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खुरासानी इमली को मिला GI टैग

खुरासानी इमली को मिला GI टैग

Khorasani Tamarind receives GI tag

संदर्भ:

हाल ही में मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक शहर मांडू की प्रसिद्ध खुरासानी इमली (Khurasani Imli GI Tag) को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया। यह भारत के प्रतिष्ठित जीआई टैग (GI Tag India) सूची में शामिल होने वाला एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पाद बन गया है। 

खुरासानी इमली से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु: 

  • उत्पत्ति: यह फल वास्तव में अफ्रीका के विशाल बाओबाब वृक्ष (Baobab tree) का फल है।
    • ऐसा माना जाता है कि 14वीं शताब्दी में महमूद खिलजी के शासनकाल के दौरान अफगान और अरब व्यापारी इस वृक्ष को मांडू लेकर आए थे।
  • भौगोलिक क्षेत्र: वर्तमान में मध्य प्रदेश का मांडू क्षेत्र भारत में इन दुर्लभ वृक्षों का सबसे बड़ा केंद्र है। यह स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली एक स्वदेशी उपज (Indigenous Produce) के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी है।
  • विशेषताएँ और स्वाद: सामान्य इमली की तुलना में खुरासानी इमली का स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है।
    • इसका फल हल्के हरे रंग का होता है जिसके गूदे में प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट और आवश्यक खनिज पाए जाते हैं। 
  • औषधीय महत्व: स्थानीय आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से इस कृषि विरासत (Agricultural Heritage) को संजोए हुए हैं। आदिवासी वैद्य इसके गूदे, बीज और सूखी छाल का उपयोग पाचन संबंधी बीमारियों, बुखार, थकान और मधुमेह के इलाज में करते हैं। 
  • आर्थिक प्रभाव: जीआई मान्यता (GI Recognition) मिलने से स्थानीय स्तर पर निर्मित बाओबाब जूस और छाल से बने उत्पादों की ब्रांडिंग मजबूत होगी।
    • इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को गति मिलेगी और अब तक सड़क किनारे उत्पाद बेचने वाले आदिवासियों को सही मूल्य मिलेगा। 

भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग क्या है?

  • परिचय: भौगोलिक संकेत टैग (Geographical Indication Tag) एक विशेष प्रकार का चिन्ह या नाम होता है।
    • यह मुख्य रूप से उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी विशिष्ट भौगोलिक मूल क्षेत्र से जुड़े होते हैं। 
    • उत्पाद की विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा और विशेषता पूरी तरह से उसके मूल स्थान की जलवायु, मिट्टी या पारंपरिक निर्माण पद्धति पर निर्भर करती है। 
  • वैधता: भारत में दिया जाने वाला प्रत्येक जीआई टैग 10 वर्षों के लिए वैध होता है, जिसे बाद में नवीनीकृत (रिन्यू) कराया जा सकता है।
  • श्रेणियाँ: यह टैग मुख्य रूप से कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों, हस्तशिल्प, वस्त्रों और प्राकृतिक वस्तुओं को दिया जाता है।
  • कानूनी कानून: भारत में यह प्रणाली ‘वस्तुओं का भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ के तहत संचालित होती है।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य प्रामाणिक क्षेत्रीय विशिष्टता (Regional Specialty) की रक्षा करना और बाजार में नकली उत्पादों की बिक्री को रोकना है।

 मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख GI टैग उत्पाद:

  • 1. चंदेरी साड़ियाँ (Chanderi Sarees): अशोकनगर जिले की यह पारंपरिक रेशमी और सूती साड़ियाँ अपनी हल्की बुनाई और खूबसूरत जरी के काम के लिए जानी जाती हैं।
  • 2. महेश्वर साड़ियाँ (Maheshwar Sarees): खरगोन जिले के महेश्वर की यह साड़ियाँ अपने विशेष डिजाइन, हल्केपन और शाही किनारों के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • 3. बाघ प्रिंट (Bagh Print): धार जिले का यह हस्तशिल्प प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के ठप्पों (ब्लॉक) से बने अद्वितीय ज्यामितीय और पुष्प डिजाइनों के लिए मशहूर है।
  • 4. कड़कनाथ चिकन मीट (Kadaknath): झाबुआ का यह प्रसिद्ध काले रंग का मुर्गा, अपने औषधीय गुणों और उच्च प्रोटीन वाले काले मांस के लिए जाना जाता है।
  • 5. रतलामी सेव (Ratlami Sev): रतलाम की यह तीखी और कुरकुरी नमकीन अपने खास स्वाद और लौंग के उपयोग के कारण देश भर में पसंद की जाती है।
  • 6. चिन्नौर चावल (Chinnor Rice): बालाघाट की इस सुगंधित चावल की किस्म को इसकी बेहतरीन गुणवत्ता और स्वाद के लिए हाल ही में जीआई टैग मिला है।
  • 7. मुरैना की गजक (Morena Gajak): मुरैना की यह मीठी और कुरकुरी तिल-गुड़ की गजक सर्दियों के मौसम में सबसे लोकप्रिय है।
  • 8. गोंड पेंटिंग (Gond Painting): डिंडोरी और इसके आस-पास के क्षेत्रों की यह पारंपरिक आदिवासी कला प्रकृति के प्रति प्रेम और आकर्षक बिंदुओं/रेखाओं के लिए जानी जाती है।
  • 9. सुंदरजा आम (Sunderja Mango): रीवा क्षेत्र का यह आम बिना रेशे वाला और स्वाद में बेहद मीठा होता है, जिसे विशेष पहचान मिली है।
  • 10. धातु शिल्प/बेल मेटल (Bell Metal Ware): दतिया और टीकमगढ़ का यह हस्तशिल्प पारंपरिक और कलात्मक धातु की मूर्तियों व बर्तनों के लिए प्रसिद्ध है।

FAQ:

1. खुरासानी इमली क्या है?

यह मध्य प्रदेश के मांडू में पाए जाने वाले ऐतिहासिक बाओबाब वृक्ष का एक पौष्टिक, औषधीय गुणों से भरपूर खट्टा-मीठा अनोखा फल है।

2. इसे GI टैग क्यों मिला?

इसके अनूठे स्वाद, औषधीय गुणों, विशिष्ट भौगोलिक पहचान और मांडू क्षेत्र के साथ इसके 600 साल पुराने ऐतिहासिक जुड़ाव के कारण यह मिला है। 

3. GI टैग का क्या महत्व है?

यह उत्पाद को कानूनी संरक्षण देता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग बढ़ाता है और उपभोक्ताओं को असली एवं गुणवत्तापूर्ण स्थानीय खाद्य उत्पाद (Local Food Products) सुनिश्चित करता है। 

4. इससे किसानों को क्या लाभ होगा?

इससे आदिवासी किसानों को वैश्विक बाजार मिलेगा, बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और उनके दुर्लभ सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) उत्पादों का सही मूल्य प्राप्त होगा।

5. यह किस क्षेत्र की विशेष पहचान है?

यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक मांडू क्षेत्र की एक विशेष और अद्वितीय पहचान बन चुकी है।

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