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आंध्र प्रदेश का पारंपरिक “Dhimsa Dance”

आंध्र प्रदेश का पारंपरिक “Dhimsa Dance”

Dhimsa Dance

संदर्भ:

हाल ही में आंध्र प्रदेश के भोगापुरम स्थित हवाई अड्डे पर 13,000 से अधिक आदिवासी बालिकाओं ने एक साथ पारंपरिक धिमसा नृत्य (Dhimsa Dance) प्रस्तुत करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Records) में अपना नाम दर्ज कराया।

पारंपरिक धिमसा नृत्य (Dhimsa Dance) के बारे में:

  • मुख्य क्षेत्र: यह नृत्य मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम, विजयनगरम और नवगठित अल्लूरी सीताराम राजू जिले की सुरम्य अराकू घाटी (Araku Valley) के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों द्वारा किया जाता है।
  • शब्दार्थ: ‘धिमसा’ (Dhimsa) शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है “पैरों के कदमों की आवाज” (Sound of the footsteps)
  • उत्पत्ति: ऐतिहासिक रूप से धिमसा नृत्य ओडिशा के कोरापुट जिले से जुड़ी हैं, जहाँ से यह धीरे-धीरे आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय जनजातीय बेल्ट में प्रसारित हुआ। 
  • सामूहिकता और समन्वय: पारंपरिक रूप से यह 15 से 20 महिलाओं के समूह में किया जाता है, लेकिन त्योहारों पर पूरा गांव इसमें शामिल हो सकता है। नर्तक एक-दूसरे का हाथ पकड़कर या एक-दूसरे की कमर पर हाथ रखकर एक श्रृंखला या चक्र बनाते हैं।
  • वेशभूषा और आभूषण: महिलाएं पारंपरिक और जीवंत नृवंशविज्ञान साड़ियों (Ethnic Sarees) और मिट्टी या धातुओं के पारंपरिक आभूषणों से सुसज्जित होती हैं।
  • भावों पर कम बल: इस आंध्र संस्कृति (Andhra Culture) नृत्य की मुख्य सुंदरता चेहरे के जटिल हाव-भाव या साहित्यिक ग्रंथों के बजाय पैरों और हाथों के अत्यधिक समन्वित और लयबद्ध संचालन (Footwork and Synchronized Movement) पर केंद्रित होती है।
  • पारंपरिक वाद्य यंत्र: धिमसा नृत्य पूरी तरह से लोक धुनों पर आधारित होता है, जिसमें पुरुष कलाकार निम्नलिखित पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाते हैं: 
  • मोरी (Mori): यह पीतल या लकड़ी से बना एक पारंपरिक शहनाई जैसा सुषिर वाद्य यंत्र (Wind Instrument) है।
  • थुडुम (Thudum) और दप्पू (Dappu): ये चमड़े से मढ़े हुए अवनद्ध वाद्य यंत्र (Percussion Drums) हैं, जो नृत्य की तीव्र और धीमी गति को नियंत्रित करते हैं।
  • किरिदी (Kiridi): यह एक छोटा ड्रम होता है जो लय बनाए रखने में पूरक का कार्य करता है।
  • प्रकार: इस लोक परंपरा (Folk Tradition) के अंतर्गत मुख्य रूप से 12 विभिन्न शैलियाँ या प्रकार पाए जाते हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना एक विशिष्ट महत्व है:
  • बोडा धिमसा (Boda Dhimsa): यह सबसे प्रमुख प्रकार है, जो ग्राम देवता की पूजा के समय किया जाता है।
  • गुंडेरी धिमसा (Gunderi Dhimsa): इसमें नर्तक आगे-पीछे कदम बढ़ाते हुए सांप जैसी वक्राकार गति करते हैं।
  • गोडी बेटा धिमसा (Goodi Beta Dhimsa): यह मुख्य रूप से शिकार से लौटने की खुशी में पुरुषों और महिलाओं द्वारा मिलकर किया जाता है।
  • पोतारा-तोला धिमसा (Potara-tola Dhimsa): यह वन पत्तियों और जड़ी-बूटियों को इकट्ठा करने की कृषि क्रिया का प्रदर्शन करता है।
  • बाघ धिमसा (Bhag Dhimsa): इसमें नर्तक बाघ के हमले से बचने और जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा करने की कला को शारीरिक मुद्राओं से दर्शाते हैं।
  • नटीकारी धिमसा (Natikari Dhimsa): यह त्योहारों के दिनों में किया जाने वाला एकल या विशेष नृत्य है।
  • जनजाति: यह पारंपरिक नृत्य आंध्र प्रदेश (Traditional Dance Andhra Pradesh) की कई प्रमुख अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) की सामूहिक पहचान का प्रतीक है। 
  • पोरजा जनजाति (Poraja Tribe): ‘पोरजा’ शब्द प्रजा शब्द से बना है। यह समुदाय मुख्य रूप से अराकू घाटी के पहाड़ी ढलानों पर निवास करता है। ये मुख्य रूप से स्थानांतरित कृषि (Podu Cultivation) और वनोपज संग्रह पर निर्भर हैं। धिमसा नृत्य इनकी सामाजिक एकजुटता का मुख्य साधन है।
  • खोंड जनजाति (Khond Tribe): यह ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर रहने वाली एक प्राचीन और बड़ी द्रविड़ियन जनजाति है। खोंड लोग अपनी विशिष्ट कुई (Kui) भाषा बोलते हैं और प्रकृति पूजा (Nature Worship) के लिए जाने जाते हैं। ये धरती माता (Penu) को प्रसन्न करने के उत्सवों में बड़े पैमाने पर धिमसा का आयोजन करते हैं।
  • गदबा जनजाति (Gadaba Tribe): गदबा भारत की सबसे प्राचीन जनजातियों में से एक हैं, जो मुंडा भाषाई परिवार से संबंधित हैं। इनकी महिलाएं भारी चांदी के हंसलीनुमा आभूषण (Neck Rings) पहनने के लिए प्रसिद्ध हैं। विवाह के अवसरों पर गदबा महिलाओं द्वारा किया जाने वाला धिमसा नृत्य सबसे आकर्षक माना जाता है।
  • बगाता जनजाति (Bagata Tribe): ये मुख्य रूप से विशाखापत्तनम के पहाड़ी क्षेत्रों के योद्धा और कृषक समुदाय माने जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से ये गोलकोंडा के राजाओं की सेना में शामिल थे। ये समाज में उच्च स्थान रखते हैं और चैत्र उत्सव (अप्रैल में होने वाला शिकार उत्सव) के दौरान धिमसा नृत्य में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
  • वाल्मीकि जनजाति (Valmiki Tribe): इस जनजाति के लोग मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक पुल का काम करते हैं। ये आर्थिक रूप से अधिक सक्रिय हैं और अपनी लोक परंपराओं को आधुनिक समय में संरक्षित रखने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: धिमसा नृत्य क्या है?

उत्तर: यह भारत के पूर्वी घाट (Eastern Ghats) की पहाड़ियों में रहने वाले आदिवासी समुदायों द्वारा किया जाने वाला एक अत्यंत जीवंत और लयबद्ध सामूहिक लोकनृत्य है। 

प्रश्न 2: धिमसा नृत्य किस राज्य का पारंपरिक लोकनृत्य है?

उत्तर: यह मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश (विशेषकर उत्तरी तटीय क्षेत्र और अराकू घाटी) का आधिकारिक और पारंपरिक आदिवासी लोकनृत्य है।

प्रश्न 3: यह नृत्य किन समुदायों द्वारा किया जाता है?

उत्तर: यह नृत्य मुख्य रूप से पोरजा, खोंड, गदबा, बगाता और वाल्मीकि जैसी स्थानीय अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है।

प्रश्न 4: धिमसा नृत्य का सांस्कृतिक महत्व क्या है?

उत्तर: यह सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) आदिवासी समुदायों के बीच पारस्परिक एकता, सामाजिक समरसता और प्रकृति के साथ उनके गहरे तादात्म्य को प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 5: इसे किन अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है?

उत्तर: इस नृत्य रूप (Indian Dance Forms) को मुख्य रूप से विवाह समारोहों, स्थानीय ग्राम मेलों, कृषि कटाई के मौसम और अप्रैल के वार्षिक शिकार उत्सवों में प्रस्तुत किया जाता है।

प्रश्न 6: धिमसा नृत्य की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर: इसकी मुख्य विशेषता नर्तकों द्वारा मानव श्रृंखला या वृत्त बनाकर एक ही लय में पैरों का संचालन करना तथा मोरी और दप्पू जैसे वाद्य यंत्रों का उपयोग करना है।

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