड़ की लागत से देवास III और IV पेयजल परियोजनाओं के निर्माण को गति दी जा रही है।
  • नहर प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण: पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा इन्दिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया जा रहा है। इसके साथ ही रानीवाड़ा और भीनमाल क्षेत्रों में नर्मदा नदी का पानी लाने तथा ब्राह्मणी नदी के अतिरिक्त जल को बीसलपुर बांध की ओर मोड़ने (Brahmani-Bisalpur Diversion) के तकनीकी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। 
  • अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana): योजना के अंतर्गत समुदाय आधारित भूजल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस मद में राज्य में अब तक ₹485 करोड़ के जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।
  • पारंपरिक जल ज्ञान का पुनरुद्धार: राजस्थान की ऐतिहासिक जल संचयन प्रणालियों जैसे बावड़ी (Stepwells), टांका (Taanka), झालरा (Jhalara), और खदीन (Khadin) का वैज्ञानिक जीर्णोद्धार किया जा रहा है। सरकार ने प्रत्येक जिले में कम से कम 125 पारंपरिक जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है। 
  • कृषि वानिकी और चेक डैम: वर्षा जल को जमीन के भीतर रोकने के लिए पहाड़ी ढलानों और जलसंभर क्षेत्रों (Watersheds) में व्यापक स्तर पर चेक डैम और एनिकट का निर्माण शामिल है।
  • शहरी और ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम:
    • अमृत 2.0 (AMRUT 2.0): राज्य सरकार ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में जल वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ₹5,100 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। इसके तहत 178 शहरों में से 109 निकायों में बुनियादी ढांचे के लिए कार्य आदेश जारी किए जा चुके हैं।
    • जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission): ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ सुनिश्चित करने के लिए 15 लाख से अधिक नए ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन (Tap Water Connections) से जोड़ा गया है।
  • निगरानी और डिजिटल गवर्नेंस:
    • मुख्यमंत्री सिंचाई टास्क फोर्स: सभी बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं (Irrigation Projects) की समयबद्ध प्रगति और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
    • किसान साथी ऐप (Kisan Saathi App): इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को वास्तविक समय में सिंचाई के पानी की उपलब्धता और नहरों के रेगुलेशन शेड्यूल की सटीक जानकारी दी जा रही है। 

सरकार की अन्य पहले:

  • जल सुरक्षा नीति: ‘विकसित राजस्थान 2047’ विजन के हिस्से के रूप में घोषित राजस्थान जल नीति (Rajasthan Water Policy) तेजी से होते शहरीकरण के बीच घरेलू और औद्योगिक उपयोग (Domestic and Industrial Use) दोनों के लिए जल संसाधनों के संतुलित आवंटन को प्राथमिकता देती है।
  • अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण (Water Recycling): औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की कमी को दूर करने के लिए ‘ट्रीटेड वेस्ट वाटर’ (Treated Wastewater) के 100% पुनरुद्धार और पुनः उपयोग को अनिवार्य किया जा रहा है।
  • सूक्ष्म सिंचाई तकनीक (Micro-Irrigation): पानी की अत्यधिक कमी वाले क्षेत्रों में ड्रिप (Drip) और स्प्रिंकलर (Sprinkler) सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए सौर ऊर्जा संचालित सूक्ष्म सिंचाई ग्रिड (Solar-powered Micro-irrigation) को एकीकृत किया जा रहा है।
  • फसल विविधीकरण (Crop Diversification): किसानों को बाजरा और तिलहन जैसी कम पानी की खपत वाली तथा उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों (High-value Horticulture) को अपनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
  • प्लास्टिक-लाइन्ड फार्म पॉन्ड्स: जयपुर के कुकास गांव जैसे सफल ग्रामीण जल संचयन मॉडलों की तर्ज पर किसानों के खेतों में वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किए गए प्लास्टिक-लाइन्ड फार्म पॉन्ड्स (Farm Ponds) बनाए जा रहे हैं, जो मानसून के अपवाह जल को संचित कर रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए जीवन रक्षक सिंचाई प्रदान करते हैं।
  • जन आंदोलन का स्वरूप: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अनुसार, जल का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा। इसके लिए ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ और ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ जैसे सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को जल बजटिंग (Water Budgeting) से जोड़ा जा रहा है।
  • जल उपभोक्ता संगम (Water User Associations): नहरों और स्थानीय जलाशयों के प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय जल उपभोक्ता संगमों को सौंपी जा रही है ताकि पानी का न्यायसंगत वितरण (Equitable Distribution) सुनिश्चित हो सके। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: राजस्थान स्टेट वाटर प्लान 2047 क्या है?

उत्तर: यह राजस्थान सरकार द्वारा शुरू किया गया एक दीर्घकालिक रोडमैप है, जो वर्ष 2047 तक राज्य में पीने के पानी और सिंचाई की आवश्यकताओं के लिए स्थायी जल सुरक्षा (Water Security) सुनिश्चित करता है।

प्रश्न 2: इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य नदी-जोड़ परियोजनाओं, जल संचयन, अत्याधुनिक डिजिटल निगरानी और जनभागीदारी के माध्यम से राजस्थान को जल प्रबंधन में एक आत्मनिर्भर और राष्ट्रीय मॉडल बनाना है।

प्रश्न 3: योजना में जल संरक्षण के लिए कौन-कौन से उपाय शामिल हैं?

उत्तर: इसमें वर्षा जल संचयन, बावड़ी और टांका जैसे पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार, चेक डैम का निर्माण और उद्योगों में प्रयुक्त पानी का पुनर्चक्रण (Recycling) शामिल हैं।

प्रश्न 4: क्या इसमें भूजल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है?

उत्तर: हाँ, इसमें अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana) के तहत ग्रामीण समुदायों की भागीदारी से भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) और जल स्तर सुधारने पर विशेष बल दिया गया है। 

प्रश्न 5: किसानों को इससे क्या लाभ होगा?

उत्तर: किसानों को रामजल सेतु और सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) से रबी-खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा तथा ‘किसान साथी ऐप’ से पानी की उपलब्धता की सटीक जानकारी मिलेगी।और निर्मित किए गए हैं।

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