आस्था वन संरक्षण योजना को मिली मंजूरी
संदर्भ:
हाल ही में केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में देश के पारंपरिक पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ‘आस्था वन संरक्षण योजना’ को मंजूरी दी।
(Aastha Forest Conservation Scheme) आस्था वन संरक्षण योजना के बारे मे:
- परिचय: ‘आस्था वन संरक्षण योजना’ (Aastha Van Sanrakshan Yojana) ऐसे विशिष्ट वन क्षेत्रों या छोटे जंगली हिस्सों के पुनर्स्थापन की एक केंद्रीय पहल है, जिन्हें स्थानीय समुदायों और जनजातियों द्वारा धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के कारण सदियों से अक्षुण्ण रखा गया है।
- इन्हें पारिस्थितिक विज्ञान की भाषा में पवित्र उपवन (Sacred Groves) कहा जाता है।
- उद्देश्य: सदियों पुरानी सामुदायिक संरक्षण पद्धतियों को आधुनिक वैज्ञानिक समर्थन प्रदान करना।
- संकटग्रस्त और दुर्लभ स्थानीय पादप तथा वन्यजीव प्रजातियों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण (Biodiversity Protection) करना।
- वन परिदृश्य बहाली (Landscape Restoration) के माध्यम से मृदा क्षरण को नियंत्रित करना और स्थानीय जलस्रोतों को पुनर्जीवित करना।
- शुरुआत: इस योजना की घोषणा 10 जुलाई 2026 को कोयंबटूर में आयोजित राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण की सातवीं शासी निकाय बैठक में की गई।
- मंत्रालय: यह पहल केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change – MoEFCC) के अंतर्गत कार्य करेगी।
- वित्तीय लागत (Financial Corpus): केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए ₹3,000 करोड़ का प्रारंभिक कोष (Initial Corpus) स्वीकृत किया है।
- समय अवधि (Implementation Period): यह कार्यक्रम पांच वर्षों (वर्ष 2026-27 से 2030-31) की अवधि के लिए लागू किया गया है।
- फंडिंग स्रोत (Funding Source): इसके लिए वित्तीय सहायता शत-प्रतिशत राष्ट्रीय कैम्पा फंड (National CAMPA Fund) से दी जाएगी।
प्रमुख विशेषताएं:
- सर्वोच्च न्यायालय का कानूनी संदर्भ (Legal Context): यह योजना दिसंबर 2024 में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा पवित्र उपवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन में तैयार की गई है।
- सामुदायिक नेतृत्व (Community-Led Model): वनों के प्रबंधन का अधिकार पूरी तरह स्थानीय पंचायतों और जनजातीय समाजों के हाथों में रहेगा।
- तकनीकी निगरानी (Technology-Based Monitoring): वन क्षेत्रों के सीमांकन और संरक्षण की प्रगति की जांच हेतु जीआईएस मैपिंग (GIS Mapping) और उपग्रह इमेजरी का उपयोग किया जाएगा।
- वैज्ञानिक विकास (Scientific Upgradation): स्थानीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाए बिना मिट्टी में नमी के संरक्षण और जल संचयन प्रणालियों का वैज्ञानिक विकास किया जाएगा।
- लक्ष्य: इसके तहत भारत भर के लगभग 15,000 आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘पवित्र उपवनों’ का वैज्ञानिक जीर्णोद्धार किया जाएगा।
महत्व:
- जलवायु लचीलापन (Climate Resilience): ये लघु वन क्षेत्र स्थानीय कार्बन सिंक (Carbon Sinks) के रूप में कार्य करते हैं, जिससे सूक्ष्म जलवायु (Micro-climate) संतुलित रहती है।
- पर्यावरणीय शासन (Environmental Governance): यह योजना भारत के राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम और सतत विकास लक्ष्यों (SDG-15: भूमि पर जीवन) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है।
- पारंपरिक ज्ञान का सम्मान: आधुनिक संरक्षण नीतियों में स्वदेशी ज्ञान (Indigenous Ecological Knowledge) को शामिल करने का यह उत्कृष्ट उदाहरण है।
FAQs:
1. पर्यावरण संरक्षण में आस्था वनों का क्या महत्व है?
ये क्षेत्र जल संचयन, दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण और जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में सहायक हैं।
2. आस्था वन संरक्षण योजना क्या है?
यह देश के 15,000 सांस्कृतिक रूप से संरक्षित पवित्र उपवनों के जीर्णोद्धार की केंद्रीय योजना है।
3. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पारंपरिक वन क्षेत्रों का संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और भूमि क्षरण को रोकना है।
4. यह योजना किस मंत्रालय के तहत शुरू की गई है?
यह केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत संचालित है।
5. योजना की कुल बजटीय लागत कितनी निर्धारित की गई है?
इस पांच वर्षीय राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए कुल ₹3,000 करोड़ का बजट स्वीकृत है।
6. आस्था वन संरक्षण योजना की समय अवधि क्या है?
यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक कुल पांच वर्षों के लिए है।
7. इस परियोजना को वित्तीय सहायता कहाँ से प्राप्त होगी?
इस पूरी परियोजना का वित्तपोषण वैधानिक निकाय राष्ट्रीय कैम्पा फंड (National CAMPA Fund) से होगा।
8. पवित्र उपवन या आस्था वन क्या होते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के कारण स्थानीय समुदायों द्वारा बिना दोहन के सदियों से सुरक्षित वन क्षेत्र।
9. इस योजना की पृष्ठभूमि में किस संस्था का कानूनी निर्देश है?
दिसंबर 2024 में पवित्र उपवनों की सुरक्षा पर दिए गए सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का निर्देश है।
10. योजना की प्रमुख तकनीकी विशेषता क्या है?
वनों की वास्तविक निगरानी के लिए जीआईएस (GIS) मैपिंग और सैटेलाइट इमेजरी तकनीक का उपयोग।
