भारतीय महिलाओं ने जीता 2026 ग्रीन ऑस्कर पुरस्कार
Image Credit: Whitley Award
संदर्भ:
हाल ही में भारत की दो दिग्गज महिला पर्यावरणविदों ने प्रतिष्ठित व्हिटली पुरस्कार 2026 (Whitley Awards 2026) जीतकर वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है, जिसे पर्यावरण संरक्षण का ‘ग्रीन ऑस्कर’ (Green Oscar Award) कहा जाता है।
2026 ‘ग्रीन ऑस्कर’ पुरस्कार से संबंधित मुख्य बिंदु:
- समारोह: 29 अप्रैल 2026 को लंदन की रॉयल जियोग्राफिकल सोसाइटी (Royal Geographical Society) में यह आयोजित किया गया।
- विजेता: ब्रिटिश राजकुमारी ऐन (Princess Anne) ने भारत की परवीन शेख (Parveen Shaikh) और डॉ. बरखा सुब्बा (Dr. Barkha Subba) को इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा।
- वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation India) और जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए व्हिटली फंड फॉर नेचर (Whitley Fund for Nature – WFN) द्वारा प्रत्येक विजेता को परियोजना के विस्तार के लिए £50,000 पाउंड (लगभग ₹52 लाख रुपये) की पुरस्कार राशि और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
विजेता महिलाओं का परिचय:
- परवीन शेख – ‘इंडियन स्किमर’ पक्षी की रक्षक (Parveen Shaikh – Protector of the Indian Skimmer): परवीन शेख बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS – Bombay Natural History Society) के साथ जुड़ी एक समर्पित वन्यजीव वैज्ञानिक हैं।
- उन्होंने चंबल नदी बेसिन में गंभीर रूप से संकटग्रस्त ‘इंडियन स्किमर’ (Indian Skimmer – Rynchops albicollis) पक्षी के संरक्षण के लिए ‘गार्डियंस ऑफ द स्किमर’ (Guardians of the Skimmer) मॉडल विकसित किया। यह पक्षी नदी के रेतीले किनारों (Sandbars) पर अंडे देता है, जो बाढ़, अवैध रेत खनन और आवारा कुत्तों के कारण नष्ट हो जाते थे।
- उनके सामुदायिक संरक्षण मॉडल के कारण चंबल में इन पक्षियों की आबादी 2017 में महज 400 से बढ़कर अब लगभग 1,000 हो गई है। अब वे इस फंड का उपयोग करके गंगा-यमुना के संगम स्थल प्रयागराज तक इस परियोजना का विस्तार करेंगी।
- डॉ. बरखा सुब्बा – हिमालयन सैलामैंडर की मसीहा (Dr. Barkha Subba – Savior of the Himalayan Salamander): डॉ. बरखा सुब्बा दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्र की रहने वाली एक प्रख्यात संरक्षण वैज्ञानिक हैं, जो दार्जिलिंग में ‘फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज फॉर एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन’ (FOSEP) के साथ काम कर रही हैं।
- उन्होंने लुप्तप्राय ‘हिमालयन सैलामैंडर’ (Himalayan Salamander) नामक एक अत्यंत दुर्लभ उभयचर (Amphibian) जीव और उसके नाजुक आर्द्रभूमि (Wetland) आवासों को बचाने के लिए “सर्वाइवर ऑफ ए लॉस्ट वर्ल्ड” (Survivor of a Lost World) नामक अभियान चलाया है।
- अनियंत्रित पर्यटन, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन (Climate Action India) के कारण इस जीव के प्रजनन तालाब नष्ट हो रहे थे। डॉ. सुब्बा ने स्थानीय समुदायों को जोड़कर 7 प्रमुख प्रजनन स्थलों का पुनरुद्धार किया है और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर पर्यावरण नेतृत्व (Environmental Leadership) की नई मिसाल पेश की।
व्हिटली पुरस्कार या ‘ग्रीन ऑस्कर’ क्या है? (What is the Green Oscar Award?)
- स्थापना और उद्देश्य: इसकी स्थापना वर्ष 1993 में एडवर्ड व्हिटली (Edward Whitley) द्वारा की गई थी।
- इसका मुख्य उद्देश्य ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के उन जमीनी पर्यावरण नायकों (Indian Environmentalists) को वित्तीय और रणनीतिक सहायता देना है जो स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करते हैं।
- चयन प्रक्रिया: वर्ष 2026 में इस पुरस्कार के लिए अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों से रिकॉर्ड 270 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से कड़ी वैश्विक स्क्रीनिंग के बाद केवल छह सर्वश्रेष्ठ पर्यावरणविदों को चुना गया।
- महत्व: यह पुरस्कार विजेताओं को केवल फंड ही नहीं देता, बल्कि उन्हें एक वैश्विक नेटवर्क, मीडिया और संचार प्रशिक्षण (Communications Training) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दृश्यता (Visibility) प्रदान करता है।
FAQs:
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Green Oscar Award क्या है?
यह ब्रिटेन के व्हिटली फंड फॉर नेचर (WFN) द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार है, जिसे आधिकारिक तौर पर व्हिटली अवार्ड कहते हैं।
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भारतीय महिलाओं को यह पुरस्कार क्यों मिला?
परवीन शेख को ‘इंडियन स्किमर’ पक्षी और डॉ. बरखा सुब्बा को ‘हिमालयन सैलामैंडर’ जीव के सामुदायिक संरक्षण के लिए यह पुरस्कार मिला
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Whitley Awards 2026 क्या हैं?
यह अप्रैल 2026 में लंदन में आयोजित वार्षिक पुरस्कार समारोह है, जहाँ दुनिया के 6 शीर्ष पर्यावरण संरक्षणवादियों को सम्मानित किया गया।
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पुरस्कार विजेताओं का योगदान क्या है?
इन्होंने स्थानीय लोगों को ‘गार्डियन’ बनाकर विलुप्तप्राय जीवों के आवासों को पुनर्जीवित किया और उनकी आबादी में भारी वृद्धि दर्ज की।
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भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण है?
इससे भारत के जमीनी पर्यावरण मॉडलों को वैश्विक पहचान मिली है और वन्यजीव संरक्षण में महिला वैज्ञानिकों के नेतृत्व को प्रोत्साहन मिला है।
