India Hepatitis Elimination – जानिए वर्तमान स्थिति, योजना एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
संदर्भ:
हाल ही में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Health Ministry) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत अपने 2030 के India Hepatitis Elimination के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (National Viral Hepatitis Control Program – NVHCP) के तहत देशव्यापी स्वास्थ्य अवसंरचना को लगातार मजबूत कर रहा है।
हेपेटाइटिस क्या है? (What is Hepatitis?)
- परिभाषा: हेपेटाइटिस मुख्य रूप से यकृत की सूजन (Liver Disease) है, जो लीवर के ऊतकों को गंभीर रूप से क्षति पहुँचाती है।
- कारण: यह मुख्य रूप से हेपेटाइटिस वायरस (A, B, C, D, E) के कारण होता है। इसके अतिरिक्त अत्यधिक शराब का सेवन, कुछ दवाएं, जहरीले पदार्थ और ऑटोइम्यून बीमारियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
- मुख्य लक्षण: थकान और कमजोरी, भूख न लगना, पीलिया (आंखों और त्वचा का पीला पड़ना), पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, गहरे रंग का पेशाब।
- जोखिम: हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) और हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C) क्रोनिक संक्रमण का रूप ले लेते हैं, जिससे आगे चलकर लीवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) और यकृत कैंसर (Liver Cancer) जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।
भारत में हेपेटाइटिस की स्थिति (Hepatitis Situation in India):
भारत में वायरल हेपेटाइटिस (Viral Hepatitis) को एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या माना गया है। राष्ट्रीय आंकड़ों (HIV Sentinel Surveillance) के अनुसार:
- हेपेटाइटिस बी: देश की लगभग 0.85% आबादी इस वायरस से ग्रसित है (अर्थात प्रति 118 में से 1 व्यक्ति)। देश में लगभग 4 करोड़ लोग दीर्घकालिक संक्रमण से ग्रस्त हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत को सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल करता है।
- हेपेटाइटिस सी: देश के लगभग 0.29% लोग इससे संक्रमित हैं (अर्थात प्रति 345 में से 1 व्यक्ति)।
- वार्षिक मौतें: वायरल हेपेटाइटिस के कारण देश में हर साल लगभग 2.72 लाख मौतें लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर के कारण होती हैं।
भारत की रणनीति: राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP):
भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG 3.3) के अनुरूप वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को समाप्त करने (India Hepatitis Elimination) के लिए जुलाई 2018 में एनवीएचसीपी (NVHCP) लॉन्च किया था। इसकी प्रमुख रणनीतियाँ और घटक इस प्रकार हैं:
- मुख्य रणनीतिक स्तंभ (Core Strategic Pillars): यह कार्यक्रम तीन आयामी दृष्टिकोण पर कार्य करता है: रोकथाम (Prevention), स्वास्थ्य संवर्धन (Health Promotion), और मुफ़्त उपचार (Free Treatment)।
- वायरस-वार प्रबंधन ढांचा (Virus-wise Management Framework):
- हेपेटाइटिस A और E (एक्यूट संक्रमण): ये दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलते हैं। इनकी निगरानी और शुरुआती रोकथाम के लिए सरकार ‘इंटीग्रेटेड डिज़ीज़ सर्विलांस प्रोग्राम’ (IDSP) का उपयोग करती है।
- हेपेटाइटिस B और C (क्रोनिक संक्रमण): देश भर के जिला अस्पतालों और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से सभी संक्रमित मरीजों को मुफ़्त नैदानिक जांच और एंटीवायरल दवाएं प्रदान की जा रही हैं।
- अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ अभिसरण: भारत ने इसे प्रभावी बनाने के लिए एनवीएचसीपी को कई मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों (India Health) के साथ जोड़ा है:
- यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम (UIP): इसके तहत नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद (24 घंटे के भीतर) हेपेटाइटिस बी की ‘बर्थ डोज़’ (Birth Dose) दी जाती है, और इसके बाद छठे, दसवें तथा चौदहवें सप्ताह में पूर्ण टीकाकरण किया जाता है।
- राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP): उच्च जोखिम वाले समूहों (High-Risk Groups) और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों (Healthcare Workers) के लिए आउटरीच केंद्रों पर हेपेटाइटिस बी और सी की सघन जांच व टीकाकरण चलाया जा रहा है।
- राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP): टीबी उन्मूलन नेटवर्क के पास उपलब्ध आधुनिक मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक मशीनों का उपयोग हेपेटाइटिस की त्वरित जांच के लिए भी किया जा रहा है।
- डिजिटल और तकनीकी पहल (Digital Initiatives):
- एनवीएचसीपी-एमआईएस पोर्टल: मरीजों के रिकॉर्ड रखने, फॉलो-अप ट्रैकिंग और उपचार की निगरानी के लिए एक पूर्णतः पेपरलेस (Paperless) और पारदर्शी डिजिटल प्रणाली लागू की गई है।
- राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800-11-6666): यह आम जनता को संक्रमण के कारणों, नजदीकी जांच केंद्रों और उपचार सुविधाओं के बारे में तत्काल परामर्श उपलब्ध कराती है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:
- ग्लोबल एलायंस: भारत इस दिशा में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO Hepatitis) के वैश्विक दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करता है।
- जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति: भारत अपनी मजबूत फार्मास्यूटिकल क्षमता के बल पर दुनिया भर के विकासशील देशों को अत्यंत सस्ती डायरेक्ट-एक्टिंग एंटीवायरल (DAA) दवाओं की आपूर्ति कर रहा है, जिससे वैश्विक हेपेटाइटिस उन्मूलन को बल मिला है।
- वैश्विक अभियान: भारत प्रतिवर्ष 28 जुलाई को ‘विश्व हेपेटाइटिस दिवस’ (World Hepatitis Day) के माध्यम से जन-जागरूकता (Hepatitis Awareness) और कूटनीतिक प्रतिबद्धता को दोहराता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: हेपेटाइटिस क्या है?
उत्तर: हेपेटाइटिस वायरस, विषाक्त पदार्थों या ऑटोइम्यून विकारों के कारण होने वाली यकृत (लीवर) की एक गंभीर सूजन (Liver Disease) है।
प्रश्न 2: भारत में हेपेटाइटिस की स्थिति कैसी है?
उत्तर: भारत में यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है, जहाँ लगभग 0.85% आबादी हेपेटाइटिस बी और 0.29% आबादी हेपेटाइटिस सी से पीड़ित है।
प्रश्न 3: राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: यह वर्ष 2018 में शुरू किया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे से समाप्त करना है।
प्रश्न 4: हेपेटाइटिस B और C में क्या अंतर है?
उत्तर: हेपेटाइटिस B के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस C के लिए कोई वैक्सीन नहीं है, लेकिन इसे एंटीवायरल दवाओं (DAA) से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
प्रश्न 5: हेपेटाइटिस से बचाव कैसे किया जा सकता है?
उत्तर: स्वच्छ पेयजल, टीकाकरण (टाइप बी हेतु), सुरक्षित इंजेक्शन प्रथाओं को अपनाकर और संक्रमित रक्त या शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से बचकर इससे सुरक्षित रहा जा सकता है।
प्रश्न 6: क्या हेपेटाइटिस का इलाज संभव है?
उत्तर: हाँ, हेपेटाइटिस ए और ई स्वतः ठीक हो जाते हैं, जबकि बी और सी का सफल नियंत्रण और पूर्ण उपचार आधुनिक एंटीवायरल दवाओं के माध्यम से संभव है।
