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भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी

भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी

India-Australia Defence Partnership

संदर्भ:

हाल ही में 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने ऐतिहासिक ‘रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणापत्र’ (Joint Declaration on Defence and Security Cooperation) पर हस्ताक्षर किए, जिसने 2009 के पुराने ढांचे को प्रतिस्थापित कर दिया है। 

  • इसके साथ ही, दोनों देशों ने नागरिक परमाणु सहयोग (Civil Nuclear Agreement) के तहत भारत को दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति के प्रशासनिक प्रबंधों को अंतिम रूप दिया। 

भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी:

यह साझेदारी दो प्रमुख हिंद-प्रशांत लोकतांत्रिक देशों के बीच सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने का एक रणनीतिक गठबंधन है। 

  • विकास क्रम: दोनों देशों के संबंध 2009 के ‘सुरक्षा सहयोग घोषणापत्र’ से बढ़कर 2020 में ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership – CSP) में बदले।
  • 2026 का अपग्रेड: मेलबर्न शिखर सम्मेलन (जुलाई 2026) में हस्ताक्षरित नया घोषणापत्र दोनों देशों के बीच सैन्य जुड़ाव, खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा औद्योगिक सहयोग को नए और अत्यधिक उन्नत स्तर पर ले जाता है।
  • संस्थागत तंत्र: वर्तमान में दोनों देशों के बीच 2+2 विदेश और रक्षा मंत्री स्तरीय कूटनीति, वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन और नियमित सैन्य स्टाफ वार्ताएं संचालित होती हैं। 
  • लॉजिस्टिक्स सुगमता: 2020 का परस्परिक रसद समर्थन समझौता (MLSA) दोनों देशों को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, ईंधन भरने और मरम्मत सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करता है।

दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?

  • चीन का मुकाबला (Countering China): दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर (IOR) में चीन के बढ़ते आक्रामक सैन्य विस्तारवाद ने दोनों देशों को साझा रणनीतिक चिंताएं प्रदान की हैं। 
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain Resilience): महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों के लिए चीन पर निर्भरता कम करना दोनों देशों की आर्थिक और सैन्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है। 
  • नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था (Rules-based Order): दोनों देश UNCLOS (समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय) के तहत नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का पुरजोर समर्थन करते हैं। 
  • सामरिक संतुलन (Strategic Balancing): भारत पश्चिमी हिंद महासागर और ऑस्ट्रेलिया दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में सुरक्षा प्रदाता की भूमिका निभाते हैं। यह साझेदारी ‘केंद्रीयता’ का नेटवर्क बनाकर भू-राजनीतिक शून्यता को कम करती है।
  • क्षेत्रीय मंचों को मजबूती: यह साझेदारी IORA (हिंद महासागर रिम एसोसिएशन), ASEAN (आसियान) और पैसेफिक आइलैंड्स फोरम (PIF) जैसी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाती है।

किन क्षेत्रों में रक्षा सहयोग बढ़ाया जा रहा है?

  • रक्षा औद्योगिक सहयोग (Defence Industrial Collaboration): दोनों देशों ने रक्षा सामग्री और सेवाओं की आपूर्ति के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दिया है।
    • इसके तहत भारत के “मेक इन इंडिया” और ऑस्ट्रेलिया के “फ्यूचर मेड इन ऑस्ट्रेलिया” कार्यक्रमों के बीच तालमेल बिठाया जा रहा है।
  • भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवाचार गलियारा (Defence Innovation Corridor): दोनों देशों के रक्षा स्टार्टअप्स, एमएसएमई और अनुसंधान संस्थानों को जोड़ने के लिए इसे लॉन्च किया गया है ताकि सैन्य तकनीक का सह-विकास किया जा सके।
  • परमाणु और स्वच्छ ऊर्जा (Nuclear & Clean Energy Security): ऐतिहासिक यूरेनियम डील के सक्रिय होने से भारत को परमाणु बिजलीघरों के लिए विश्वसनीय ईंधन मिलेगा, जो भारत के वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा और 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा। 

संयुक्त सैन्य अभ्यास और इंटरऑपरेबिलिटी:

दोनों सेनाओं के बीच परिचालन समन्वय (Interoperability) बढ़ाने के लिए नियमित और जटिल सैन्य अभ्यास किए जाते हैं: 

अभ्यास का नामसैन्य शाखाप्रकृति एवं महत्व
ऑसइंडेक्स (AUSINDEX)नौसेनाद्विपक्षीय; पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित।
ऑस्ट्राहिन्द (AUSTRAHIND)थल सेनाद्विपक्षीय; अर्ध-शहरी और पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए।
पिच ब्लैक (Pitch Black)वायु सेनाबहुपक्षीय (ऑस्ट्रेलिया द्वारा आयोजित); भारतीय वायु सेना की वैश्विक पहुंच को मजबूत करता है।
मालाबार (Malabar)नौसेनाचतुर्भुज (Quad); भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान के बीच उच्च-स्तरीय जटिल युद्ध अभ्यास।
टैलिसमैन सेबर (Talisman Sabre)संयुक्त सेनाबहुपक्षीय; ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2027 के अभ्यास में भारत की बढ़ी हुई भागीदारी का स्वागत किया है।

QUAD में भारत और ऑस्ट्रेलिया की भूमिका

  • चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quad): भारत और ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान के साथ मिलकर क्वाड के स्तंभ हैं।
  • गैर-सैन्य सुरक्षा ढांचा: क्वाड केवल एक सैन्य समूह नहीं है। भारत और ऑस्ट्रेलिया इसके तहत वैक्सीन कूटनीति, जलवायु कार्रवाई, समुद्री डोमेन जागरूकता (IPMDA) और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
  • सुरक्षा साझेदारी: यह मंच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी भी एकतरफा बल प्रयोग या आर्थिक जबरदस्ती (Economic Coercion) के खिलाफ एक मजबूत निवारक (Deterrent) के रूप में कार्य करता है। 

समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) और डोमेन जागरूकता:

  • मैरीटाइम सिक्योरिटी कोलैबोरेशन रोडमैप: शिखर सम्मेलन 2026 में दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत में सूचना साझाकरण, परिचालन समन्वय और क्षमता निर्माण के लिए इस समर्पित रोडमैप को मंजूरी दी है।
  • कोस्ट गार्ड सहयोग: भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और ऑस्ट्रेलिया के मैरीटाइम बॉर्डर कमांड (MBC) के बीच पहली बार एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो समुद्री कानून प्रवर्तन और अवैध शिकार को रोकने में मदद करेगा।
  • पनडुब्बी खोज और बचाव (Submarine Search & Rescue): दोनों देशों के बीच हुए विशिष्ट समझौते के तहत संकट के समय एक-दूसरे की पनडुब्बियों को तकनीकी सहायता और बचाव राहत दी जा सकती है। 

रक्षा तकनीक और अंतरिक्ष में सहयोग:

  • साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज (PACTS): दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, डिजिटल लचीलापन, क्रिटिकल टेक और सुरक्षित सप्लाई चेन के लिए ‘ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी’ को लागू किया है।
  • त्रिपक्षीय तकनीकी साझेदारी: उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार के लिए ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया-कनाडा’ (ACITI) के बीच एक त्रिपक्षीय तकनीकी सहयोग समझौता भी किया गया है।
  • अंतरिक्ष सहयोग (Gaganyaan Mission): ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर भारत एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित कर रहा है, जो भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को वास्तविक समय (Real-time) डेटा और ट्रैकिंग सहयोग प्रदान करेगा।

FAQs:

  1. भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी क्या है?

    यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, संप्रभुता और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच एक ‘व्यापक रणनीतिक सैन्य और सुरक्षा गठबंधन’ है।

  2. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?

    यह हिंद महासागर में चीन के आक्रामक विस्तारवाद का मुकाबला करने, नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था और सुरक्षित समुद्री व्यापार सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

  3. किन क्षेत्रों में रक्षा सहयोग बढ़ाया जा रहा है?

    रसद समर्थन (MLSA), रक्षा औद्योगिक सहयोग, यूरेनियम आपूर्ति, सैन्य तकनीक के सह-विकास, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष ट्रैकिंग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

  4. क्या दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं?

    हाँ, दोनों सेनाएँ रणनीतिक समन्वय और युद्ध कौशल बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय ‘ऑसइंडेक्स’ (AUSINDEX), ‘ऑस्ट्राहिन्द’ (AUSTRAHIND) और बहुपक्षीय ‘मालाबार’ (Malabar) अभ्यास करती हैं।

  5. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में इस साझेदारी का क्या महत्व है?

    यह साझेदारी क्षेत्र में शक्ति का संतुलन बनाती है और नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित कर किसी एकतरफा प्रभुत्व को रोकती है।

  6. QUAD में भारत और ऑस्ट्रेलिया की क्या भूमिका है?

    दोनों देश क्वाड के प्रमुख स्तंभ हैं, जो समुद्री डोमेन जागरूकता, सुरक्षित तकनीक, जलवायु कार्रवाई और स्वतंत्र हिंद-प्रशांत एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं।

  7. समुद्री सुरक्षा में दोनों देशों का सहयोग कैसे बढ़ रहा है?

    दोनों नौसेनाएँ सूचना साझाकरण, संयुक्त गश्त, पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास और तटरक्षक बलों के बीच सीधे तालमेल के जरिए समुद्री सुरक्षा बढ़ा रही हैं।

  8. रक्षा तकनीक में क्या सहयोग हो रहा है?

    दोनों देश ‘रक्षा नवाचार गलियारे’ के माध्यम से क्रिटिकल टेक, साइबर सुरक्षा, एआई और सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन पर मिलकर काम कर रहे हैं।

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