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शास्त्रीय सूफियाना संगीत

शास्त्रीय सूफियाना संगीत

classical sufi music

संदर्भ:

जम्मू और कश्मीर सरकार ने घाटी के पारंपरिक शास्त्रीय संगीत ‘सूफियाना कलाम’ (सूफियाना मौसीकी) को यूनेस्को (UNESCO) की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (Intangible Cultural Heritage – ICH) सूची में शामिल करने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को एक आधिकारिक प्रस्ताव भेजा है। 

जम्मू और कश्मीर का शास्त्रीय सूफियाना संगीत:

  • उत्पत्ति और काल (Origin and Period): इस विशिष्ट संगीत परंपरा की शुरुआत कश्मीर में 14वीं और 15वीं शताब्दी के बीच मानी जाती है, जो आज भी अनवरत रूप से जीवित है।
  • सांस्कृतिक समन्वय (Cultural Fusion): यह कला रूप मुख्य रूप से फारसी, मध्य एशियाई और भारतीय शास्त्रीय संगीत (Indian Classical Music) प्रणालियों का एक सुंदर मिश्रण है।
  • मकाम व्यवस्था (Maqam System): भारतीय शास्त्रीय संगीत के ‘रागों’ की तरह सूफियाना संगीत में ‘मकाम’ (Maqam) व्यवस्था होती है, जो विशिष्ट सुरों और समय चक्रों पर आधारित होती है।
  • लुप्तप्राय मकाम (Declining Maqams): इतिहास में मूल रूप से 54 मकाम चलन में थे, लेकिन संरक्षण के अभाव में वर्तमान में केवल 20 से 25 मकाम ही जीवित बचे हैं।
  • सूफी संतों का प्रभाव (Influence of Sufi Saints): ईरान, बुखारा और समरकंद से आए सूफी संतों (Sufi Saints) ने स्थानीय शैव (Shaivite) और बौद्ध परंपराओं के साथ मिलकर इस विधा को विकसित किया।
  • सामूहिक गायन (Choral Ensemble): अन्य सूफी रूपों के विपरीत, कश्मीरी सूफियाना कलाम एक शास्त्रीय सामूहिक गायन विधा है, जिसे कलाकारों का एक समूह मिलकर गाता है।
  • द्विभाषी कविता (Bilingual Poetry): इसके गीतों और कलामों में मुख्य रूप से फारसी और कश्मीरी भाषा के सूफी रहस्यों से भरे छंदों का उपयोग किया जाता है।
  • प्रधान वाद्य यंत्र – संतूर (Santoor – The Prime Instrument): सूफियाना मौसीकी का मुख्य वाद्य यंत्र ‘सूफियाना संतूर’ है, जिसमें 100 तार (Strings) होते हैं और इसे त्रिकोणीय स्टैंड पर रखकर बजाया जाता है।
  • अन्य विशिष्ट वाद्य (Accompanying Instruments): इसके प्रदर्शन में संतूर के साथ सेहतार (Sehtaar), साज़-ए-कश्मीर, रबाब, तबला और नेय (बांसुरी) का उपयोग किया जाता है।
  • गायक ही वादक (Vocalist-Instrumentalist Duo): इस संगीत परंपरा में प्रस्तुति देने वाले 5 से 7 संगीतकार एक साथ मुख्य गायक भी होते हैं और वाद्य यंत्र भी बजाते हैं
  • लयहीन शुरुआत (Ahythmic Prelude): प्रत्येक सूफियाना प्रस्तुति की शुरुआत एक संक्षिप्त वाद्य यंत्र प्रस्तावना और बिना किसी ताल के गाई जाने वाली लघु कविता (शकल) से होती है।
  • ताल चक्र (Tala Cycles): इसमें विशिष्ट तालों (जैसे- यका ताल, सेहताल) का उपयोग होता है, जहाँ प्रस्तुति बड़े और लंबे तालों से शुरू होकर छोटे और तीव्र तालों पर समाप्त होती है।
  • मौखिक अंतरण (Oral Tradition): इस संगीत परंपरा (Music Tradition) का कोई लिखित दस्तावेज नहीं है; इसे पीढ़ियों से केवल मौखिक रूप से (Guru-Shishya Parampara) आगे बढ़ाया गया है।
  • भौगोलिक संकुचन (Geographical Shrinkage): यह प्राचीन विधा अब कश्मीर के केवल तीन जिलों—बड़गाम, श्रीनगर और अनंतनाग के कुछ गिने-चुने घरानों (Gharanas) तक ही सीमित रह गई है।
  • सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक (Symbol of Harmony): सूफियाना कलाम सदियों से कश्मीर की साझा संस्कृति (कश्मीरियत) और विभिन्न सभ्यताओं के बीच शांतिपूर्ण संवाद का माध्यम रहा है।

यूनेस्को (UNESCO) सूची में शामिल भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतें:

  • वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा (Tradition of Vedic Chanting – 2008): भारत की प्राचीन मौखिक वेद पाठ शैली।
  • कुटियाट्टम (Kutiyattam – 2008): केरल का संस्कृत थियेटर, जो प्राचीन अभिनय और संगीत कला को दर्शाता है।
  • रम्म्ण (Ramman – 2009): उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय का धार्मिक त्योहार और अनुष्ठानिक रंगमंच।
  • कालबेलिया लोक गीत और नृत्य (Kalbelia – 2010): राजस्थान का पारंपरिक लोक संगीत और नृत्य।
  • छऊ नृत्य (Chhau Dance – 2010): पूर्वी भारत (ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल) का मार्शल और आदिवासी लोक नृत्य।
  • लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्चार (Buddhist Chanting of Ladakh – 2012): जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मठों में किया जाने वाला पवित्र पाठ।
  • संकीर्तन (Sankirtana – 2013): मणिपुर का अनुष्ठानिक गायन, ढोल वादन और नृत्य।
  • नोट: इसके अलावा हाल ही में वर्ष 2023 में गुजरात के ‘गरबा नृत्य’ और वर्ष 2025 में ‘दीपावली उत्सव’ को भी इस वैश्विक सूची में शामिल किया गया है।

FAQs:

  1. शास्त्रीय सूफियाना संगीत क्या है?

    यह कश्मीर का 15वीं सदी का एक अनूठा शास्त्रीय सामूहिक संगीत है, जो फारसी मकाम और भारतीय रागों का अनूठा मिश्रण है।

  2. सूफी संगीत की शुरुआत कैसे हुई?

    इसकी शुरुआत मध्य एशिया और फारस से आए सूफी संतों द्वारा स्थानीय कश्मीरी संगीत शैलियों के समन्वय से हुई थी।

  3. सूफी संगीत की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?

    इसकी मुख्य विशेषताएं मकाम व्यवस्था, 100 तारों वाला सूफियाना संतूर, सामूहिक गायन और कश्मीरी-फारसी भाषा के सूफियाना कलाम हैं।

  4. भारत में सूफी संगीत का क्या महत्व है?

    यह भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब, आध्यात्मिक शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और बहुसांस्कृतिक इतिहास को प्रदर्शित करने वाला एक अमूल्य स्तंभ है।

  5. प्रसिद्ध सूफी संगीतकार कौन हैं?

    कश्मीर के स्थापित सूफियाना घरानों के उस्ताद (जैसे बड़गाम और श्रीनगर के घराने) इस कला के अंतिम जीवित संरक्षक और संगीतकार हैं।

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