₹31,000 करोड़ की लागत से भारत-म्यांमार बॉर्डर बाड़बंदी
संदर्भ:
Ministry of Home Affairs (केंद्रीय गृह मंत्रालय) ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ करने हेतु ₹31,000 करोड़ की अनुमानित लागत से भारत-म्यांमार सीमा पर 1,610 किलोमीटर लंबी बाड़बंदी (Fencing) करने की व्यापक परियोजना को गति दे दी है।
भारत-म्यांमार सीमा:
- सीमा लंबाई: भारत और म्यांमार के बीच कुल 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती हैं।
- यह उत्तर में चीन के साथ त्रिबिंदु से शुरू होकर दक्षिण में बांग्लादेश तक जाती है।
- यह सीमा भारत के चार उत्तर-पूर्वी राज्यों से होकर गुजरती है: अरुणाचल प्रदेश: 520 किलोमीटर, मिजोरम: 510 किलोमीटर, मणिपुर: 398 किलोमीटर और नागालैंड: 215 किलोमीटर।
- मुक्त आवागमन व्यवस्था (FMR): सीमावर्ती क्षेत्रों के गहरे जातीय और सांस्कृतिक संबंधों के कारण, यहाँ एक अनूठी व्यवस्था है जिसके तहत बिना वीजा के 10 किलोमीटर तक आने-जाने की अनुमति है।
- बाड़बंदी: स्वीकृत ₹31,000 करोड़ में से लगभग ₹20,264 करोड़ बाड़बंदी और गश्ती ट्रैक (Patrol Track) के निर्माण पर खर्च होंगे। जबकि ₹10,767 करोड़ की लागत से 64 सीमा सड़कें बनाई जा रही हैं, जो असम राइफल्स (Assam Rifles) के अग्रिम चौकियों (Company Operating Bases) को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।
- कार्यान्वयन एजेंसी और समयसीमा: इस दुर्गम हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण की जिम्मेदारी सीमा सड़क संगठन (BRO) और अन्य केंद्रीय कार्य एजेंसियों को सौंपी गई है। इस पूरी परियोजना को 10 वर्षों (2035-36 तक) की अवधि में चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य है।
बाड़बंदी के प्रमुख कारण:
- अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय असंतुलन: म्यांमार में तख्तापलट और सैन्य शासन (Junta) के बाद शुरू हुए गृहयुद्ध के कारण बड़ी संख्या में चिन और अन्य शरणार्थियों ने सीमा पार कर भारत (विशेषकर मिजोरम और मणिपुर) में प्रवेश किया है।
- इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तन (Abnormal Demographic Shift) देखा गया है, जो आंतरिक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती है।
- उग्रवाद और प्रॉक्सी वॉर पर नियंत्रण: उत्तर-पूर्व के कई प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन (जैसे NSCN-K, ULFA-I, और मैतेई विद्रोही समूह) भारत में हिंसक गतिविधियों को अंजाम देकर म्यांमार के घने जंगलों में बने अपने सुरक्षित ठिकानों (Safe Havens) में शरण ले लेते थे।
- खुली सीमा का दुरुपयोग कर वे आसानी से आते-जाते थे, जिसे यह बाड़ पूरी तरह रोकेगी।
- ‘गोल्डन ट्राइएंगल’ और नार्को-आतंकवाद: यह सीमा म्यांमार, लाओस और थाईलैंड के अफीम उत्पादक क्षेत्र—‘गोल्डन ट्राइएंगल’ (Golden Triangle) के मुहाने पर स्थित है।
- खुली सीमा के कारण सिंथेटिक ड्रग्स, याबा टैबलेट, हेरोइन और अवैध हथियारों की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही थी, जिससे पूर्वोत्तर के युवाओं में कट्टरपंथ और नार्को-टेररिज्म का खतरा बढ़ रहा था।
- हाइब्रिड सर्विलांस और आधुनिक तकनीक: इस परियोजना के तहत साधारण कटीले तारों के बजाय “एंटी-कट, एंटी-क्लाइंड” (Anti-cut, Anti-climb) बाड़ लगाई जा रही है।
- इसके साथ ही हाइब्रिड सर्विलांस सिस्टम (HSS) का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें थर्मल इमेजर, इंफ्रारेड सेंसर और रडार तकनीक से युक्त ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ शामिल हैं।
चुनौतियाँ:
इस राष्ट्रीय सुरक्षा पहल का एक दूसरा पहलू स्थानीय जनजातीय समाज पर इसका प्रभाव है। ऐतिहासिक रूप से 1826 की यांडाबू की संधि (Treaty of Yandaboo) के तहत अंग्रेजों द्वारा खींची गई सीमा ने एक ही जातीय समूह (जैसे कुकी-चिन-मिजो और नागा) के लोगों को दो देशों में बांट दिया था। सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच गहरे पारिवारिक, सामाजिक और वैवाहिक संबंध हैं।
FAQs:
FAQs:
-
भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी क्यों की जा रही है?
यह अवैध घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों की स्मगलिंग और उग्रवादियों की अनियंत्रित आवाजाही को रोकने के लिए की जा रही है।
-
इस परियोजना का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य ‘प्रॉक्स वॉर’ को रोकना, अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलावों पर अंकुश लगाना और सीमा को पूरी तरह अभेद्य बनाना है।
-
सीमा की कुल लंबाई कितनी है?
भारत और म्यांमार के बीच कुल सीमा 1,643 किलोमीटर लंबी है, जिसमें से 1,610 किमी पर बाड़बंदी हो रही है।
-
किन राज्यों से भारत-म्यांमार सीमा गुजरती है?
यह सीमा चार उत्तर-पूर्वी राज्यों: अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है।
-
क्या इससे मुक्त आवाजाही व्यवस्था (FMR) प्रभावित होगी?
हां, केंद्र सरकार ने Free Movement Regime (FMR) को समाप्त कर दिया है, अब प्रवेश केवल वैध वीजा और दस्तावेजों से होगा।
-
बाड़बंदी से सुरक्षा कैसे मजबूत होगी?
एंटी-कट बाड़ के साथ हाइब्रिड सर्विलांस सिस्टम, थर्मल कैमरे और ड्रोन ट्रैकिंग से Security Forces की गश्त प्रभावी होगी।
-
परियोजना कब तक पूरी होगी?
सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा इस वृहद बुनियादी ढांचा परियोजना को आगामी 10 वर्षों (2035-36 तक) में पूरा किया जाना है।
-
स्थानीय लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
सीमा के दोनों ओर रहने वाले समान जातीय समूहों (कुकी, नागा, मिजो) के पारंपरिक और पारिवारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
