राज्य वित्त आयोग डेटासेट समिति रिपोर्ट (State Finance Commission Dataset Committee Report)
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने जून 2026 में ‘राज्य वित्त आयोगों के लिए डेटासेट’ (Report of the Committee on Datasets for State Finance Commissions – SFCs) पर एक रिपोर्ट जारी की।
- इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य डेटा-आधारित वित्तीय विकेंद्रीकरण (Data-driven Fiscal Decentralisation) को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर वित्तीय सुशासन (Local Public Finance) को पारदर्शी व साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) बनाना है।
राज्य वित्त आयोग डेटासेट समिति रिपोर्ट (State Finance Commission Report) के मुख्य बिंदु:
- चुनौतियाँ: रिपोर्ट ने स्थानीय स्वशासन (Local Self-Governance) के डेटा तंत्र में निम्नलिखित पाँच प्रमुख कमियों को रेखांकित किया है:
- डेटा का विखंडन (Data Fragmentation): स्थानीय निकायों का डेटा विभिन्न सरकारी विभागों में बिखरा हुआ है, जिससे एकीकृत डेटाबेस का अभाव है।
- ग्राम पंचायत स्तर पर स्पष्टता की कमी (Lack of Granularity): सूक्ष्म स्तर (Micro-level) या ग्राम पंचायत स्तर के सटीक वित्तीय और सेवा वितरण डेटा की भारी कमी है।
- लेखा प्रणालियों में भिन्नता (Accounting Variations): विभिन्न राज्यों की वित्तीय लेखांकन पद्धतियों (Accounting Practices) में एकरूपता नहीं है, जिससे तुलना करना कठिन होता है।
- पुराने डेटा पर निर्भरता (Outdated Datasets): आयोग अभी भी वित्तीय आवंटन के लिए जनगणना 2011 और SECC (सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना) जैसे पुराने आंकड़ों पर निर्भर हैं।
- क्षमता की कमी (Capacity Constraints): ग्राम पंचायतों के पास आधुनिक डेटा प्रबंधन और बहीखाता पद्धति (Book-keeping) के लिए प्रशिक्षित कर्मियों का अभाव है।
- प्रमुख श्रेणियां: समिति ने SFCs के सुचारू कामकाज के लिए डेटासेट को पांच प्रमुख श्रेणियों में मानकीकृत (Standardise) करने की सिफारिश की है:
- जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक संकेतक (Demographic & Socio-economic Indicators)
- राजस्व, व्यय, वित्तीय हस्तांतरण और ऋण विवरण (Revenue, Expenditure, Transfers, and Debt)
- सुशासन और विकेंद्रीकरण संकेतक (Governance and Devolution Indicators)
- बुनियादी ढांचा अंतराल और परिसंपत्ति सूचियाँ (Infrastructure Gaps and Asset Inventories)
- सार्वजनिक सेवा वितरण के परिणाम (Public Service Delivery Outcomes)
- सिफारिशें: समिति ने सिफारिश की है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) राज्यों में 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन का एक व्यापक ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ करे। इससे पंचायतों को हस्तांतरित वास्तविक कार्यों, वित्त और प्रशासनिक शक्तियों (3Fs – Functions, Funds, Functionaries) का सटीक मूल्यांकन हो सकेगा।
- वित्तीय डेटा को लगातार अपडेट रखने के लिए राज्यों में स्थायी राज्य वित्त आयोग प्रकोष्ठ (Permanent SFC Cells) स्थापित किए जाएं।
- राज्यों के बीच संवाद और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक औपचारिक मंच तथा एक व्यापक SFC मैनुअल तैयार किया जाए।
- वित्तीय आवंटन के फार्मूले को सटीक बनाने के लिए पंचायत उन्नति सूचकांक (Panchayat Advancement Index – PAI) के संकेतकों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाए: आवश्यकता (Needs), प्रदर्शन (Performance) और समानता/पिछड़ापन (Equity/Backwardness)
- स्थानीय निकायों को होने वाले वित्तीय हस्तांतरण के लिए एकरूप लेखा प्रणाली (Uniform Accounting Heads) और साझा रिपोर्टिंग प्रारूप लागू किया जाए।
- राज्य बजट में एक पूरक दस्तावेज (Supplementary Budget Document) शामिल हो, जो ग्राम पंचायत-वार आवंटन को प्रदर्शित करे।
- पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) और सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) मिलकर एक संयुक्त ‘डेटा हैंडबुक’ प्रकाशित करें।
नोट: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-I और 243-Y के तहत राज्यपाल द्वारा हर 5 वर्ष में SFC का गठन किया जाता है।
FAQs:
1. राज्य वित्त आयोग क्या है?
उत्तर: यह संविधान के अनुच्छेद 243-I और 243-Y के तहत राज्यपाल द्वारा गठित एक संवैधानिक निकाय है।
2. डेटासेट समिति रिपोर्ट का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य विश्वसनीय डेटा उपलब्ध कराकर साक्ष्य-आधारित वित्तीय विकेंद्रीकरण (Fiscal Decentralisation) और स्थानीय शासन को मजबूत करना है।
3. इस रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें क्या हैं?
उत्तर: प्रमुख सिफारिशों में CAG द्वारा परफॉर्मेंस ऑडिट, स्थायी SFC सेल की स्थापना और eGramSwaraj पोर्टल का सुदृढ़ीकरण शामिल हैं।
4. स्थानीय निकायों को इससे क्या लाभ होगा?
उत्तर: इससे उन्हें सटीक वित्तीय आवंटन मिलेगा, राजस्व क्षमता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सार्वजनिक सेवाएं सुनिश्चित होंगी।
5. राज्य वित्त आयोग की भूमिका क्या है?उत्तर: यह राज्य सरकार और स्थानीय निकायों (पंचायतों व नगर पालिकाओं) के बीच राजस्व के बंटवारे और अनुदान की सिफारिश करता है।
