हवेली संगीत को मिला उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार
संदर्भ:
हाल ही में संगीत नाटक अकादमी द्वारा घोषित ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार 2025’ के लिए अहमदाबाद के हवेली संगीत (Haveli Sangeet) विद्वान आचार्य श्री रणछोड़लालजी गोस्वामी का चयन किया गया है, जिन्होंने इस प्राचीन भक्ति परंपरा को एक नया राष्ट्रीय गौरव प्रदान किया है।
हवेली संगीत के बारे मे:
- ऐतिहासिक उद्भव (Historical Origin): हवेली संगीत भारत की एक अत्यंत प्राचीन पारंपरिक संगीत (Traditional Music) और भक्तिमय शैली है। इसका उदय 16वीं शताब्दी में मध्यकाल के दौरान हुआ था।
- पुष्टिमार्ग संप्रदाय से जुड़ाव (Pushtimarg Sect Link): यह गायन शैली वैष्णव संप्रदाय के महान संत वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित पुष्टिमार्ग मत से गहराई से जुड़ी हुई है। इसमें ईश्वर को ‘पुष्टि’ (कृपा) के रूप में पूजा जाता है।
- हवेली परंपरा का नामकरण (Haveli Tradition): मुगल काल में जब हिंदू मंदिरों को नष्ट किया जा रहा था, तब कृष्ण भक्तों ने अपने विग्रहों को बड़े घरों या ‘हवेलियों’ में सुरक्षित रखा। इन परिसरों के भीतर गाए जाने वाले संगीत को ‘हवेली परंपरा’ (Haveli Tradition) कहा गया।
- अष्टछाप कवियों का योगदान: इस संगीत शैली की आत्मा महाप्रभु वल्लभाचार्य और उनके पुत्र विट्ठलनाथ जी द्वारा स्थापित ‘अष्टछाप’ के आठ भक्त कवियों (जैसे सूरदास, कुंभनदास, परमानंददास) के पदों में बसती है।
- शास्त्रीय गायन शैली (Classical Singing): प्राविधिक रूप से यह विशुद्ध शास्त्रीय गायन (Classical Singing) का हिस्सा है। इस शैली में ध्रुपद, धमार और प्रबन्ध जैसी प्राचीन भारतीय शास्त्रीय राग-शैलियों का उत्कृष्ट प्रयोग मिलता है।
- अष्टयाम सेवा प्रणाली: हवेली संगीत का प्रदर्शन चौबीस घंटों में भगवान श्री कृष्ण की दैनिक दिनचर्या पर आधारित ‘अष्टयाम सेवा’ (मंगला, श्रृंगार, ग्वाल, राजभोग, उत्थापन, भोग, संध्या आरती और शयन) के अनुसार निर्धारित रागों में होता है।
- ऋतु-आधारित गायन: यह विरासत संगीत (Heritage Music) ऋतुओं के अनुकूल रागों में विभाजित है, जैसे वर्षा ऋतु में मल्हार और वसंत में राग बसंत या बहार का प्रयोग होता है।
- सांस्कृतिक भूगोल: इस कला का मुख्य केंद्र वर्तमान में गुजरात, राजस्थान, ब्रज क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) तथा मध्य प्रदेश के पुष्टिमार्गीय मंदिरों तक सीमित है।
- वाद्य यंत्रों की विशिष्टता: इसमें गायन के साथ केवल सात्विक और पारंपरिक भारतीय संगीत (Indian Music) वाद्यों जैसे पखावज, झांझ, मंजीरा और तानपुरा का ही प्रयोग होता है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के बारे मे:
- पुरस्कार की स्थापना: ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार’ (Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar) की शुरुआत वर्ष 2006 में की गई थी।
- प्रदाता संस्था: यह सम्मान भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी, जिसे संगीत नाटक अकादमी (Sangeet Natak Akademi) कहा जाता है, द्वारा प्रदान किया जाता है।
- नामकरण का आधार: इस राष्ट्रीय पुरस्कार का नाम भारत के महानतम शहनाई वादक और सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की स्मृति में रखा गया है।
- मुख्य उद्देश्य: इसका उद्देश्य अपने शुरुआती करियर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले देश के प्रतिभावान युवा कलाकारों की पहचान करना और उन्हें राष्ट्रीय मंच पर प्रोत्साहित करना है।
- आयु सीमा की पात्रता: यह पुरस्कार केवल उन उदीयमान कलाकारों को दिया जाता है जिनकी आयु नामांकन के वर्ष की 1 अप्रैल तक 40 वर्ष से कम हो।
- पांच मुख्य क्षेत्र: यह सम्मान पांच प्रमुख विधाओं (संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक/आदिवासी कला/कठपुतली और प्रदर्शन कला में छात्रवृत्ति) के लिए दिया जाता है।
- पुरस्कार की संख्या: सामान्य नियमानुसार एक वर्ष में अधिकतम 33 युवा कलाकारों को ही इस पुरस्कार के लिए चुना जा सकता है।
- पुरस्कार के घटक: विजेताओं को सम्मान स्वरूप ₹25,000 की नकद राशि, एक ताम्रपत्र (प्रशस्ति पट्टिका) और एक अंगवस्त्रम भेंट किया जाता है।
- वर्ष 2024-25 के पुरस्कारों के संचयी बैकलॉग को पूरा करने के लिए हाल ही में संयुक्त रूप से 106 कलाकारों की सूची घोषित की गई है।
- यह अकादमी के मुख्य पुरस्कारों (जिसमें ₹1 लाख मिलते हैं) की तुलना में विशेष रूप से युवाओं की शुरुआती कला यात्रा को संबल देने के लिए अभिकल्पित है।
- अमूर्त विरासत का संरक्षण: यह पुरस्कार भारत की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (Intangible Cultural Heritage) को सहेजने और भावी पीढ़ियों तक हस्तांतरित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
FAQs:
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हवेली संगीत क्या है?
यह पुष्टिमार्ग संप्रदाय से जुड़ी भगवान श्री कृष्ण की आराधना के लिए गाई जाने वाली एक प्राचीन वैष्णव मंदिर-संगीत शैली है।
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार क्या है?
यह प्रदर्शन कलाओं में उत्कृष्ट प्रतिभा दिखाने वाले युवा भारतीय कलाकारों को दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है।
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यह पुरस्कार किसे दिया जाता है?
यह पुरस्कार भारत में संगीत, नृत्य, रंगमंच और लोक कला क्षेत्र के 40 वर्ष से कम आयु के असाधारण कलाकारों को मिलता है।
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हवेली संगीत की विशेषताएं क्या हैं?
इसमें अष्टछाप कवियों के पदों का ध्रुपद-धमार शैलियों में, दिन के आठ पहरों (अष्टयाम) के अनुसार गायन किया जाता है।
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यह पुरस्कार कौन प्रदान करता है?
यह राष्ट्रीय पुरस्कार भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रदान किया जाता है।
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हवेली संगीत का इतिहास क्या है?
इसका इतिहास 16वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन और महाप्रभु वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित पुष्टिमार्गीय मंदिर परंपरा से आरंभ होता है।
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भारतीय शास्त्रीय संगीत में इसका क्या महत्व है?
यह ध्रुपद जैसी प्राचीन गायन विधाओं और मध्यकालीन भक्ति साहित्य को अपने मूल स्वरूप में जीवित रखने वाली मुख्य कड़ी है।
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पुरस्कार प्राप्त करने के लिए पात्रता क्या है?
कलाकार भारतीय नागरिक होना चाहिए और नामांकन वाले वर्ष की पहली अप्रैल को उसकी आयु 40 वर्ष से कम होनी चाहिए।
