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भारत का मिला स्वदेशी पोत ‘ORV Sagar Manthan’, महासागर अनुसंधान को मिलेगी नई गति

भारत का मिला स्वदेशी पोत ‘ORV Sagar Manthan’, महासागर अनुसंधान को मिलेगी नई गति

ORV Sagar Manthan

संदर्भ:

हाल ही में 9 सितंबर 2026 को भारत के पहले अत्याधुनिक और उन्नत महासागर अनुसंधान पोत ‘ORV सागर मंथन’ (ORV Sagar Manthan) का कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में भव्य जलावतरण (Launch) किया गया.

महासागर अनुसंधान पोत ‘ORV सागर मंथन’ के बारे में:

  • परिचय: ORV सागर मंथन (Ocean Research Vessel – ORV) एक विशिष्ट बहु-विषयक महासागर अनुसंधान पोत (Multidisciplinary Oceanographic Research Platform) है.
    • यह समुद्र विज्ञान संबंधी सर्वेक्षणों, गहरे समुद्र में परिचालन और भूभौतिकीय प्रोफाइलिंग को पूरा करने में सक्षम एक तैरती हुई प्रयोगशाला है. 
  • निर्माता: इसका संपूर्ण डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा किया गया है.
    • जुलाई 2024 में अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के मात्र दो वर्ष के भीतर और अप्रैल 2026 में कील रखने (Keel Laying) के सिर्फ 5 महीने के रिकॉर्ड समय में इसका जलावतरण किया गया है.
  • स्वामित्व: यह पोत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR) के लिए तैयार किया गया है.
  • प्रतिस्थापन: यह पोत भारत के 43 वर्ष पुराने ऐतिहासिक अनुसंधान पोत ‘ORV सागर कन्या’ (1983 में जर्मनी से अधिग्रहित) का स्थान लेगा.
  • कुल लागत: इस परियोजना के निर्माण पर लगभग ₹840 करोड़ की राशि खर्च की जा रही है. 
  • कमीशनिंग: वर्ष 2028 तक इसके पूर्ण समुद्री परीक्षणों (Sea Trials) के बाद इसे अंतिम रूप से राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा.
  • विशेषताएं:
    • आयाम एवं गति: इस जहाज की कुल लंबाई 89.50 मीटर, चौड़ाई 18.80 मीटर और इसका सकल भार (Gross Tonnage) 5,900 टन है. यह अधिकतम 14 नॉट की गति से चल सकता है.
    • गहन परिचालन क्षमता: यह पोत अधिकतम 6,000 मीटर (6 किमी) की गहराई तक परिचालन और वैज्ञानिक डेटा एकत्र करने में सक्षम है.
    • सहनशीलता (Endurance): यह लगातार 45 दिनों तक बिना रुके समुद्र में अनुसंधान कार्य कर सकता है और एक समय में 34 सदस्यों (वैज्ञानिकों और चालक दल) को ले जा सकता है.
    • डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम: इस तकनीक से लैस होने के कारण जहाज उच्च सटीकता वाले वैज्ञानिक कार्यों के लिए समुद्र में किसी एक निश्चित स्थान पर लंबे समय तक स्थिर रह सकता है.
    • अंडरवाटर साइलेंसिंग (Silent-A Compliant): यह अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप न्यूनतम पानी के नीचे का शोर (Underwater Noise) उत्पन्न करता है, जिससे समुद्री जीवन परेशान नहीं होता और सटीक ध्वनिक मैपिंग (Acoustic Mapping) संभव होती है.
    • दोहरा वर्गीकरण (Dual Classification): इसे इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) और अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग (ABS) दोनों से प्रमाणन प्राप्त है.
  • उन्नत वैज्ञानिक उपकरण: यह पोत कई आधुनिक प्रणालियों से लैस है: 
  • मल्टीबीम बाथिमेट्री (Multibeam Bathymetry) और स्वाथ सर्वेक्षण प्रणालियां.
  • भूकंपीय डेटा के लिए मल्टीचैनल सीस्मिक सिस्टम (Multichannel Seismic Systems).
  • वायुमंडलीय अवलोकनों के लिए आधुनिक डॉप्लर वेदर रडार (Doppler Weather Radar).
  • रीमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROVs) और ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (AUVs) को समुद्र में छोड़ने और वापस निकालने की क्रेन प्रणालियां. 

महासागर अनुसंधान के लिए इसका महत्व:

  • स्वदेशी अनुसंधान पोत (Indigenous Ocean Research Vessel): विदेशी खरीद प्रणालियों पर निर्भरता खत्म करके भारत ने अत्यधिक जटिल महासागरीय मंचों को घरेलू स्तर पर विकसित करने की अपनी क्षमता सिद्ध की है.
  • डीप ओशन मिशन को गति (Deep Ocean Mission India): यह पोत भारत सरकार के ‘गहन महासागर मिशन’ के वर्टिकल-4 (गहन महासागर सर्वेक्षण और अन्वेषण) के तहत निर्मित किया गया है. यह पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स (Polymetallic Nodules) और हाइड्रोथर्मल सल्फाइड जैसे दुर्लभ खनिजों की खोज को गति देगा.
  • रणनीतिक एवं भू-राजनीतिक नेतृत्व: हिंद महासागर में चीन के बढ़ते वैज्ञानिक और नौसैनिक जहाजों के प्रभाव के बीच, भारत इस पोत के जरिए ठोस वैज्ञानिक डेटा जुटाकर वैश्विक महासागर भू-राजनीति (Global Ocean Geopolitics) में अपनी केंद्रीय भूमिका मजबूत करेगा.
  • जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन: यह पोत ध्रुवीय पिघलते ग्लेशियरों, समुद्री तरंगों के प्रभाव और मानसूनी वायुमंडल का सटीक अध्ययन करेगा. इससे चक्रवात, सुनामी और अन्य आपदाओं की सटीक भविष्यवाणी संभव हो सकेगी.
  • संसाधन मूल्यांकन: इसके अत्याधुनिक उपकरणों द्वारा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य गैर-जीवित समुद्री संसाधनों का सटीक मानचित्रण किया जा सकेगा. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: ORV सागर मंथन क्या है?

उत्तर: यह भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी, अत्याधुनिक और बहु-विषयक उन्नत महासागर अनुसंधान पोत (Ocean Research Vessel) है.

प्रश्न 2: Sagar Manthan Ocean Research Vessel किसने बनाया है?

उत्तर: इस अत्याधुनिक पोत का डिजाइन और निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा शिपयार्ड कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने किया है. 

प्रश्न 3: Indigenous Ocean Research Vessel Sagar Manthan की खासियत क्या है?

उत्तर: यह 6000 मीटर गहराई तक परिचालन क्षमता, 45 दिन की सहनशीलता, डायनेमिक पोजिशनिंग और न्यूनतम ध्वनि (Silent-A) तकनीक से लैस है. 

प्रश्न 4: India Ocean Research के लिए Sagar Manthan क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह 43 साल पुराने ‘सागर कन्या’ पोत की जगह लेगा और भारत को महासागरीय खनिज, तेल खोज और जलवायु अनुसंधान में आत्मनिर्भर बनाएगा. 

प्रश्न 5: Deep Ocean Mission India में Sagar Manthan की क्या भूमिका होगी?

उत्तर: यह मिशन के अंतर्गत गहरे समुद्र में खनिज सर्वेक्षण, मानव रहित सबमर्सिबल (AUVs/ROVs) के संचालन और मानचित्रण की रीढ़ बनेगा.

प्रश्न 6: GRSE Sagar Manthan पोत से किन समुद्री संसाधनों का अध्ययन होगा?

उत्तर: इसके माध्यम से मध्य-महासागरीय कटकों में बहु-धातु हाइड्रोथर्मल सल्फाइड खनिजों, उप-समुद्री तेल-गैस भंडारों और समुद्री पर्यावरण का अध्ययन किया जाएगा.

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