Article 370 Abrogation- अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल पूरे, जानिए क्या था यह आर्टिकल?
संदर्भ:
हाल ही में 5 अगस्त 2026 को भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने (Article 370 Abrogation) के ऐतिहासिक फैसले के सफल 7 वर्ष पूरे हो हुए ।
अनुच्छेद 370: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विशेष प्रावधान
- परिचय: भारतीय संविधान (Indian Constitution) का अनुच्छेद 370 एक ‘अस्थायी प्रावधान’ (Temporary Provision) था। इस प्रावधान के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष स्वायत्तता और एक अलग दर्जा प्रदान किया गया था।
- ऐतिहासिक संदर्भ: वर्ष 1947 में विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए थे।
- उस समय की विशेष भू-राजनीतिक परिस्थितियों और राज्य के भारत में शांतिपूर्ण विलय को सुनिश्चित करने के लिए इस अस्थायी अनुच्छेद को शामिल किया गया था।
- इसे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार के दौरान तैयार किया गया था। एन. गोपालस्वामी आयंगर इसके मुख्य वास्तुकार थे।
- इसे 17 अक्टूबर 1949 को भारतीय संविधान में जोड़ा गया था।
- विशेष प्रावधान: अनुच्छेद 370 के प्रभावी रहने तक जम्मू-कश्मीर को निम्नलिखित विशेष अधिकार प्राप्त थे:
- अलग संविधान और ध्वज: राज्य का अपना एक अलग संविधान था और देश के तिरंगे के साथ उनका एक अलग राज्य ध्वज भी था।
- सीमित विधिक शक्ति: भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर के लिए केवल रक्षा, विदेश मामले, वित्त और संचार विषयों पर ही कानून बनाने का अधिकार था। अन्य केंद्रीय कानूनों को लागू करने के लिए राज्य विधानसभा की सहमति अनिवार्य थी।
- नागरिकता और संपत्ति अधिकार: राज्य के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता थी। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 35A (Article 35A) के तहत केवल वहां के स्थायी निवासियों को ही राज्य में जमीन खरीदने, सरकारी नौकरी पाने और स्थानीय चुनावों में वोट देने का विशेष अधिकार था। भारत के अन्य राज्यों के नागरिक वहां संपत्ति नहीं खरीद सकते थे।
- आपातकाल और कार्यकाल: राज्य में वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) लागू नहीं किया जा सकता था। वहां की विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष के बजाय 6 वर्ष का होता था।
अनुच्छेद 370 को हटाना: प्रक्रिया और कारण
- दिनांक: भारत सरकार ने वर्ष 2019 में एक सुविचारित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से इस प्रावधान को समाप्त कर दिया। यह ऐतिहासिक निर्णय 5 अगस्त 2019 को लिया गया।
- किसके द्वारा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा गृह मंत्री अमित शाह ने इसे संसद में प्रस्तुत किया।
- हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया:
- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संवैधानिक आदेश 272 जारी किया। इसके तहत अनुच्छेद 370 के भीतर ही बदलाव करके ‘राज्य की संविधान सभा’ शब्द को ‘राज्य की विधानसभा’ के रूप में व्याख्यायित किया गया।
- चूंकि उस समय राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था, इसलिए संसद ने राज्य विधानसभा की शक्तियों का उपयोग करते हुए अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की सिफारिश का प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिया।
- इसके तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 पारित किया गया। इसके तहत राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territory)—जम्मू-कश्मीर (विधानसभा के साथ) और लद्दाख (बिना विधानसभा के) में विभाजित कर दिया गया।
- कारण:
- पूर्ण एकीकरण (Full Integration): ‘एक देश, एक संविधान’ की अवधारणा को साकार करना और जम्मू-कश्मीर को भारत के मुख्यधारा के कानूनी ढांचे में पूरी तरह शामिल करना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security): अलगाववाद, सीमा पार आतंकवाद और पत्थरबाजी जैसी घटनाओं पर कड़ा नियंत्रण स्थापित करना।
- समान अधिकार और सामाजिक न्याय: भारत के प्रगतिशील कानून जैसे शिक्षा का अधिकार (RTE), सूचना का अधिकार (RTI), और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) आरक्षण कानून वहां लागू नहीं थे। वंचित समुदायों और महिलाओं को समान अधिकार देने के लिए इसे हटाना जरूरी था।
- आर्थिक विकास (Kashmir Development): निजी निवेश पर लगी पाबंदियों को हटाकर राज्य में उद्योगों, पर्यटन, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और कृषि बुनियादी ढांचे का विकास करना।
- न्यायिक समीक्षा: इस संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment) की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
- 11 दिसंबर 2023 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा।
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था। संप्रभुता के मामले में जम्मू-कश्मीर के पास भारत के अन्य राज्यों से अलग कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं थी।
- कोर्ट ने राज्य में जल्द से जल्द लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने का भी निर्देश दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: अनुच्छेद 370 क्या था?
उत्तर: यह भारतीय संविधान (Indian Constitution) का एक अस्थायी प्रावधान था, जो जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा, अलग संविधान और कानून बनाने की स्वायत्तता देता था।
प्रश्न 2: अनुच्छेद 370 कब हटाया गया?
उत्तर: केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को एक ऐतिहासिक संसदीय संकल्प और राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से इसे पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया था।
प्रश्न 3: इसे हटाने का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इसका उद्देश्य राज्य में आतंकवाद को समाप्त करना, पूर्ण संवैधानिक एकीकरण सुनिश्चित करना, सामाजिक न्याय देना और आर्थिक निवेश व विकास को बढ़ावा देना था।
प्रश्न 4: जम्मू-कश्मीर पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: इसके हटने से दोहरी नागरिकता समाप्त हुई, भारतीय संविधान पूर्णतः लागू हुआ और राज्य दो अलग केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख) में बदल गया।
प्रश्न 5: अनुच्छेद 35A क्या था?
उत्तर: यह अनुच्छेद 370 के अंतर्गत ही शामिल था, जो जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को स्थायी निवासियों को परिभाषित करने और भूमि खरीद व नौकरियों में विशेष अधिकार देता था।
प्रश्न 6: क्या सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर कोई निर्णय दिया है?
उत्तर: हाँ, दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने केंद्र सरकार के इस फैसले को पूरी तरह संवैधानिक और वैध ठहराया है।
