UP की गोमती नदी में झींगा की नई प्रजाति Caridina sharmai की खोज
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संदर्भ:
हाल ही में भारतीय शोधकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश की गोमती नदी (Gomti River) में मीठे पानी के झींगे की एक नई प्रजाति (New Shrimp Species) की खोज की है, जिसे आधिकारिक तौर पर कारिडिना शर्माई (Caridina sharmai) नाम दिया गया है। यह इस नदी क्षेत्र से दर्ज की गई पहली एटिड झींगा (Atyid Shrimp) प्रजाति है।
कारिडिना शर्माई (Caridina sharmai) के बारे में:
- खोज स्थल: इसकी खोज उत्तर प्रदेश में गंगा की एक प्रमुख सहायक नदी, गोमती नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों (Lucknow Region) में कुड़िया घाट और गौघाट के बीच की गई है।
- यह मीठे पानी का झींगा (Freshwater Shrimp) है जो जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
- खोजकर्ता: लखनऊ के प्राणीशास्त्र शोधकर्ताओं ने स्थानीय मछुआरों के सहयोग से वर्ष 2023 और 2024 के सर्वेक्षणों के दौरान लगभग 80 नमूने एकत्र कर इस प्रजाति की पहचान की।
- नामकरण: Caridina sharmai का नाम लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रमुख प्रोफेसर यू.डी. शर्मा के सम्मान में रखा गया है।
- प्रोफेसर शर्मा को उत्तर भारत में क्रस्टेशियन के अध्ययन यानी कार्सिनोलॉजी (Carcinology) की नींव रखने का श्रेय दिया जाता है।
- वैज्ञानिक वर्गीकरण और परिवार: जीव विज्ञान वर्गीकरण के अनुसार इसकी स्थिति निम्नलिखित है:
- संघ (Phylum): आर्थ्रोपोडा (Arthropoda)
- उपसंघ (Subphylum): क्रस्टेशिया (Crustacea)
- गण (Order): डेकापोडा (Decapoda – दस पैरों वाले जीव)
- कुल/परिवार (Family): एटाइडे (Atyidae)
- वंश (Genus): कारिडिना (Caridina)
- शारीरिक बनावट:
- आकार (Size): वयस्क झींगे की कुल लंबाई 15 से 24 मिलीमीटर होती है, जो एक साधारण पेपर क्लिप से भी छोटी है।
- रोस्ट्रम (Rostrum): इसके सिर के अग्र भाग पर एक छोटा, चाकू के आकार का थूथन (Extension) होता है, जिसके ऊपरी हिस्से में 15 से 22 दांत और निचले हिस्से में 4 से 9 दांत पाए जाते हैं।
- टेल्सन (Telson): इसके पूंछ वाले हिस्से में अन्य संबंधित प्रजातियों की तरह कोई केंद्रीय रीढ़ (Median Spine) नहीं होती है।
- अग्र पाद (Front Legs): इसके आगे के पैरों के जोड़ों पर एक गहरा गड्ढा या खोखलापन (Excavation) होता है।
- प्राकृतिक रंग: वन्य वातावरण में यह झींगा गहरे भूरे या काले रंग का दिखाई देता है, जिस पर पीले-भूरे रंग की धारियाँ होती हैं।
- शोधकर्ताओं ने पाया कि जब इन झींगों को कृत्रिम एक्वेरियम में रखा जाता है, तो इनका रंग धीरे-धीरे पूरी तरह गायब हो जाता है और ये पारदर्शी (Transparent) हो जाते हैं।
- आवास (Habitat): यह जलीय प्रजाति (Aquatic Species) केवल मीठे पानी के आवासों में पाई जाती है। ये मुख्य रूप से नदी के तेज बहाव से दूर, पानी के नीचे डूबी हुई वनस्पतियों (Submerged Vegetation) से चिपके रहते हैं।
- व्यवहार: इन्हें अत्यंत शांत और सामाजिक प्राणी (Social Animals) माना गया है, जो हमेशा समूहों में रहना पसंद करते हैं।
- भोजन (Diet): ये सर्वाहारी और फिल्टर-फीडर (Filter-feeders) होते हैं। इनके आगे के पैरों पर लंबे, ब्रश जैसे बाल होते हैं, जिनका उपयोग ये जलीय पौधों से शैवाल (Algae) खुरचने और पानी से कार्बनिक पदार्थों को छानकर खाने के लिए करते हैं।
- ये नदी के जल चक्र और खाद्य जाल (Food Web) में पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में मदद करते हैं।
- संरक्षण स्थिति (Conservation Status): चूंकि यह एक बिल्कुल नई वैज्ञानिक खोज है, इसलिए वर्तमान में आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में इसे ‘डेटा डेफिसिएंट’ (Data Deficient – आंकड़ों की कमी) की श्रेणी में रखा जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: कारिडिना शर्माई क्या है?
उत्तर: यह उत्तर प्रदेश में खोजी गई मीठे पानी के झींगे (Freshwater Shrimp) की एक नई क्रस्टेशियन प्रजाति है, जो एटाइडे परिवार से संबंधित है।
प्रश्न 2: यह नई झींगा प्रजाति कहाँ खोजी गई?
उत्तर: यह नई प्रजाति भारत में उत्तर प्रदेश के लखनऊ क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली गोमती नदी के ऊपरी हिस्सों में खोजी गई है।
प्रश्न 3: इस प्रजाति का नाम कारिडिना शर्माई क्यों रखा गया?
उत्तर: इसका नाम क्रस्टेशियन अनुसंधान (कार्सिनोलॉजी) के भारतीय प्रर्वतक और लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर यू.डी. शर्मा के सम्मान में रखा गया है।
प्रश्न 4: इसकी खोज किस वैज्ञानिक संस्था ने की?
उत्तर: इसकी खोज लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र शोधकर्ताओं द्वारा स्थानीय मछुआरों के सक्रिय सहयोग से किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के दौरान की गई है।
प्रश्न 5: यह खोज क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
उत्तर: यह शहरी और प्रदूषित मानी जाने वाली गोमती नदी की समृद्ध जलीय जैव विविधता (India Biodiversity) को रेखांकित करती है और नदी संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण जैविक संकेतक प्रदान करती है।
प्रश्न 6: क्या यह प्रजाति केवल भारत में पाई जाती है?
उत्तर: वर्तमान वैज्ञानिक डेटा के अनुसार, यह प्रजाति अभी तक केवल भारत के उत्तर प्रदेश की गोमती नदी बेसिन के स्थानिक (Endemic) जीव के रूप में ही दर्ज की गई है। और पूर्ण उपचार आधुनिक एंटीवायरल दवाओं के माध्यम से संभव है।
