SC/ST Creamy Layer Reservation पर केंद्र का हलफनामा और स्पष्टीकरण
संदर्भ:
हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर (SC /ST Creamy Layer Reservation) का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता. सरकार ने कहा कि यह व्यवस्था केवल OBC और SEBC श्रेणियों के लिए है.
SC/ST क्रीमी लेयर पर हलफनामा और न्यायिक घटनाक्रम:
- हलफनामा: केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 6 अगस्त 2026 को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण (SC ST Reservation) के अंतर्गत संपन्न वर्ग को बाहर करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट SC याचिकाओं के लिए जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) प्रस्तुत किया.
- संदर्भित याचिकाएं: यह हलफनामा वकील अश्विनी उपाध्याय और रामशंकर प्रजापति द्वारा दायर उन जनहित याचिकाओं (PILs) के जवाब में आया है, जिनमें SC/ST कोटा (SC ST Quota) के भीतर आय-आधारित उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर को लागू करने की मांग की गई थी.
- न्यायिक पीठ: इन याचिकाओं पर Supreme Court के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई कर रही है.
- अगस्त 2024 का फैसला: 1 अगस्त 2024 को Supreme Court की 7-सदस्यीय संविधान पीठ ने राज्य बनाम देविंदर सिंह मामले में राज्यों को SC/ST के भीतर उप-वर्गीकरण (Sub-categorisation) करने की अनुमति दी थी.
- न्यायाधीशों की टिप्पणी: उस फैसले में पीठ के कुछ न्यायाधीशों ने व्यक्तिगत रूप से यह टिप्पणी (Obiter Dicta) की थी कि SC/ST में भी ‘क्रीमी लेयर’ की पहचान कर संपन्न लोगों (जैसे IAS अधिकारियों के बच्चों) को लाभ से बाहर किया जाना चाहिए. हालांकि, वह एक बाध्यकारी आदेश नहीं बल्कि केवल एक सुझाव था.
- केंद्र सरकार का स्पष्टीकरण: Supreme Court में दाखिल अपने हलफानामे में केंद्र सरकार ने निम्नलिखित दलीलें दी हैं:
- पिछड़ेपन का आधार: SC और ST जातियों की पहचान आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि सदियों के ऐतिहासिक सामाजिक पिछड़ेपन, छुआछूत और भौगोलिक अलगाव के आधार पर की गई है. केवल आर्थिक उन्नति (आय का बढ़ना) इस सामाजिक और व्यवस्थागत भेदभाव को समाप्त नहीं करती है.
- न्यायिक उदाहरण (Judicial Precedents): केंद्र ने इंदिरा साहनी (1992), ईवी चिन्नैया (2005) और अशोक कुमार ठाकुर मामलों का हवाला देते हुए कहा कि इन ऐतिहासिक फैसलों में क्रीमी लेयर के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक ही सीमित रखा गया था.
- कल्याणकारी योजनाओं में आय सीमा: सरकार ने स्पष्ट किया कि अधिकांश सामाजिक-आर्थिक योजनाओं में पहले से ही साधन परीक्षण (Means Test/BPL मानदंड) लागू हैं, जिससे लाभ जरूरतमंदों तक पहुँचता है, लेकिन इसे मूल संवैधानिक आरक्षण पात्रता (Reservation Eligibility) से नहीं जोड़ा जा सकता.
- संसदीय संप्रभुता: संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत SC/ST की राष्ट्रपति सूची में किसी भी प्रकार का संशोधन, समावेशन या सुप्रीम अपवर्जन करने की शक्ति केवल संसद के पास सुरक्षित है.
क्रीमी लेयर संकल्पना (Creamy Layer Concept):
- परिचय: यह एक ऐसी सीमा रेखा है जो किसी आरक्षित वर्ग के भीतर सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से संपन्न व्यक्तियों/परिवारों को चिह्नित करती है.
- इस रेखा से ऊपर आने वाले लोगों को आरक्षण लाभ के अयोग्य (Excluded) मान लिया जाता है ताकि कोटा का लाभ उसी वर्ग के अधिक पिछड़े लोगों को मिल सके.
- आधार: ‘क्रीमी लेयर’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग तमिलनाडु के सत्तनाथन आयोग (1971) द्वारा किया गया था.
- इंदिरा साहनी मामला (1992): इसे राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी मान्यता Supreme Court के नौ-न्यायाधीशों के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ (मंडल मामला) के फैसले से मिली.
- न्यायालय ने 9 न्यायाधीशों की पीठ के ऐतिहासिक निर्णय (मंडल वाद) में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण को बरकरार रखा, लेकिन यह अनिवार्य शर्त रखी कि ‘क्रीमी लेयर’ (समृद्ध वर्ग) को आरक्षण के लाभ से बाहर रखा जाए.
- राम नंदन समिति (1993): इस समिति का गठन क्रीमी लेयर के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों की श्रेणियों (जैसे- संवैधानिक पद धारक, क्लास-1 अधिकारी और एक निश्चित आय सीमा वाले लोग) की पहचान करने के लिए किया गया था.
- कारण: इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आरक्षण का लाभ किसी एक वर्ग के भीतर केवल संभ्रांत या समृद्ध लोगों (Creamy Layer) द्वारा ही न हड़प लिया जाए (Monopolized) और यह लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक समान रूप से वितरित हो सके.
- निर्धारण मानदंड: क्रीमी लेयर का निर्धारण दो मुख्य आधारों पर होता है: पद/स्थिति (Status) और वार्षिक आय (Income Limit)।
- पद/सेवा आधारित मानदंड (Status-Based Criteria): यदि माता-पिता निम्नलिखित पदों पर हैं, तो उनके बच्चे स्वतः क्रीमी लेयर में आ जाएंगे (चाहे आय कुछ भी हो):
- संवैधानिक पद: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्य, उच्चतम/उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आदि।
- सरकारी सेवा (वर्ग-A और B): माता-पिता दोनों या कोई एक Group-A/Class-I अधिकारी हो।माता-पिता दोनों Group-B/Class-II अधिकारी हों या पिता 40 वर्ष की आयु से पहले Group-A में पदोन्नत हो गए हों।
- सशस्त्र बल: सेना में कर्नल या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी।
- आय आधारित मानदंड (Income-Based Criteria):
- वर्तमान सीमा: वर्तमान में गैर-सरकारी पदों पर कार्यरत परिवारों के लिए वार्षिक आय सीमा ₹8 लाख या उससे अधिक तय की गई है (यह 2017 से प्रभावी है)।
- महत्वपूर्ण गणना नियम: इस वार्षिक आय की गणना करते समय ‘वेतन’ (Salary) और ‘कृषि आय’ (Agricultural Income) को शामिल नहीं किया जाता। केवल व्यवसाय, व्यापार, संपत्ति या अन्य स्रोतों से होने वाली आय को ही गिना जाता है।
- पद/सेवा आधारित मानदंड (Status-Based Criteria): यदि माता-पिता निम्नलिखित पदों पर हैं, तो उनके बच्चे स्वतः क्रीमी लेयर में आ जाएंगे (चाहे आय कुछ भी हो):
- संवैधानिक दृष्टिकोण:
- अनुच्छेद 14 और 15: ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर करना “सापेक्ष समानता” (Relative Equality) के सिद्धांत पर आधारित है। यदि एक अत्यधिक समृद्ध और एक अत्यंत पिछड़े व्यक्ति को एक ही श्रेणी में समान माना जाए, तो यह समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा।
- अनुच्छेद 16(4): यह राज्य को पिछड़े नागरिकों के किसी भी वर्ग के पक्ष में पदों के आरक्षण का प्रावधान करने की शक्ति देता है, यदि राज्य की राय में उनका प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है। क्रीमी लेयर यह सुनिश्चित करता है कि आरक्षण केवल “वास्तविक रूप से सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े” लोगों तक ही सीमित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर क्या है?
उत्तर: यह अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उन समृद्ध परिवारों को आरक्षण पात्रता (Reservation Eligibility) से बाहर करने का एक वैचारिक प्रस्ताव है, जो आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो चुके हैं.
प्रश्न 2: SC/ST समुदाय में क्रीमी लेयर लागू करने की चर्चा क्यों हो रही है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के एक फैसले में कुछ जजों ने व्यक्तिगत टिप्पणी कर संपन्न SC/ST परिवारों के बच्चों को कोटा लाभ से बाहर रखने का सुझाव दिया था.
प्रश्न 3: सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST आरक्षण पर क्या कहा है?
उत्तर: न्यायालय ने राज्यों को SC/ST कोटे के भीतर उप-वर्गीकरण (Sub-classification) की अनुमति दी है, लेकिन क्रीमी लेयर (Creamy Layer SC ST) को अनिवार्य रूप से लागू करने का कोई बाध्यकारी आदेश नहीं दिया है.
प्रश्न 4: क्रीमी लेयर की पहचान कैसे की जाती है?
उत्तर: वर्तमान में यह व्यवस्था केवल OBC के लिए लागू है, जिसकी पहचान माता-पिता के संवैधानिक पद, सरकारी सेवा वर्ग और वर्तमान में ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा के आधार पर होती है.
प्रश्न 5: क्या SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर अभी लागू है?
उत्तर: नहीं, भारतीय संविधान और वर्तमान आरक्षण नीतियों के तहत SC/ST श्रेणी के लिए कोई क्रीमी लेयर या आय-आधारित प्रतिबंध लागू नहीं है.वाद को बढ़ावा देना, कमियों की पहचान करना और परिणाम-उन्मुख शिक्षा नीति सुधारों (Education Policy India) को संस्थागत बनाना है. केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा अनुशंसित कर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की आधिकारिक पुरस्कार वेबसाइट पर ऑनलाइन किया जाता है।
