भारत के पहले अपतटीय हवाई अड्डे के निर्माण को सैद्धांतिक मंजूरी मिली
संदर्भ:
हाल ही में भारत के पहले अपतटीय हवाई अड्डे (India First Offshore Airport) के निर्माण को महाराष्ट्र सरकार से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।
भारत का पहला अपतटीय हवाई अड्डा: महत्वपूर्ण बिंदु
- परिचय: अपतटीय हवाई अड्डा (Offshore Airport India) मुख्य भूमि से दूर, समुद्र के भीतर कृत्रिम रूप से तैयार की गई जमीन (Reclaimed Land) या तैरते हुए प्लेटफॉर्म पर निर्मित एयरपोर्ट होता है।
- स्थान (Project Location): यह महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा (Greenfield Airport) महाराष्ट्र के पालघर जिले में कोरे बीच (Kore Beach) के पास समुद्र में बनाया जाएगा।
- इसे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के तीसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में अरब सागर में विकसित किया जाएगा।
- मुख्य उद्देश्य (Objective): इसका लक्ष्य मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हवाई यातायात के भारी दबाव को कम करना और विमानन विकास (Aviation Development) को गति देना है।
- निर्माणकर्ता (Developer Agency): महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MADC) इस पूरी समुद्री विमानन परियोजना की देखरेख और कार्यान्वयन का कार्य कर रही है।
- अनुमानित लागत (Project Cost): इस विशाल तटीय बुनियादी ढांचे (Coastal Infrastructure) के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग ₹45,000 करोड़ तय की गई है।
- डिजाइन: इस हवाई अड्डे का डिजाइन और इंजीनियरिंग मॉडल जापान के ‘कंसाई’ तथा हांगकांग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
- यात्री क्षमता (Passenger Capacity): तकनीकी विशिष्टताओं के अनुसार, यह आधुनिक हवाई अड्डा सालाना लगभग 9 करोड़ (90 मिलियन) यात्रियों को संभालने की वैश्विक क्षमता से लैस होगा।
- लॉजिस्टिक्स एकीकरण (Logistics Integration): यह हवाई अड्डा पास ही में विकसित हो रहे विशाल वधावन बंदरगाह (Vadhavan Port) के साथ मिलकर एक प्रमुख वैश्विक कार्गो हब बनेगा।
- मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी (Multimodal Connectivity): इस परियोजना को उत्तान-विरार सी लिंक (Sea Link) के 4.75 किमी विस्तार, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशन और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ा जाएगा।
- निर्माण समयसीमा (Project Timeline): नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) के दिशानिर्देशों के तहत इसका निर्माण कार्य वर्ष 2026 में शुरू होकर 2030 के शुरुआती दशक तक चालू होने की उम्मीद है।
परियोजना का आर्थिक एवं रणनीतिक महत्व:
- भूमि संकट का स्थायी समाधान: मुंबई जैसे अत्यधिक घनी आबादी वाले तटीय महानगर में बड़े पैमाने पर हवाई अड्डा निर्माण (Airport Construction) के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की जटिल समस्या को इस समुद्र-आधारित मॉडल से पूरी तरह हल किया जा सकेगा।
- वैश्विक व्यापार और एयर कार्गो को बढ़ावा: आगामी वधावन गहरे पानी के बंदरगाह के नजदीक होने के कारण, यह हवाई अड्डा भारत के पश्चिमी तट पर रसद, शिपिंग और माल ढुलाई व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई गति प्रदान करेगा।
- लाखों नए रोजगार के अवसरों का सृजन: बुनियादी ढांचा विकास (Infrastructure Development) के इस महा-प्रोजेक्ट से पूरे पालघर और वसई-विरार क्षेत्र में रियल एस्टेट, परिवहन, आतिथ्य (Hospitality) और विमानन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
- ध्वनि प्रदूषण में भारी कमी: पारंपरिक भू-आधारित हवाई अड्डों की तुलना में समुद्र के बीच स्थित होने के कारण नागरिक आवासीय क्षेत्रों में उड़ानों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण का स्तर न के बराबर होगा।
FAQs:
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भारत का पहला अपतटीय हवाई अड्डा क्या है?
यह समुद्र के भीतर कृत्रिम द्वीप (Reclaimed Island) पर बनने वाला देश का पहला आधुनिक हवाई अड्डा है जो मुख्य भूमि का उपयोग नहीं करेगा।
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इसे कहाँ बनाया जाएगा?
इस ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे (Greenfield Airport) का निर्माण महाराष्ट्र के पालघर जिले में कोरे बीच के पास अरब सागर में किया जाना प्रस्तावित है।
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इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी क्यों मिली?
मुंबई के मौजूदा हवाई अड्डों पर यातायात भीड़ (Congestion) कम करने और वधावन बंदरगाह के आर्थिक गलियारे को जोड़ने के लिए इसे मंजूरी मिली है।
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अपतटीय हवाई अड्डे की क्या विशेषताएं होंगी?
यह 90 मिलियन यात्री क्षमता, शून्य भूमि उपयोग, सी-लिंक कनेक्टिविटी और जापानी तकनीकी डिजाइन से लैस एक इंजीनियरिंग चमत्कार होगा।
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इस परियोजना से क्या लाभ होंगे?
इससे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) का आर्थिक परिदृश्य बदलेगा, व्यापार बढ़ेगा, ध्वनि प्रदूषण घटेगा और लाखों रोजगार उत्पन्न होंगे।
