नौसेना का पांचवां स्वदेशी गोताखोरी सहायक पोत DSC A24 – प्रकार, श्रेणी, लागत और महत्व
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय नौसेना (Indian Navy) के स्वदेशी जहाज निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टीटागढ़ में पांचवें गोताखोरी सहायक पोत डीएससी ए-24 (DSC A24 – यार्ड 329) का आधिकारिक जलावतरण (Launch) किया गया। यह रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के पांच जहाजों के प्रोजेक्ट की श्रृंखला का अंतिम पोत है।
गोताखोरी सहायक पोत DSC A24 – यार्ड 329 के बारे में:
- परिचय: यह मुख्य रूप से तटीय जल, बंदरगाहों और उथले समुद्रों में जटिल गोताखोरी अभियानों (Operational Dives) को सुगम बनाने के लिए बनाया गया एक विशेष सहायक पोत है।
- यह गोताखोरी सहायता पोत (Diving Support Craft – DSC) आकार में मध्यम होता है और तटीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, जबकि गहरे समुद्र के मिशनों के लिए बड़े गोताखोरी सहायता जहाजों (Diving Support Vessel – DSV) का उपयोग किया जाता है।
- वर्गीकरण: इसे भारतीय नौसेना की विशेषज्ञ लड़ाकू-सहायक श्रेणी (Specialized Combat-Support Auxiliary Category) के अंतर्गत रखा गया है।
- यह पोत पूरी तरह से इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के सख्त नौसैनिक नियमों और विनियामक मानकों (Naval Rules and Regulations) के अनुसार प्रमाणित है।
- निर्माणकर्ता: इसका निर्माण कोलकाता स्थित निजी क्षेत्र की प्रमुख रक्षा कंपनी मैसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (Titagarh Rail Systems Limited – TRSL) द्वारा किया गया है।
- कुल लागत: इस पांच-पोत परियोजना की कुल लागत लगभग ₹174.77 करोड़ (लगभग ₹35 करोड़ प्रति जहाज) है।
- अनुबंध की तिथि: पांचों जहाजों के निर्माण का अनुबंध 12 फरवरी 2021 को साइन किया गया था।
- विशेषताएं:
- कैटामरान हल फॉर्म (Catamaran-Hull Form): इसका डिजाइन जुड़वां-हल (Twin-hull) पर आधारित है। यह पारंपरिक एकल-हल जहाजों की तुलना में असाधारण स्थिरता (Superior Stability), बढ़ा हुआ डेक क्षेत्र (Enhanced Deck Area) और चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में भी बेहतरीन संतुलन क्षमता प्रदान करता है।
- विस्थापन (Displacement): इस हल्के और फुर्तीले जहाज की कुल जल विस्थापन क्षमता लगभग 300 से 400 टन के बीच है।
- अत्याधुनिक गोताखोरी प्रणालियां: इसमें अत्याधुनिक कंप्रेसर, पानी के नीचे संचार उपकरण और विशेष डाइविंग प्रणालियां (State-of-the-art Diving Systems) लगाई गई हैं।
- स्वदेशी सामग्री का उच्च स्तर: मेक इन इंडिया रक्षा (Make in India Defence) नीति के तहत इस जहाज के मुख्य और सहायक इंजनों सहित लगभग 70 प्रतिशत उपकरण घरेलू निर्माताओं से खरीदे गए हैं, जो आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) का हिस्सा हैं।
महत्व:
- परिचालन क्षमता का विस्तार (Operational Capabilities): इसके नौसेना में शामिल होने से तटीय सुरक्षा (Maritime Security), पानी के नीचे निरीक्षण (Underwater Inspection) और खोज एवं बचाव कार्यों को अत्यधिक गति मिलेगी।
- मलबे को बाहर निकालना (Salvage Assistance): किसी भी दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति में डूबे हुए विमानों, जहाजों या रणनीतिक हथियारों के मलबे को कुशलता से खोजने और पुनः प्राप्त करने में यह प्राथमिक भूमिका निभाएगा।
- निजी क्षेत्र की क्षमता का प्रमाण: टीआरएसएल (TRSL) द्वारा इस पांच-जहाज परियोजना (DSC Project) को सफलतापूर्वक पूरा करना यह साबित करता है कि भारत का निजी रक्षा उद्योग अब जटिल और सूक्ष्म नौसैनिक जहाजों के निर्माण में पूरी तरह परिपक्व हो चुका है।
- रणनीतिक स्वायत्तता: रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण (Indigenisation) बढ़ने से भारत की विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होती है, जिससे संकट के समय देश की रणनीतिक निर्णय लेने की क्षमता अधिक स्वतंत्र रहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: DSC A24 क्या है?
उत्तर: यह मेक इन इंडिया पहल के तहत निर्मित भारतीय नौसेना का पांचवां और अंतिम अत्याधुनिक स्वदेशी गोताखोरी सहायक पोत (Diving Support Craft) है।
प्रश्न 2: यह भारतीय नौसेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह तटीय जल में परिचालन सुरक्षा (Maritime Security) को मजबूत करता है और नौसेना की पानी के भीतर छिपे खतरों से निपटने की तकनीकी क्षमता को बढ़ाता है।
प्रश्न 3: DSC A24 का मुख्य उपयोग क्या होगा?
उत्तर: इसका मुख्य उपयोग गोताखोरी सहायता, पानी के नीचे सैन्य निरीक्षण, मलबे को बाहर निकालने (Salvage) और तटीय तैनाती में होगा।
प्रश्न 4: क्या यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है?
उत्तर: हाँ, इसमें मुख्य प्रणालियों सहित 70 प्रतिशत से अधिक उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन को प्रदर्शित करते हैं।
प्रश्न 5: इस पोत का निर्माण किसने किया है?
उत्तर: इस विशिष्ट पोत का निर्माण रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की कंपनी मैसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (TRSL), कोलकाता द्वारा किया गया है।
प्रश्न 6: यह किस प्रकार के अभियानों में उपयोग होगा?
उत्तर: यह चुनौतीपूर्ण तटीय परिस्थितियों में विशेष गोताखोरी मिशनों, पानी के नीचे जहाज मरम्मत सहायता और बंदरगाह सुरक्षा अभियानों में उपयोग किया जाएगा।
