India Semiconductor Mission 2.0 के लिए ₹1.25 लाख करोड़ के बजट प्रस्ताव को मंजूरी
संदर्भ:
हाल ही में वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (EFC) ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) के लिए ₹1.25 लाख करोड़ के बजट प्रस्ताव के साथ मंजूरी दी है, जिसे अब अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा गया है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 क्या हैं?
- परिचय: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) एक केंद्रीय नियामक कार्यक्रम है, जो वित्तीय सहायता (Fiscal Support) प्रदान कर भारत में चिप निर्माण, डिजाइन और कच्चे माल का आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए लाया गया है।
- संबद्ध मंत्रालय (Ministry Involved): यह मिशन केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology – MeitY) के प्रशासनिक नियंत्रण में नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
- बजट और वित्तीय सहायता (Budget Outlay): इसके लिए ₹1.25 लाख करोड़ ($13.21 बिलियन) का बजटीय आवंटन किया गया है।
- इस योजना के तहत पात्र सिलिकॉन फैब्स, कंपाउंड सेमीकंडक्टर सुविधाओं और पैकेजिंग इकाइयों को 50% तक की वित्तीय सहायता (Fiscal Support) दी जाएगी।
- समय सीमा और विजन (Timeline): इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश की 70-75% घरेलू चिप आवश्यकताओं को स्थानीय स्तर पर पूरा करना और वर्ष 2035 तक भारत को दुनिया के शीर्ष सेमीकंडक्टर देशों में शामिल करना है।
- सहयोग और साझेदार (Partnerships): इसमें वैश्विक दिग्गज जैसे टाटा (Tata), माइक्रोन (Micron), फॉक्सकॉन (Foxconn) और सीजी पावर (CG Power) जैसी बड़ी कंपनियां निवेश पाइपलाइन के माध्यम से विनिर्माण बुनियादी ढांचा तैयार कर रही हैं।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की प्रमुख विशेषताएं:
- अपस्ट्रीम पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान (Focus on Upstream Ecosystem): यह केवल चिप असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप निर्माण में उपयोग होने वाले उपकरणों (Semiconductor Equipment), विशेष रसायनों, गैसों और कच्चे माल के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाता है।
- पूर्ण-स्टैक भारतीय आईपी विकास (Full-Stack Indian IP Development): इसके तहत उन स्वदेशी कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा रहा है जो भारत में अपनी बौद्धिक संपदा (Intellectual Property – IP) अधिकारों को सुरक्षित और विकसित करती हैं।
- उन्नत नोड विनिर्माण (Advanced Node Manufacturing): मिशन का मुख्य ध्यान भविष्य की तकनीकों के लिए आवश्यक 3-नैनोमीटर और 2-नैनोमीटर जैसे उन्नत नैनोमीटर चिप डिजाइन और विनिर्माण रोडमैप को विकसित करना है।
- प्रतिभा पाइपलाइन का विकास (Talent Pipeline Development): इसके तहत ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ (Chips to Startup – C2S) कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 397 विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सॉफ्टवेयर टूल्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि भारत को लाखों कुशल इंजीनियर मिल सकें।
महत्व:
- तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty): भारत वर्तमान में अपनी जरूरत के माइक्रोप्रोसेसरों का लगभग 20% उपभोग करता है, जो आयात किए जाते हैं। ISM 2.0 और स्वदेशी DIR-V कार्यक्रम (जैसे ध्रुव64, शक्ति चिप्स) भारत की विदेशी निर्भरता को समाप्त कर डिजिटल संप्रभुता प्रदान करेंगे।
- राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा (National Security): आधुनिक रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों, अंतरिक्ष उपग्रहों और दूरसंचार नेटवर्क (5G/6G) के लिए चिप्स सबसे संवेदनशील घटक हैं। घरेलू विनिर्माण से जासूसी या आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने का खतरा टल जाएगा।
- आर्थिक स्थिरता और रोजगार (Economic Resilience & Jobs): भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2035 तक $300 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इस ₹1.25 लाख करोड़ के निवेश से हाई-टेक विनिर्माण क्षेत्र में हजारों उच्च-गुणवत्ता वाले रोजगार पैदा होंगे।
- मेक इन इंडिया का विस्तार (Make in India – Make for the World): ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल फोन और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को स्थानीय स्तर पर तैयार चिप्स मिलने से भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का एक प्रमुख निर्यात हब बन जाएगा।
- भू-राजनीतिक संतुलन (Geopolitical Balance): वैश्विक स्तर पर चिप तकनीक कुछ देशों (ताइवान, चीन, अमेरिका) में केंद्रित है। भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होने से भारत ‘इंडो-पैसिफिक क्षेत्र’ में एक विश्वसनीय और मजबूत आर्थिक भागीदार के रूप में उभरेगा।
FAQs:
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इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 क्या है?
यह भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देश में चिप निर्माण, डिजाइन और कच्चे माल का एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
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मिशन 2.0 के लिए ₹1.25 लाख करोड़ का बजट क्यों मंजूर किया गया?
भारत को चिप निर्माण में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने, उन्नत नोड्स (3nm) विकसित करने और वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए बजट बढ़ाया गया है।
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भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण क्यों महत्वपूर्ण है?
विदेशी निर्भरता को कम करने, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और रक्षा एवं दूरसंचार प्रणालियों को सुरक्षित रखने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है।
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India Semiconductor Mission 2.0 से क्या लाभ होंगे?
इससे घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत होगी, सप्लाई चेन की अनिश्चितताएं दूर होंगी और लाखों युवाओं को उच्च-तकनीकी रोजगार मिलेंगे।
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इस मिशन का लाभ किन कंपनियों और उद्योगों को मिलेगा?
इसका लाभ ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), मोबाइल, स्मार्टफोन, रक्षा उपकरण, और चिप असेंबल करने वाली कंपनियों को सीधे तौर पर मिलेगा।
