Toda Shawl: जानिए क्या खासियत हैं इसकी, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स असेंबली के स्पीकर को किया भेंट
संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2026 में अपनी सेशेल्स यात्रा के दौरान वहाँ की नेशनल असेंबली के स्पीकर, अज़ारेल अर्नेस्टा को टोडा शॉल (Toda Shawl) उपहार स्वरूप भेंट की।
टोडा शॉल और इसकी विशेषताएं:
- बुनकर: यह शॉल तमिलनाडु के नीलगिरी पहाड़ियों (Nilgiri Hills) में निवास करने वाले चरवाहे समुदाय, टोडा जनजाति [Toda Tribe] की महिलाओं द्वारा पूरी तरह हाथ से तैयार की जाती है।
- अनूठी तकनीक: इस पर की जाने वाली विशेष हाथ की कढ़ाई को स्थानीय भाषा में ‘पुखूर’ (Pukhoor) कहा जाता है, जिसका अर्थ ‘फूल’ होता है।
- टोडा कढ़ाई [Toda Embroidery] की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दोनों तरफ से समान रूप से दिखाई देती है। इसमें धागों की गांठें या उलझाव पीछे की तरफ नहीं दिखता, जिससे इसे दोनों तरफ से ओढ़ा जा सकता है।
- विशिष्ट रंग: इस कलाकृति में सफेद या ऑफ-व्हाइट सूती कपड़े (Unbleached Cotton) के बैकग्राउंड पर केवल लाल और काले रंग के ऊनी धागों से ज्यामितीय पैटर्न (Geometric Patterns) बनाए जाते हैं।
- डिजाइन और ज्यामितीय: कढ़ाई के रूपांकन किसी छपाई या खाके को देखकर नहीं, बल्कि कपड़े के धागों (Warp and Weft) की गिनती करके पूरी तरह याददाश्त के आधार पर बुने जाते हैं। इसके बारीक पैटर्न देखने में बिल्कुल बुनाई (Weaving) जैसे लगते हैं।
- प्रकृति और संस्कृति: शॉल पर बने डिजाइन नीलगिरी के पर्यावरण, वहां के पहाड़ों, स्थानीय वनस्पतियों, जीवों और विशेष रूप से पवित्र भैंसों (Sacred Buffaloes) की सींगों से प्रेरित होते हैं, जो टोडा संस्कृति का मुख्य आधार हैं।
- परंपरागत महत्व: इस शॉल को स्थानीय रूप से ‘पूतकुली’ (Poothkuli) कहा जाता है।
- इसे टोडा समुदाय के पुरुष और महिला दोनों ही त्योहारों, सांस्कृतिक उत्सवों और अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक अवसरों पर अत्यंत गर्व के साथ ओढ़ते हैं।
- भौगोलिक संकेतक सम्मान (GI Tagged Handicrafts): भारत सरकार ने इस अद्वितीय स्वदेशी शिल्प को संरक्षण प्रदान करने के लिए वर्ष 2013 में ‘टोडा एम्ब्रॉयडरी’ (Toda Embroidery) के नाम से भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया था। यह तमिलनाडु हस्तशिल्प [Tamil Nadu Handicrafts] का एक अनमोल हिस्सा है।
टोडा जनजाति के बारे मे:
- परिचय: टोडा जनजाति (Toda Tribe) भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित नीलगिरी पहाड़ियों के ऊंचे पठारों पर निवास करने वाला एक अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट स्वदेशी चरवाहा समुदाय है।
- भारत सरकार द्वारा इन्हें विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- यह जनजाति मुख्य रूप से तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के त्रि-जंक्शन पर स्थित नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व (Nilgiri Biosphere Reserve) के एकांत हिस्सों में रहती है।
- पारंपरिक निवास (Munds): इनके पारंपरिक गांवों को ‘मंद’ (Mund) कहा जाता है। इनके घर आधे बेलनाकार (Arched/Barrel-shaped) आकार के होते हैं, जो बांस, बेंत और स्थानीय घास से बने होते हैं। घरों के छोटे प्रवेश द्वार इन्हें जंगली जानवरों और ठंड से बचाते हैं।
- जीवनयापन: टोडा समाज पूरी तरह से पवित्र भैंसों (Sacred Buffaloes) के पालन-पोषण पर आधारित है।
- उनकी डेयरी (Dairy) को वे अपना मंदिर मानते हैं, जहां केवल विशेष रूप से नियुक्त पुजारी (Holy Dairy-men) ही प्रवेश कर सकते हैं।
- पारंपरिक रूप से यह समुदाय पूरी तरह शाकाहारी है। इनका मुख्य भोजन दूध, मक्खन, छाछ और अनाज (जैसे रागी और चावल) से बना होता है।
- प्रथाएं: टोडा समाज में भूतकाल में ‘भ्रातृ बहुपति विवाह’ (Fraternal Polyandry) की प्रथा प्रचलित थी, जहां एक महिला के कई भाई पति हो सकते थे, हालांकि अब यह प्रथा लगभग समाप्त हो चुकी है।
- इनमें ‘पुव पट्ट पोदम’ (Bow and Arrow Ceremony) नामक एक विशेष उत्सव होता है, जिसके द्वारा बच्चे के सामाजिक पिता का निर्धारण किया जाता है।
- वर्तमान चुनौतियाँ: आधुनिक विस्थापन, नीलगिरी के जंगलों का व्यावसायीकरण (चाय और यूकेलिप्टस के बागान), और सीमित संसाधन के कारण इनकी आबादी बेहद सीमित (लगभग 1,500 से 2,000 के बीच) रह गई है।
FAQs:
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टोडा शॉल क्या है?
यह तमिलनाडु की टोडा जनजाति द्वारा लाल-काले धागों से बारीक हाथ की कढ़ाई द्वारा बनाया जाने वाला पारंपरिक शॉल है।
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टोडा शॉल की खासियत क्या है?
इसकी कढ़ाई कपड़े के धागों को गिनकर की जाती है, और यह शॉल दोनों तरफ (Reversible) से समान रूप से उपयोग योग्य होती है।
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टोडा जनजाति कहाँ रहती है
टोडा जनजाति भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित नीलगिरी की पहाड़ियों (Nilgiri Hills) के ऊंचे पठारों पर निवास करती है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने टोडा शॉल किसे भेंट किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जून 2026 की यात्रा के दौरान इसे सेशेल्स नेशनल असेंबली के स्पीकर अज़ारेल अर्नेस्टा को भेंट किया।
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क्या टोडा शॉल को GI टैग मिला है
हाँ, भारत सरकार द्वारा इस विशिष्ट जनजातीय हस्तशिल्प को मार्च 2013 में भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया गया था।
