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बॉस स्कैम

बॉस स्कैम

Boss Scam

संदर्भ:

गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने देश में तेजी से बढ़ रहे एक नए और खतरनाक डिजिटल फ्रॉड (Digital Fraud) को लेकर आधिकारिक एडवाइजरी जारी की है, जिसे “बॉस स्कैम” (Boss Scam) या सीईओ इंपर्सनेशन फ्रॉड (CEO Impersonation Fraud) नाम दिया गया है।

बॉस स्कैम क्या है?

  • परिचय: यह एक वित्तीय साइबर अपराध (Financial Cyber Crime) है, जिसके तहत ठग किसी कंपनी के शीर्ष अधिकारियों या नियामकों का नकली रूप धारण करके कर्मचारियों को अपना शिकार बनाते हैं। 
  • शुरुआत: साइबर अपराधी (Cybercriminals) सबसे पहले कंपनी के सीईओ (CEO) या वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाते हैं।
    • वे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे बड़े नियामकों के नाम पर ईमेल या व्हाट्सएप बॉस स्कैम (WhatsApp Boss Scam) के जरिए फर्जी दस्तावेज भेजते हैं। 
  • तकनीकी हेरफेर (Malware Attack): इन संदेशों के साथ एक मैलिशियस आर्काइव फाइल (दुर्भावनापूर्ण लिंक/फाइल) जुड़ी होती है, जिसे तत्काल अनुपालन (Compliance Update) का नाम दिया जाता है।
    • जैसे ही अधिकारी इस फाइल को अपने कंप्यूटर पर खोलता है, उसका सिस्टम मैलवेयर से संक्रमित हो जाता है। 
  • व्हाट्सएप सेशन हैकिंग: मैलवेयर के सक्रिय होते ही ठग उस अधिकारी के वेब व्हाट्सएप (Web WhatsApp) सेशन को पूरी तरह से हैक (Hijack) कर लेते हैं।
    • इसके बाद वे उस असली व्हाट्सएप अकाउंट का उपयोग करने लगते हैं।
  • अधीनस्थों को निशाना बनाना: हैक किए गए खाते से ठग कंपनी के जूनियर कर्मचारियों या फाइनेंस डिपार्टमेंट को सीधे मैसेज भेजते हैं।
    • वे किसी गुप्त बिजनेस डील या ‘अत्यंत जरूरी’ काम का हवाला देकर तुरंत फंड ट्रांसफर करने का निर्देश देते हैं। 
  • मनोवैज्ञानिक दबाव (Social Engineering Attack): इस सोशल इंजीनियरिंग हमले (Social Engineering Attack) में ठग “मैं अभी एक बेहद महत्वपूर्ण मीटिंग में हूँ, इसलिए मुझे कॉल न करें” जैसी बातें लिखकर कर्मचारियों को फोन पर वेरिफिकेशन करने से रोकते हैं और जल्दबाजी में भुगतान करवा लेते हैं। 

भारत में प्रचलित अन्य प्रमुख साइबर घोटाले:

बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज (Business Email Scam)2021–2022कंपनियों के आधिकारिक ईमेल को हैक कर फर्जी वेंडर बिल भेजना।
बिजली बिल फ्रॉड (Electricity Bill Fraud)2022–2023बिल बकाया होने और कनेक्शन कटने का डर दिखाकर पैसे ठगना।
फेडेक्स/कूरियर घोटाला (Courier Scam)2023–2024पार्सल में अवैध ड्रग्स मिलने की बात कहकर डराना और ठगी करना।
डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest Scam)2024–2025फर्जी सीबीआई/पुलिस बनकर वीडियो कॉल पर बंधक बनाना और वसूली करना।
ई-सिम फ्रॉड (eSIM Mobile Fraud)2025–2026सिम अपग्रेड के नाम पर ओटीपी चुराकर बैंक खाते खाली करना।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C):

  • परिचय: भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) के तहत एक पहल है, जिसे देश में साइबर अपराधों से व्यापक, समन्वित और प्रभावी तरीके से निपटने के लिए स्थापित किया गया है।
    • यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) और अन्य हितधारकों के बीच तालमेल बिठाने के लिए एक नोडल केंद्र के रूप में कार्य करता है।
  • I4C के प्रमुख कार्य और घटकराष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP): नागरिक साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें नेशनल साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं।
    • साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत सहायता और फंड को ब्लॉक कराने के लिए 1930 हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।
    • समन्वय प्लेटफॉर्म (Samanvaya Platform): पुलिस अधिकारियों के लिए एक डेटा रिपॉजिटरी और प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) जो विभिन्न राज्यों के बीच साइबर अपराध के डेटा साझा करने में मदद करती है।
    • प्रतिबिंब (Pratibimb): यह एक ऐसी प्रणाली है जो साइबर अपराधियों और अपराध के बुनियादी ढांचे की पहचान कर उन्हें मैप करती हैं।
  • I4C की संरचना: इसके प्रमुख घटकों में शामिल हैं: नेशनल साइबर अपराध थ्रेट एनालिटिक्स यूनिटनेशनल साइबर क्राइम फॉरेंसिक लेबोरेटरी (NCFL), नेशनल साइबर क्राइम ट्रेनिंग सेंटरनेशनल साइबर क्राइम रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर। 

FAQ:

1. बॉस स्कैम क्या है?

यह एक परिष्कृत साइबर अपराध (Cyber Crime India) है, जहाँ ठग कंपनी के मालिक या सीईओ का रूप धारण कर कर्मचारियों से धोखाधड़ी से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

2. यह साइबर ठगी कैसे की जाती है?

अपराधी मैलवेयर के जरिए अधिकारी का व्हाट्सएप सेशन हैक करते हैं और फिर उनके असली खाते से वित्तीय विभाग को तत्काल भुगतान का आदेश भेजते हैं। 

3. इससे बचने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के केवल मैसेज या ईमेल पर भरोसा न करें, पैसे भेजने से पहले हमेशा फोन कॉल या आमने-सामने पुष्टि करें। 

4. किन लोगों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया जाता है?

इसमें मुख्य रूप से कॉर्पोरेट कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों, वित्त विभाग (Finance Personnel) के कर्मचारियों और खातों का प्रबंधन करने वाले लेखाकारों को लक्षित किया जाता है। 

5. साइबर फ्रॉड की शिकायत कहाँ करें?

धोखाधड़ी होने पर बिना देरी किए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

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