African Swine Fever Vaccine India- भारत का पहला स्वदेशी ASF लाइव एटेन्यूएटर टीका
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) लाइव एटेन्यूएटर टीका (African Swine Fever Vaccine) राष्ट्र को समर्पित किया।
भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर (African Swine Fever Vaccine) टीका:
- परिचय: यह सूअरों को अत्यधिक घातक ‘अफ्रीकी स्वाइन फीवर वायरस’ से बचाने के लिए विकसित किया गया भारत का पहला एमए-104 सेल लाइन-आधारित लाइव एटेन्यूएटेड टीका (Live Attenuated Vaccine) है।
- लाइव एटेन्यूएटेड टीके में कमजोर किए गए जीवित रोगजनकों का उपयोग किया जाता है, जो बीमारी पैदा किए बिना शरीर में मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करते हैं।
- निर्माता: इस स्वदेशी टीके (Indigenous ASF Vaccine) का सफल निर्माण भोपाल (मध्य प्रदेश) स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-NIHSAD) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया।
- तकनीकी आधार:
- वायरस स्ट्रेन: वैज्ञानिकों ने भारत में पाए जाने वाले वास्तविक फील्ड आइसोलेट का उपयोग करके एक नवीन कमजोर ‘ASFV जीनोटाइप II’ (Genotype II) वायरस स्ट्रेन तैयार किया। भारत में होने वाले अधिकांश प्रकोपों के लिए यही जीनोटाइप जिम्मेदार है।
- जीन विलोपन (Gene Deletion): वायरस की आक्रामक क्षमता को समाप्त करने के लिए उसकी आनुवंशिक संरचना से विशिष्ट जीनों को हटा दिया गया है।
- सेल लाइन नवाचार (Cell Line Innovation): वियतनाम जैसे देशों में उपलब्ध मौजूदा टीकों में पेटेंटेड प्रोप्रायटरी सेल लाइनों का उपयोग होता है।
- इसके विपरीत, भारतीय वैज्ञानिकों ने व्यापक रूप से सुलभ MA-104 सेल लाइन का उपयोग किया है, जो बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन को सुगम बनाती है।
- प्रयोगशाला परीक्षण: वैधता प्रक्रिया के दौरान इस टीके का व्यापक प्रयोगशाला मूल्यांकन (Comprehensive Laboratory Evaluation) किया गया, जिसमें निम्नलिखित मानकों पर यह पूरी तरह खरा उतरा:
- रोगाणुहीनता और शुद्धता (Sterility and Purity)
- आनुवंशिक स्थिरता (Genetic Stability)
- प्रतिरक्षाजनकता (Immunogenicity)
- विषाणु परिवर्तन अध्ययन (Virulence Reversion Studies – यह सुनिश्चित करना कि कमजोर वायरस दोबारा घातक न बने)।
- लक्षित जानवर (Target Animals): यह टीका 8 सप्ताह (दो महीने) से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और अनुशंसित है।
- खुराक: इसे 1 मिलीलीटर (1 mL) इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन (मांसपेशी में) के माध्यम से दिया जाता है।
- बूस्टर खुराक: प्राथमिक टीकाकरण के 14 दिन बाद एक बूस्टर डोज दी जानी आवश्यक है।
- क्षेत्रीय सत्यापन: पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) के सहयोग से वास्तविक मैदानी परिस्थितियों (Field Conditions) में इसका सफल सत्यापन किया गया है।
- कम लागत: स्वदेशी MA-104 प्लेटफॉर्म के उपयोग के कारण यह विदेशी टीकों की तुलना में बेहद सस्ता और विनिर्माण लागत को कम करने वाला है।
- विश्वसनीयता: भारतीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल वायरस स्ट्रेन से निर्मित होने के कारण इसकी सुरक्षात्मक प्रभावकारिता (Protective Efficacy) अत्यधिक विश्वसनीय है।
- बाजार उपलब्धता: पेटेंटिंग और फार्मास्युटिकल कंपनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) की प्रक्रिया के बाद अगले 6 महीनों के भीतर यह टीका व्यावसायिक रूप से बाजार में उपलब्ध हो जाएगा।
अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) क्या है? (What is African Swine Fever?)
- परिचय: यह घरेलू और जंगली सूअरों में होने वाली एक अत्यधिक संक्रामक और जानलेवा वायरल बीमारी (Viral Disease) है।
- यह ‘अस्फाविरिरेडे’ (Asfarviridae) परिवार के एक बड़े डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए (dsDNA) वायरस के कारण होता है।
- संक्रमण: संक्रमित सूअरों के सीधे संपर्क में आने से, दूषित चारा, पानी या संक्रमित मांस खाने से, दूषित कपड़े, वाहन या उपकरणों के जरिए।
- लक्षण: संक्रमित सूअरों में तेज बुखार, त्वचा पर रक्तस्राव (Haemorrhages), भूख न लगना और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
- इस बीमारी में मृत्यु दर 100% तक पहुँच सकती है, जिससे यह पशुधन क्षेत्र के लिए अत्यंत विनाशकारी है।
- मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव: यह गैर-जूनोटिक है। अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) इंसानों में नहीं फैलता है। यह केवल सूअर वंश के जानवरों (Suids) को प्रभावित करता है, इसलिए यह प्रत्यक्ष रूप से मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं है।
- आर्थिक प्रभाव: भारत में वर्ष 2020 में इसके पहले मामले की पुष्टि हुई थी। इसके बाद से असम (₹276 करोड़ का नुकसान) और मिजोरम (₹982 करोड़ का नुकसान) सहित पूर्वोत्तर राज्यों के छोटे किसानों की आजीविका को इससे भारी क्षति पहुँची है।
- इलाज या टीके के अभाव में अब तक एकमात्र उपाय संक्रमित पशुओं को मारना (Mass Culling) और सख्त जैव-सुरक्षा (Livestock Biosecurity) नियम लागू करना ही था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) क्या है?
उत्तर: यह सूअरों (Swine Fever) में होने वाली एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसमें मृत्यु दर 100% तक होती है। इसका कोई इलाज नहीं है।
प्रश्न 2: भारत का पहला स्वदेशी ASF टीका किसने विकसित किया?
उत्तर: इस ऐतिहासिक लाइव एटेन्यूएटर टीके को भोपाल स्थित ICAR-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-NIHSAD) के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।
प्रश्न 3: यह टीका क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह पेटेंट-मुक्त MA-104 सेल लाइन पर आधारित है। यह उत्पादन लागत घटाकर भारत को वैश्विक स्तर पर किफायती पशु टीकों का आपूर्तिकर्ता बनाता है।
प्रश्न 4: ASF किन जानवरों को प्रभावित करता है?
उत्तर: यह वायरस केवल घरेलू सूअरों और जंगली सूअरों (Wild Suids) को संक्रमित करता है तथा उनके अंगों में तीव्र रक्तस्राव का कारण बनता है।
प्रश्न 5: क्या यह बीमारी इंसानों में फैलती है?
उत्तर: नहीं, यह एक गैर-जूनोटिक बीमारी है। यह संक्रमित सूअरों या मांस के संपर्क में आने पर भी मनुष्यों को संक्रमित नहीं करती है।
प्रश्न 6: इस टीके से किसानों को क्या लाभ होगा?
उत्तर: इससे सूअरों की अकाल मृत्यु रुकेगी, महामारी के दौरान होने वाली सामूहिक हत्या (Culling) से बचाव होगा और पशुपालकों की आजीविका (Animal Husbandry) सुरक्षित रहेगी।
