PM-SETU योजना विस्तार
संदर्भ:
हाल ही में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की राष्ट्रीय संचालन समिति की बैठक में ‘PM-SETU योजना’ के पायलट चरण की सफलता के बाद इसके राष्ट्रव्यापी विस्तार को मंजूरी दी गई है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा इसके तहत देश भर के 200 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) समूहों (Clusters) का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिसके लिए ₹1,237.58 करोड़ के रणनीतिक निवेश प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई।
PM-SETU योजना के बारे में:
- परिचय: PM-SETU का पूर्ण रूप ‘प्रधान मंत्री स्किलिंग एंड एंप्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs’ (Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) है।
- यह भारत की व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण संरचना को पुनर्जीवित करने के लिए तैयार की गई एक व्यापक जन कल्याणकारी सरकारी योजना (Government Scheme) है।
- यह योजना पारंपरिक सरकार-संचालित प्रशिक्षण मॉडल से हटकर पूरी तरह उद्योग-नेतृत्व वाले कौशल विकास (Industry-led Skilling) पर केंद्रित है।
- इसके माध्यम से निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के केंद्र में लाया गया है।
- बजट: वर्ष 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹60,000 करोड़ के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ इस योजना को 5 वर्षों के लिए स्वीकृति दी गई थी।
- फंडिंग पैटर्न: इस महत्वाकांक्षी योजना का वित्तीय ढांचा बेहद अनूठा है, जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी ₹30,000 करोड़ (50%), संबंधित राज्य सरकारों का योगदान ₹20,000 करोड़ (33.3%) और निजी उद्योगों की हिस्सेदारी ₹10,000 करोड़ (16.7%) निर्धारित है।
- विस्तार की आवश्यकता: पायलट चरण (जैसे महाराष्ट्र और बिहार के चुनिंदा जिलों) में प्राप्त सकारात्मक परिणामों के बाद, देशव्यापी जन कल्याण (Public Welfare) और समावेशी विकास (Inclusive Development) सुनिश्चित करने के लिए इसके पूर्णकालिक राष्ट्रव्यापी विस्तार (PM SETU Expansion) को स्वीकृति दी गई है।
- उद्देश्य: भारतीय कार्यबल को केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कौशल मानकों (Global Skill Standards) के अनुरूप तैयार करना।
- देश के 1,000 से अधिक सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को अत्याधुनिक सुविधाओं, स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक प्रयोगशालाओं से लैस करना।
- उद्योगों की प्रत्यक्ष भागीदारी के माध्यम से मांग और आपूर्ति के बीच के ‘कौशल अंतर’ (Skill Gap) को समाप्त कर युवाओं की तत्काल रोजगार क्षमता बढ़ाना।
प्रमुख स्तंभ:
- हब-एंड-स्पोक मॉडल (Hub-and-Spoke Model): योजना के तहत अपग्रेडेशन के लिए हब-एंड-स्पोक प्रणाली को अपनाया गया है।
- इसके अंतर्गत कुल 200 प्रमुख ITI संस्थानों को ‘हब’ (Hub) के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रत्येक हब अपने पास के 4 ‘स्पोक’ (Spoke) ITI संस्थानों (कुल 800 संस्थान) को तकनीकी मार्गदर्शन, आधुनिक उपकरण और डिजिटल शिक्षण संसाधन साझा कर सहायता प्रदान करेगा।
- विशेष प्रयोजन वाहन शासन (SPV Governance): संस्थानों के प्रबंधन को पूरी तरह व्यावसायिक बनाने के लिए प्रत्येक उन्नत ITI में एक ‘विशेष प्रयोजन वाहन’ (SPV) का गठन किया जा रहा है।
- इसमें निजी उद्योग भागीदार की 51% और सरकार की 49% हिस्सेदारी होगी, जिससे पाठ्यक्रम और प्लेसमेंट का निर्णय पूरी तरह उद्योग की जरूरतों के आधार पर होगा।
- वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence): इस योजना के तहत देश के 5 राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTIs)—भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना—को सुदृढ़ कर उन्हें ‘वैश्विक उत्कृष्टता केंद्रों’ में बदला जा रहा है, ताकि वहां उन्नत अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण दिया जा सके।
- एंकर उद्योग भागीदार (Anchor Industry Partners): ₹1,237.58 करोड़ के रणनीतिक निवेश के तहत देश की दिग्गज कॉर्पोरेट कंपनियों को एंकर उद्योग भागीदार के रूप में जोड़ा गया है:
- ओडिशा: जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड (Jindal Naveen Avasar Limited) द्वारा ₹240.21 करोड़ के निवेश से बारबिल ITI क्लस्टर का आधुनिकीकरण होगा।
- गुजरात: आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (ArcelorMittal Nippon Steel India) द्वारा ₹240.18 करोड़ के निवेश से सूरत ITI क्लस्टर को विश्वस्तरीय बनाया जाएगा।
- तेलंगाना: अपोलो मेड-स्किल्स लिमिटेड (Apollo MedSkills) तथा न्यूलैंड फाउंडेशन जैसी संस्थाओं द्वारा तीन बड़े क्लस्टरों में करोड़ों का निवेश किया जा रहा है।
महत्व:
- भारत वर्तमान में ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ (Demographic Dividend) के स्वर्णिम काल से गुजर रहा है। यदि हमारी युवा आबादी को सही समय पर सही कौशल नहीं मिला, तो यह लाभांश एक ‘जनसांख्यिकीय आपदा’ में बदल सकता है।
- यह अभिनव सरकारी पहल (Government Initiative) मेक इन इंडिया (Make in India) और प्रधानमंत्री की दूरदर्शी ‘विकसित भारत 2047’ संकल्पना को साकार करने के लिए कुशल कार्यबल की रीढ़ बनाने में सक्षम है।
FAQs:
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PM-SETU योजना क्या है?
यह ₹60,000 करोड़ की लागत वाली एक राष्ट्रीय योजना है, जो सरकारी आईटीआई (ITIs) को आधुनिक और उद्योग-नेतृत्व वाला बनाकर युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करती है.
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PM-SETU योजना का विस्तार क्यों किया गया?
पायलट चरण की सफलता के बाद देश के सभी 200 चिन्हित आईटीआई क्लस्टरों में इसका व्यापक राष्ट्रव्यापी लाभ पहुंचाने के लिए इसका विस्तार किया गया.
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इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य देश के व्यावसायिक प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक मशीनों, नए पाठ्यक्रमों और उद्योगों के सीधे समन्वय से अपग्रेड करना है.
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योजना से किन लोगों को लाभ मिलेगा?
देश भर के लाखों युवाओं, आईटीआई छात्रों, व्यावसायिक प्रशिक्षुओं और उन्नत उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार कुशल मानव संसाधन के रूप में लाभ मिलेगा.
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PM-SETU योजना के लिए पात्रता क्या है?
इसके तहत सरकारी आईटीआई में नामांकित छात्र तथा विभिन्न कौशल उन्नयन पाठ्यक्रमों (जैसे एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, मोबिलिटी) में प्रवेश लेने वाले युवा पात्र हैं.
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योजना का संचालन कौन करेगा?
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) और राज्यों में मुख्य सचिवों की अध्यक्षता वाली राज्य संचालन समितियां इसका संचालन करती हैं.
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आवेदन कैसे किया जा सकता है?
इच्छुक छात्र इस योजना के तहत अपग्रेड किए गए नजदीकी आईटीआई (हब या स्पोक) संस्थानों में जाकर सीधे संबंधित नए युग के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं.
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योजना के तहत कौन-कौन से लाभ मिलेंगे?
छात्रों को स्मार्ट क्लासरूम, वैश्विक स्तर की प्रयोगशालाएं, उद्योगों के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण, 31 नए जमाने के आधुनिक कोर्स और सीधे उद्योगों में प्लेसमेंट का अवसर मिलेगा.
