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Mandar GI Tag- झारखंड पारंपरिक वाद्ययंत्र मांदर को मिला GI टैग, जानिए वाद्ययंत्र की विशेषताएं

Mandar GI Tag- झारखंड पारंपरिक वाद्ययंत्र मांदर को मिला GI टैग, जानिए वाद्ययंत्र की विशेषताएं

Mandar GI Tag

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार के भौगोलिक संकेतक (जीआई) रजिस्ट्री, चेन्नई (Geographical Indications Registry, Chennai) ने झारखंड के सबसे लोकप्रिय पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र ‘मांदर ऑफ झारखंड’ (Mandar of Jharkhand) को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग (Mandar GI Tag) प्रदान किया।

झारखंड वाद्ययंत्र “मांदर” के बारे में:

  • परिचय: मांदर वाद्ययंत्र (Mandar musical instrument) एक पारंपरिक अवनद्ध (आघात या ताल) वाद्ययंत्र (Percussion Instrument) है। यह दो-मुंहा बेलनाकार ढोल की तरह होता है, जो झारखंड की जनजातीय संस्कृति (Jharkhand tribal culture), लोक कलाओं और उत्सवों की धड़कन माना जाता है।
  • पंजीकरण: चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री के अभिलेखों में इसे ‘मांदर ऑफ झारखंड’ के नाम से आवेदन संख्या 777 (Application No. 777) के तहत पंजीकृत किया गया है। 
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मांदर का इतिहास झारखंड की प्राचीन स्वदेशी और आदिवासी सभ्यताओं से जुड़ा है। लोक मान्यताओं के अनुसार, जब से मानव समाज में लोक संगीत का जन्म हुआ है, तब से मांदर की थाप गूंज रही है।
    • जीआई टैग आवेदन प्रक्रिया के दौरान इसके ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में वर्ष 1915 के ऐतिहासिक अभिलेखों का संदर्भ दिया गया था। इसमें विख्यात मानवविज्ञानी सरत चंद्र रॉय, तारक चंद्र दास और डब्ल्यू.जी. आर्चर के शोध पत्रों तथा पटना संग्रहालय (Patna Museum) के ऐतिहासिक साक्ष्यों को शामिल किया गया था.
  • निर्माण प्रक्रिया:
    • कच्चा माल: इसका मुख्य ढांचा लकड़ी के बजाय स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विशेष लाल मिट्टी (Locally sourced red clay) से बनाया जाता है. मिट्टी का ढांचा होने के कारण यह सीधे ‘माटी की संस्कृति’ का प्रतिनिधित्व करता है.
    • द्वि-मुखी संरचना: इसके दोनों छोर (मुंह) असमान आकार के होते हैं. इसके विनिर्माण में दोनों तरफ के मुख को ढकने के लिए बकरे या बंदर के चमड़े (Leather-covered openings) का पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है.
  • शिल्प कौशल का मुख्य केंद्र: झारखंड के गुमला जिले (Gumla District) का रायडीह ब्लॉक स्थित जरजट्टा गांव (Jarjatta Village) मांदर विनिर्माण और पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद का सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक केंद्र है.
    • इस जीआई टैग को दिलाने में रायडीह मांदर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और गुमला के तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने 5 वर्षों तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है. 
  • विशेषताएं:
    • अद्वितीय ध्वनिक गुण (Acoustic Properties): मिट्टी और चमड़े के अद्भुत संयोजन के कारण मांदर की आवाज ढोल या नगाड़े की तुलना में कहीं अधिक खनकदार, गहरी और गूंजने वाली होती है.
    • सांस्कृतिक जुड़ाव: यह झारखंड की जनजातीय अस्मिता का प्रतीक है. कर्मा, सरहुल, सोहराय और जितिया जैसे प्रमुख आदिवासी त्योहारों, नृत्य (Tribal Dance) और अखरा (सामुदायिक बैठक स्थलों) में मांदर की थाप के बिना कोई भी अनुष्ठान अधूरा माना जाता है. 

जीआई टैग का राष्ट्रीय एवं आर्थिक महत्व:

  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण (Preserving Cultural Heritage): जीआई टैग मिलने से झारखंड की सदियों पुरानी स्वदेशी लोक कला और पुरखों की विरासत को कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है। अब कोई अन्य राज्य इस वाद्ययंत्र की नकल कर व्यावसायिक दावा नहीं कर सकता.
  • कारीगरों का आर्थिक सशक्तिकरण (Economic Empowerment of Artisans): गुमला और आस-पास के क्षेत्रों के सैकड़ों पारंपरिक कारीगरों को अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर बाजार मूल्य (Market Value) मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) मजबूत होगी।
  • बौद्धिक संपदा का विधिक ढांचा: यह भारत के भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 (GI Act 1999) के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करता है.
  • झारखंड के अन्य जीआई उत्पाद (Other GI products of Jharkhand): यह राज्य का तीसरा बड़ा गौरव है। इससे पहले झारखंड की प्रसिद्ध सोहराय-खोवर चित्रकला (राज्य का पहला जीआई उत्पाद) और कोडरमा के केसरिया कलाकंद को यह विशिष्ट पहचान मिल चुकी है. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: मांदर को GI Tag कब मिला?

उत्तर: भारत सरकार की भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, चेन्नई द्वारा 29 सितंबर 2026 को मांदर को आधिकारिक तौर पर जीआई टैग प्रदान किया गया.

प्रश्न 2: Mandar GI Tag क्या है?

उत्तर: यह झारखंड के पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र मांदर (Jharkhand traditional instrument) की अनूठी भौगोलिक उत्पत्ति, शिल्प कौशल और ध्वनि गुणवत्ता को मिला एक विधिक अधिकार है.

प्रश्न 3: मांदर किस राज्य का traditional instrument है?

उत्तर: मांदर मुख्य रूप से झारखंड राज्य का सबसे प्रमुख और पवित्र जनजातीय लोक वाद्य यंत्र (tribal musical instrument) है. 

प्रश्न 4: मांदर वाद्ययंत्र की खासियत क्या है?

उत्तर: इसकी मुख्य खासियत  इसकी गहरी और खनकदार गूंज है, जो ढोल-नगाड़ों से भिन्न होती है और आदिवासियों के सामुदायिक नृत्य का आधार है.

प्रश्न 5: Mandar कैसे बनाया जाता है?

उत्तर: मांदर का मुख्य ढांचा स्थानीय लाल मिट्टी से बनाया जाता है, जिसके दोनों असमान छोरों को सुखाकर चमड़े की रस्सियों से कसा जाता है.

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