RBI मौद्रिक नीति निर्माण सुझाव हेतु तीन प्रमुख सर्वेक्षणों की शुरुआत
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) ने देश के आर्थिक संकेतकों को सटीक रूप से मापने और प्रभावी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) निर्माण के लिए तीन राष्ट्रव्यापी घरेलू सर्वेक्षणों की शुरुआत की है।
- ये सर्वेक्षण 3 से 5 अगस्त 2026 को होने वाली आगामी मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक के लिए नीतिगत दरों को निर्धारित करने हेतु महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेंगे।
RBI के तीन प्रमुख सर्वेक्षण:
- परिवारों का मुद्रास्फीति अपेक्षा सर्वेक्षण (Inflation Expectations Survey of Households – IESH): यह मुद्रास्फीति सर्वेक्षण (Inflation Survey) देश के 19 प्रमुख शहरों में आयोजित किया जा रहा है।
- इसका मुख्य कार्य व्यक्तिगत उपभोग टोकरी के आधार पर वर्तमान मुद्रास्फीति और अगले तीन महीनों तथा एक वर्ष के भीतर मूल्य परिवर्तनों के प्रति आम परिवारों के मात्रात्मक व गुणात्मक अनुमानों को रिकॉर्ड करना है।
- शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (Urban Consumer Confidence Survey – UCCS): यह भी 19 शहरों में चलाया जा रहा है, जो शहरी परिवारों की वर्तमान आर्थिक स्थिति, रोजगार के अवसर, आय, मूल्य स्तर और उपभोक्ता खर्च के पैटर्न पर गुणात्मक दृष्टिकोण एकत्र करता है।
- ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (Rural Consumer Confidence Survey – RCCS): यह उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (Consumer Confidence Survey) 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में व्यापक रूप से आयोजित किया जा रहा है।
- यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग, रोजगार की स्थिति और क्रय शक्ति (Spending Sentiment) का गहराई से मूल्यांकन करता है।
मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) क्या हैं?
- परिचय: यह भारतीय अर्थव्यवस्था (India Economy) में ब्याज दरों का नियमन करने वाली एक महत्वपूर्ण समिति है।
- वैधानिक आधार: इसका गठन भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (संशोधन 2016) की धारा 45ZB के तहत किया गया है।
- सदस्यता संरचना: यह एक 6-सदस्यीय निकाय है।
- इसमें 3 सदस्य रिज़र्व बैंक से (अध्यक्ष के रूप में गवर्नर, मौद्रिक नीति के प्रभारी डिप्टी गवर्नर और एक नामित अधिकारी) तथा 3 बाहरी विशेषज्ञ सदस्य होते हैं जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा 4 वर्ष के लिए नियुक्त किया जाता है।
- आरबीआई के गवर्नर (Governor) इस समिति के पदेन (ex-officio) अध्यक्ष होते हैं।
- कार्य और लक्ष्यीकरण: यह समिति उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत रेपो दर (Repo Rate) निर्धारित करती है। इसे 4% (+/- 2%) के दायरे में मुद्रास्फीति को बनाए रखने का वैधानिक लक्ष्य दिया गया है।
- निर्णय प्रक्रिया: इसकी वर्ष में कम से कम चार बैठकें होना अनिवार्य है। निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं, और मत बराबर होने पर गवर्नर को निर्णायक मत (Casting Vote) देने का अधिकार होता है।
- कार्यकाल: बाहरी सदस्यों का कार्यकाल 4 वर्ष का होता है और वे पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते हैं।
- कोरम (Quorum): किसी भी बैठक के संचालन के लिए कम से कम 4 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है।
- निर्णय की बाध्यता: एमपीसी द्वारा तय किए गए नीतिगत ब्याज दर (मुख्यतः रेपो रेट) के फैसले आरबीआई के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होते हैं।
- समीक्षा रिपोर्ट: प्रत्येक बैठक के बाद एमपीसी अपना प्रस्ताव (Resolution) प्रकाशित करती है, जिससे प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहती है।
FAQs:
1. मौद्रिक नीति समिति (MPC) क्या है?
यह रिज़र्व बैंक अधिनियम के तहत गठित 6-सदस्यीय वैधानिक निकाय है, जो नीतिगत दरें तय करता है।
2. RBI ने कौन-कौन से तीन नए सर्वेक्षण शुरू किए हैं?
मुद्रास्फीति अपेक्षा सर्वेक्षण (IESH), शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (UCCS) और ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (RCCS)।
3. इन सर्वेक्षणों का उद्देश्य क्या है?
महंगाई की धारणा, रोजगार, घरेलू आय और खर्च के स्तर पर वास्तविक जमीनी आंकड़े एकत्र करना।
4. मौद्रिक नीति निर्माण में इनका क्या महत्व है?
ये आंकड़े मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) को ब्याज दरों पर सटीक निर्णय लेने का आधार देते हैं।
5. क्या आम नागरिक भी इन सर्वेक्षणों में भाग ले सकते हैं?
हाँ, चयनित शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के चुनिंदा परिवारों से सीधे प्रतिक्रियाएं ली जाती हैं।
6. उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण क्या होता है?
वह सर्वेक्षण जो देश की आर्थिक स्थिति, रोजगार और खर्च पर उपभोक्ताओं की धारणा को मापता है।
7. मुद्रास्फीति अपेक्षा सर्वेक्षण क्या है?
आम परिवारों द्वारा भविष्य में वस्तुओं व सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलावों का अनुमान।
8. RBI इन सर्वेक्षणों के आंकड़ों का उपयोग कैसे करेगा?
इन आंकड़ों का उपयोग अगस्त 2026 की समीक्षा में रेपो रेट और तरलता संतुलन हेतु होगा।
