Taxation Amendment Bill 2026 लोकसभा से पारित, जानिए विधेयक के प्रावधान
संदर्भ:
हाल ही में लोकसभा (Lok Sabha) द्वारा कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 (Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026) को ध्वनिमत से पारित किया गया।
कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 के मुख्य प्रावधान:
संसद के मानसून सत्र में पारित इस विधेयक (Taxation Bill 2026) द्वारा मुख्य रूप से तीन पुराने कानूनों—आयकर अधिनियम, 2025, वित्त अधिनियम, 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं:
- अध्यादेश का प्रतिस्थापन: यह विधेयक 5 जून 2026 को जारी किए गए आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को निरस्त कर उसके स्थान पर दूसरा कानूनी रूप है।
- सरकारी प्रतिभूतियों पर कर छूट: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर आयकर से पूर्ण छूट दी गई है।
- पहले ब्याज आय पर 20%, अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर 30% और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5% की दर से कर देय था।
- विनिर्माण एवं हीरा क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन: विदेशी कंपनियों द्वारा सीमा शुल्क बंधित क्षेत्रों (Customs Bonded Areas) के गोदामों में कलपुर्जों के भंडारण से होने वाली आय को 31 मार्च 2041 तक आयकर से मुक्त किया गया है।
- अधिसूचित विशेष क्षेत्रों में रफ डायमंड्स (खुरदरे हीरे) की बिक्री या नीलामी से होने वाली विदेशी कंपनियों की आय को भी 2041 तक कर छूट के दायरे में लाया गया है।
- डिजिटल भुगतान और शून्य-MDR का उन्मूलन: भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A में संशोधन कर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी प्रणालियों पर लगी शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Zero-MDR) की बाध्यता को हटाने का अधिकार सरकार को दिया गया है।
- बिजनेस ट्रस्टों पर अधिभार: रियल एस्टेट (REITs) और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) के विशेष प्रयोजन वाहनों (SPVs) पर लगने वाले सरचार्ज को 10% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया है।
- डेटा सेंटर्स के नियमों का सरलीकरण: भारतीय कंपनियों द्वारा पट्टे (Lease) पर संचालित डेटा सेंटर्स (Data Centres) से सेवाएं लेने वाली विदेशी कंपनियों के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अधिसूचना की अनिवार्य शर्त को समाप्त कर दिया गया है।
विधेयक लाने के मुख्य कारण:
- विदेशी पूंजी को आकर्षित करना (Attracting Foreign Capital): भारतीय संप्रभु ऋण बाजार (Sovereign Debt Market) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की भागीदारी बढ़ाकर वित्तीय घाटे के वित्तपोषण को सुगम बनाना।
- मेक इन इंडिया को गति (Push to Make in India): वैश्विक तकनीकी दिग्गज कंपनियों (जैसे एप्पल) को भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए एक स्थिर और दीर्घकालिक टैक्स-हॉलीडे (Tax Holiday) अवसंरचना प्रदान करना।
- व्यापार सुगमता में सुधार (Improving Ease of Doing Business): भारत से प्रबंधित होने वाले विदेशी निवेश फंडों की जटिल 13 नियामक शर्तों में से 8 को समाप्त कर प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
- बैंकिंग इकोसिस्टम को मजबूती: डिजिटल भुगतान अवसंरचना (UPI/RuPay) के रखरखाव के लिए बैंकों और भुगतान प्रदाताओं (PSPs) को राजस्व सृजन का विकल्प देना, क्योंकि शून्य-MDR के कारण बैंकों पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा था।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
| प्रभावित क्षेत्र (Sectors) | संभावित सकारात्मक प्रभाव (Positive Impacts) | संभावित चुनौतियां (Challenges) |
| विदेशी निवेश (FDI/FPI) | बांड मार्केट और बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों में डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा। | अल्पकालिक तौर पर सरकारी कर राजस्व में कुछ गिरावट आ सकती है। |
| डिजिटल भुगतान (UPI) | बैंकों को बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा। | यदि मर्चेंट शुल्क का बोझ ग्राहकों पर डाला गया, तो नकद लेनदेन फिर बढ़ सकता है। |
| रोजगार और इलेक्ट्रॉनिक्स | 2041 तक की कर निश्चितता से सेमीकंडक्टर और मोबाइल विनिर्माण में नए रोजगार पैदा होंगे। | वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में मंदी आने पर घरेलू भंडारण बेकार होने का जोखिम। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
उत्तर: यह भारत में व्यापार सुगमता (Tax Reforms) बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और कर नियमों को डिजिटल युग के अनुकूल बनाने वाला एक वित्तीय विधेयक है।
प्रश्न 2: लोकसभा ने इस विधेयक को क्यों पारित किया?
उत्तर: लोकसभा (Lok Sabha) ने देश में नीतिगत स्थिरता लाने, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मजबूत करने और जून में जारी अध्यादेश को स्थायी कानून में बदलने हेतु इसे पारित किया।
प्रश्न 3: इस विधेयक में प्रमुख संशोधन क्या हैं?
उत्तर: इसमें विदेशी निवेशकों को सरकारी बांड्स पर कर छूट, इलेक्ट्रॉनिक्स भंडारण पर 2041 तक टैक्स हॉलीडे और डिजिटल भुगतान पर शुल्क विनियमन के अधिकार शामिल हैं।
प्रश्न 4: क्या इससे आम करदाताओं पर प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: यह मुख्य रूप से कॉर्पोरेट और विदेशी निवेश (Direct Tax) पर केंद्रित है; सामान्य आयकर दरों या व्यक्तिगत टैक्स स्लैब में इससे कोई सीधा बदलाव नहीं हुआ है।
प्रश्न 5: उद्योगों को इस विधेयक से क्या लाभ होगा?
उत्तर: उद्योगों को जटिल अनुपालन शर्तों से मुक्ति मिलेगी, पट्टे पर डेटा सेंटर सेवाएं लेना आसान होगा और दीर्घकालिक राजकोषीय नीति (Tax Policy) निश्चितता प्राप्त होगी।सुलझाने की प्रेरणा देता है.
