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Teesta Dam Project- भारत ने तीस्ता बांध परियोजना की समीक्षा के लिए पैनल का किया गठन

Teesta Dam Project- भारत ने तीस्ता बांध परियोजना की समीक्षा के लिए पैनल का किया गठन

Teesta Dam Project

संदर्भ:

हाल ही में चीन-बांग्लादेश के बढ़ते सहयोग के बीच भारत सरकार ने तीस्ता बांध परियोजना (Teesta Dam Project) हेतु तीस्ता नदी बेसिन व्यापक प्रबंधन योजना (Teesta River Basin Comprehensive Management Plan) तैयार करने और सुरक्षा समीक्षा हेतु एक उच्च-स्तरीय तकनीकी पैनल (Technical Panel) का गठन किया.

तीस्ता बांध परियोजना (Teesta Dam Project) के बारे में:

  • परिचय: तीस्ता बांध या बैराज परियोजना (Teesta Dam/Barrage Project) भारत और बांग्लादेश में तीस्ता नदी के जल संसाधनों का उपयोग करने के लिए बनाई गई महत्वपूर्ण जल-प्रबंधन और सिंचाई योजनाएं हैं.
    • तीस्ता बांध परियोजना के तहत भारत में मुख्य रूप से जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric Project) जैसे कि ‘तीस्ता स्टेज-III’ परियोजना संचालित है. गाजोलडोबा बैराज, पश्चिम बंगाल में स्थित यह बैराज सिंचाई और जल प्रबंधन के लिए उपयोग किया जाता है.
    • वर्ष 2008 में भारत में तीस्ता-V पावर स्टेशन (510 मेगावाट) चालू किया गया.
    • बांग्लादेश में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए तीस्ता बैराज परियोजना (Teesta Barrage Project) कार्यरत है.
  • नदी का उद्गम: तीस्ता नदी (Teesta River) पूर्वी हिमालय में सिक्किम के उत्तरी भाग में स्थित चो ल्हामू झील (So Lhamo Lake) और पाहुनरी ग्लेशियर से निकलती है.
    • यह भारत के सिक्किम (151 किमी) और पश्चिम बंगाल (142 किमी) राज्यों से बहते हुए बांग्लादेश (121 किमी) में प्रवेश करती है, जहाँ यह ब्रह्मपुत्र नदी (जमुना) में मिल जाती है. इसकी कुल लंबाई 414 किलोमीटर है. 
  • तीस्ता स्टेज बांध: 
    • निर्माण और क्षमता: सिक्किम के चुंगथांग में निर्मित तीस्ता स्टेज-III (1,200 मेगावाट) एक प्रमुख ‘रन-ऑफ-रिवर’ जलविद्युत परियोजना (Run-of-River Project) है, जिसे 2017 में चालू किया गया था. 
    • आपदा और विनाश: अक्टूबर 2023 में, दक्षिण ल्होनक झील में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) (हिमनद झील फटने से आई बाढ़) के कारण यह 60 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध पूरी तरह बह गया था. 
    • पुनर्निर्माण (Teesta Stage III Reconstruction): वर्ष 2025 में पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने इसके पुनर्निर्माण को पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) दी. अब इसे पहले से अधिक मजबूत 118.64 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध (Concrete Gravity Dam) के रूप में डिज़ाइन किया जा रहा है.
  • महत्व:
    • ऊर्जा सुरक्षा: 1,200 मेगावाट क्षमता वाली तीस्ता स्टेज-III परियोजना भारत के उत्तर-पूर्वी ग्रिड के लिए स्वच्छ जलविद्युत ऊर्जा (Clean Hydropower) का एक प्राथमिक स्रोत है.
    • बाढ़ प्रबंधन (Flood Management): मानसून के दौरान सिक्किम और पश्चिम बंगाल के निचले इलाकों में आने वाली आकस्मिक बाढ़ को नियंत्रित करने में यह बांध महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
    • रणनीतिक अवस्थिति: यह क्षेत्र भारत के संवेदनशील सिलिगुड़ी कॉरिडोर (Siliguri Corridor) या ‘चिकन नेक’ के निकट स्थित है. चीन इस नदी के निचले बेसिन (बांग्लादेश सीमा के भीतर) में ‘तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना’ के माध्यम से तकनीकी और वित्तीय निवेश बढ़ा रहा है. भारत की सुरक्षा के लिए चीन की यह मौजूदगी एक बड़ी रणनीतिक चुनौती है. 
  • तीस्ता जल साझाकरण विवाद: 
    • शुष्क मौसम में जल संकट: भारत और बांग्लादेश (Bangladesh) के बीच शुष्क मौसम में तीस्ता नदी के पानी के न्यायसंगत और समान वितरण (Water Sharing) को लेकर दशकों पुराना भू-राजनीतिक सीमा पार जल विवाद है.
      • गैर-मानसून महीनों (दिसंबर से मार्च) के दौरान नदी में पानी का प्रवाह काफी कम हो जाता है. बांग्लादेश का उत्तरी क्षेत्र अपनी ‘बोरों धान’ की फसल की सिंचाई के लिए पूरी तरह तीस्ता के पानी पर निर्भर है.
    • मांगों में अंतर: बांग्लादेश इस शुष्क अवधि के दौरान नदी के पानी के 50% हिस्से की मांग करता है, जबकि भारत के पश्चिम बंगाल राज्य की अपनी कृषि जरूरतें हैं, जिसके कारण राज्य सरकार इस समझौते का विरोध करती रही है.
  • ऐतिहासिक प्रयास: 
    • 1983 का अंतरिम समझौता: एक अस्थायी समझौता किया गया था जिसके तहत भारत को 39% और बांग्लादेश को 36% पानी आवंटित किया गया था, लेकिन यह स्थायी रूप से लागू नहीं हो सका.
    • 2011 का ड्राफ्ट समझौता: भारत और बांग्लादेश की केंद्र सरकारों के बीच 2011 में एक समझौता अंतिम चरण में था, जिसके तहत भारत को 42.5% और बांग्लादेश को 37.5% पानी मिलना था, परंतु पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के विरोध के कारण इसे टालना पड़ा.
    • हालिया भारत-पैनल गठन (2026): बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव (प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में) और चीनी कंपनियों (जैसे PowerChina) की तीस्ता बैराज मास्टर प्लान में बढ़ती तकनीकी भागीदारी को देखते हुए, भारत ने अगस्त 2026 में संयुक्त विस्तृत तकनीकी अध्ययन (Joint Detailed Technical Study) की समीक्षा के लिए स्वयं का एक विशेषज्ञ पैनल गठित किया है ताकि सुरक्षा हितों की रक्षा की जा सके. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Teesta Dam Project क्या है?

उत्तर: यह तीस्ता नदी (Teesta River) के जल का उपयोग कर भारत में जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric Project) करने और बांग्लादेश में सिंचाई व बाढ़ प्रबंधन के लिए बनाई गई एक बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है. 

प्रश्न 2: Teesta Dam Project कहां स्थित है?

उत्तर: भारत में प्रमुख तीस्ता स्टेज-III बांध सिक्किम के चुंगथांग (मंगन जिला) में स्थित है, जबकि तीस्ता बैराज परियोजना भारत के पश्चिम बंगाल और उत्तरी बांग्लादेश में स्थित है. 

प्रश्न 3: Teesta Stage III Dam Project का क्या महत्व है?

उत्तर: यह 1,200 मेगावाट क्षमता वाली परियोजना भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए जलविद्युत ऊर्जा (Hydropower India) और ग्रिड स्थिरता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है.

प्रश्न 4: Teesta Dam Project का Reconstruction क्यों किया जा रहा है?

उत्तर: अक्टूबर 2023 में आई विनाशकारी हिमनद झील बाढ़ (GLOF) के कारण मूल बांध पूरी तरह नष्ट हो गया था, जिसके बाद 2025-2026 में इसकी संरचना को अधिक मजबूत बनाने के लिए पुनर्निर्माण शुरू किया गया.

प्रश्न 5: Teesta River का भारत और Bangladesh के लिए क्या महत्व है?

उत्तर: यह नदी सिक्किम की जीवन रेखा है, पश्चिम बंगाल की जल आवश्यकताओं को पूरा करती है और बांग्लादेश के उत्तरी जिलों में कृषि व खाद्य सुरक्षा का मुख्य आधार है.

प्रश्न 6: Teesta Water Sharing Dispute क्या है?

उत्तर: यह भारत और बांग्लादेश (Bangladesh) के बीच शुष्क मौसम में तीस्ता नदी के पानी के न्यायसंगत और समान वितरण (Water Sharing) को लेकर दशकों पुराना भू-राजनीतिक सीमा पार जल विवाद है.

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