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Chagos Islands Dispute: मालदीव ने बातचीत के लिए ब्रिटेन को भेजा औपचारिक आमंत्रण

Chagos Islands Dispute: मालदीव ने बातचीत के लिए ब्रिटेन को भेजा औपचारिक आमंत्रण

Chagos Islands Dispute

संदर्भ:

हाल ही में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) को एक पत्र भेजकर चागोस द्वीप समूह विवाद (Chagos Islands Dispute) पर द्विपक्षीय बातचीत (Maldives UK Talks) के लिए औपचारिक आमंत्रण भेजा।

चागोस द्वीप समूह (Chagos Archipelago) के बारे में:

  • स्थिति (Location): यह द्वीप समूह मध्य हिंद महासागर (Central Indian Ocean) में स्थित है।
    • यह मालदीव के दक्षिणी छोर से लगभग 500 किलोमीटर (310 मील) दक्षिण में स्थित है। 
  • भौगोलिक परिदृश्य: चागोस द्वीप समूह (Chagos Archipelago Dispute) मुख्य रूप से 7 उष्णकटिबंधीय एटोल (Atolls) और 60 से अधिक छोटे द्वीपों का एक समूह है।
  • क्षेत्रफल: इसका कुल भूमि क्षेत्रफल लगभग 60 वर्ग किलोमीटर (23 वर्ग मील) है, लेकिन इसका विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) हिंद महासागर के एक विशाल हिस्से को कवर करता है। 
  • प्रमुख द्वीप: इसके सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण द्वीप का नाम डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) है। इसके अतिरिक्त पेरोस बान्होस, सॉलोमन द्वीप और ईगमोंट द्वीप इसके अन्य प्रमुख भाग हैं।
  • प्रशासन: ऐतिहासिक रूप से इसे ब्रिटेन द्वारा ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (BIOT) के रूप में प्रशासित किया जाता रहा है। 

चागोस विवाद का इतिहास और वर्तमान परिदृश्य (History and Current State of Chagos Dispute)

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
    • फ्रांसीसी और ब्रिटिश शासन: 18वीं शताब्दी में फ्रांस ने चागोस और मॉरीशस पर अधिकार किया था। नेपोलियन के पतन के बाद 1814 में पेरिस की संधि के तहत यह क्षेत्र ब्रिटेन को सौंप दिया गया।
    • 1965 का अलगाव: मॉरीशस की स्वतंत्रता (1968) से ठीक तीन साल पहले, 1965 में ब्रिटेन ने चागोस को मॉरीशस से अलग कर दिया और BIOT की स्थापना की। मॉरीशस का दावा है कि यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1514 (जो स्वतंत्रता से पहले औपनिवेशिक क्षेत्रों के विघटन को प्रतिबंधित करता है) का उल्लंघन था। 
  • निवासियों का निष्कासन और अमेरिकी सैन्य बेस:
  • डिएगो गार्सिया का लीज: शीत युद्ध के दौरान रणनीतिक महत्व के कारण ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया द्वीप को संयुक्त राज्य अमेरिका (US) को सैन्य बेस बनाने के लिए लीज पर दे दिया।
    • चागोस का डिएगो गार्सिया द्वीप हिंद महासागर में अमेरिका-ब्रिटेन का सबसे बड़ा सैन्य बेस है, जो पूरे दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा को नियंत्रित करता है।
  • मानवीय संकट: 1967 से 1973 के बीच, ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया के मूल निवासियों (चागोसियन या इलोइस) को बलपूर्वक निष्कासित कर मॉरीशस और सेशेल्स भेज दिया। 
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और मध्यस्थता के प्रयास:
    • ICJ सलाह (2019): अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने फैसला सुनाया कि मॉरीशस का विउपनिवेशीकरण (Decolonization) कानूनी रूप से पूरा नहीं हुआ था और ब्रिटेन को जल्द से जल्द इसका प्रशासन छोड़ना चाहिए।
    • ITLOS और UNGA: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) और इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) ने भी मॉरीशस की संप्रभुता का समर्थन किया।
  • यूके-मॉरीशस समझौता (UK-Mauritius Chagos Deal):
    • समझौता: मई 2025 में, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार ने मॉरीशस को संप्रभुता (Chagos Islands Mauritius Deal) सौंपने की सहमति दी, जिसके तहत डिएगो गार्सिया सैन्य बेस को अगले 99 वर्षों के लिए ब्रिटेन-यूएस नियंत्रण में रखने का प्रावधान था।
    • वर्तमान स्थिति (2026): यह डील अभी पूर्ण रूप से लागू नहीं हुई है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “बड़ी भूल” बताते हुए इस पर आपत्ति जताई है। इसी राजनीतिक अनिश्चितता के बीच, सितंबर 2026 में ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन के बाद नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के सामने यह मामला दोबारा खुल गया है।
  • मालदीव का पक्ष:
  • परामर्श का अभाव: राष्ट्रपति मुइज्जू ने गहरी निराशा व्यक्त की है कि यूके-मॉरीशस समझौते के दौरान मालदीव से कोई सलाह नहीं ली गई।
  • ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध: मालदीव का तर्क है कि चागोस (स्थानीय नाम: फोल्हावाही) का इतिहास और संस्कृति मॉरीशस की तुलना में मालदीव से अधिक निकटता से जुड़ी है। मालदीव के राजा हसन नौवें के 16वीं शताब्दी के दस्तावेजों और धिवेही भाषा के शिलालेखों को इसके साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
  • समुद्री सीमा विवाद (EEZ Overlap): 2023 में ITLOS ने मालदीव और चागोस के बीच विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का सीमांकन किया था। वर्तमान मालदीव सरकार ने इस फैसले को खारिज कर दिया है और इस क्षेत्र को अपने संप्रभु समुद्री क्षेत्र में शामिल करने की घोषणा की है।
  • रणनीति: राष्ट्रपति मुइज्जू ने संकेत दिया है कि मालदीव चागोस पर नियंत्रण (Maldives Chagos Islands) लेने के लिए तैयार है।
    • मालदीव ने अमेरिका और ब्रिटेन को यह आश्वासन भी दिया है कि वे डिएगो गार्सिया सैन्य बेस को बिना किसी रुकावट के संचालित रख सकते हैं, जिससे मॉरीशस के विपरीत पश्चिमी देशों के रणनीतिक हित सुरक्षित रहेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Chagos Islands Dispute क्या है?

उत्तर: यह हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता (Chagos Islands Sovereignty) को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच एक दीर्घकालिक औपनिवेशिक विवाद है। 

प्रश्न 2: Maldives Chagos Islands को लेकर क्या चाहता है?

उत्तर: मालदीव ऐतिहासिक और भौगोलिक संबंधों के आधार पर इस क्षेत्र पर अपना दावा कर रहा है और ब्रिटेन-मॉरीशस समझौते (Chagos Dispute Maldives) का विरोध कर रहा है। 

प्रश्न 3: Chagos Islands Sovereignty पर Maldives ने UK से क्या कहा?

उत्तर: मालदीव ने ब्रिटिश पीएम को पत्र लिखकर कहा कि संप्रभुता हस्तांतरण से पहले मालदीव के वैध हितों को ध्यान में रखते हुए सार्थक वार्ता (Maldives UK Chagos Talks) शुरू की जाए। 

प्रश्न 4: Maldives UK Talks के लिए औपचारिक आमंत्रण क्यों भेजा गया?

उत्तर: क्योंकि यूके-मॉरीशस डील अभी लंबित है और मालदीव बिना परामर्श के चागोस को मॉरीशस को सौंपे जाने के ब्रिटिश फैसले से असंतुष्ट है।

प्रश्न 5: Chagos Islands Mauritius Deal को लेकर Maldives की क्या आपत्ति है?

उत्तर: मालदीव का मानना है कि यह समझौता उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और हिंद महासागर (Indian Ocean Chagos Dispute) में उसके संप्रभु समुद्री अधिकारों को प्रभावित करता है।

प्रश्न 6: Indian Ocean Chagos Dispute का क्षेत्रीय महत्व क्या है?

उत्तर: चागोस का डिएगो गार्सिया द्वीप हिंद महासागर में अमेरिका-ब्रिटेन का सबसे बड़ा सैन्य बेस है, जो पूरे दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा को नियंत्रित करता है।

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