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स्वदेशी Kaveri Aero Engine कार्यक्रम: परिचय, तकनीक, विशेषताएं एवं सफल परीक्षण

स्वदेशी Kaveri Aero Engine कार्यक्रम: परिचय, तकनीक, विशेषताएं एवं सफल परीक्षण

Kaveri Aero Engine

संदर्भ:

हाल ही में सितंबर 2026 में रक्षा क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक बड़ी छलांग लगाई। भारत द्वारा विकसित कावेरी एरो-इंजन (Kaveri aero engine) के ‘ड्राई’ वेरिएंट ने रूस में अपने सभी कड़े हाई-एल्टीट्यूड और फ्लाइट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए।

स्वदेशी कावेरी एरो-इंजन कार्यक्रम क्या है?

  • परिचय: कावेरी एरो-इंजन कार्यक्रम के तहत भारत के द्वारा भारत का पहला पूर्णतः स्वदेशी गैस टरबाइन सैन्य जेट कावेरी इंजन (Kaveri engine) विकसित किया जा रहा है।
  • उद्देश्य: इसे मूल रूप से हल्के लड़ाकू विमान (LCA) ‘तेजाब’ को शक्ति प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था।
    • हालांकि, लड़ाकू विमानों के लिए थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात की कुछ तकनीकी सीमाओं के कारण, वैज्ञानिकों ने इसके ‘आफ्टरबर्नर’ हिस्से को हटाकर एक शक्तिशाली ‘कावेरी ड्राई इंजन’ (Kaveri Dry Engine) के रूप में विकसित किया।
  • शुरुआत: कावेरी इंजन कार्यक्रम (Kaveri engine programme) की आधिकारिक शुरुआत वर्ष 1989 में की गई थी।
  • निर्माणकर्ता संस्थान: इसे मुख्य रूप से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की बेंगलुरु स्थित प्रयोगशाला गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (Gas Turbine Research Establishment – GTRE) द्वारा विकसित किया जा रहा है।
  • उत्पादन सहयोगी: उड़ान प्रमाणन के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा।
  • बजट: शुरुआत में इस महत्वाकांक्षी स्वदेशी जेट इंजन प्रौद्योगिकी (indigenous jet engine technology) परियोजना को ₹382.81 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया।
    • अब इसके आगामी उन्नत संस्करण ‘कावेरी 2.0’ के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा अतिरिक्त सीड फंड (Seed Money) जारी किया जा चुका है।
  • समय सीमा: भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय (MoD) ने इस स्वदेशी एयरो इंजन (indigenous aero engine India) के अंतिम प्रमाणीकरण (Certification) के लिए वर्ष 2026 की समय सीमा निर्धारित की है। 
  • विशेषताएं:
    • लो-बायपास टर्बोफैन तकनीक (Low-Bypass Turbofans): यह एक दो-स्पूल, लो-बायपास टर्बोफैन इंजन है, जो ईंधन की कम खपत के साथ स्थिर शक्ति सुनिश्चित करता है।
    • इंजन वेरिएंट: वर्तमान में इसका ड्राई वेरिएंट सफल रहा है, जो बिना आफ्टरबर्नर (Non-afterburning variant) के काम करता है। इसके साथ ही ‘कावेरी 2.0’ (Kaveri 2.0) पर भी काम चल रहा है, जो आफ्टरबर्नर के साथ लड़ाकू विमानों के काम आएगा। 
    • मजबूत सामग्री: इसका निर्माण उन्नत निकल-आधारित सुपरअलॉय और कार्बन-फाइबर कंपोजिट सामग्री से किया गया है, जो उच्च तापमान और अत्यधिक दबाव को सहन कर सकती हैं।
  • सफल सत्यापन:
    • इसके ‘ड्राई’ वेरिएंट ने रूस में अपने सभी कड़े हाई-एल्टीट्यूड और फ्लाइट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए।
    • यह परीक्षण रूस के दो विख्यात संस्थानों—सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन मोटर्स (CIAM) और ग्रोमोव फ्लाइट रिसर्च इंस्टीट्यूट में किए गए।
    • रूसी वैज्ञानिकों ने एक संशोधित इल्यूशिन Il-76 (Ilyushin Il-76) विमान के चार मूल इंजनों में से एक को हटाकर, वहां भारत का कावेरी ड्राई इंजन लगाया और हवा में इसका जटिल फ्लाइट ट्रायल किया।
    • इस परीक्षण के दौरान कावेरी ड्राई इंजन ने अपने निर्धारित 46 किलोन्यूटन (kN) के लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए 48.5 किलोन्यूटन (kN) का पीक थ्रस्ट सफलतापूर्वक हासिल किया। यह प्रदर्शन रूसी एविएशन एक्सपर्ट्स के लिए भी बेहद चौंकाने वाला रहा।
  • भावी चरण: अब सेमिलैक (CEMILAC – Centre for Military Airworthiness and Certification) द्वारा सभी परीक्षण डेटा की गहन समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद इसे आधिकारिक तौर पर एयरवर्थनेस क्लीयरेंस (Airworthiness Clearance) प्रदान किया जाएगा। 

भारत के लिए इस कार्यक्रम का महत्व:

  • ‘घातक’ स्टील्थ ड्रोन का मुख्य पावरहाउस (Powering Ghatak Stealth UCAV): इस सफल ड्राई इंजन का उपयोग सीधे तौर पर भारत के आगामी मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहन (UCAV) ‘घातक’ (Ghatak stealth UCAV) में किया जाएगा। यह भारत के गुप्त और अत्याधुनिक ड्रोन बेड़े को स्वतंत्र रूप से आकाश में संचालित होने की क्षमता देगा।
  • विदेशी निर्भरता का अंत: दुनिया में जेट इंजन बनाने की तकनीक मुट्ठी भर देशों (अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन) के पास ही सुरक्षित है। इस सफल परीक्षण के बाद भारत इस विशिष्ट क्लब में शामिल होने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा चुका है, जिससे युद्ध काल में इंजन और कलपुर्जों के लिए विदेशी प्रतिबंधों का कोई खतरा नहीं रहेगा।
  • फाइटर जेट इंजन के लिए मजबूत आधार (Base for Indian Fighter Jet Engine): कावेरी ड्राई इंजन की सफलता से प्राप्त डेटा का सीधा लाभ भारत के भावी लड़ाकू विमान इंजनों (जैसे AMCA और तेजाब Mk2 के लिए GE-F414 के बाद आगामी पूर्णतः स्वदेशी इंजन) के निर्माण में मिलेगा।
  • आर्थिक बचत (Economic Efficiency): रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति मिलने से देश को अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: कावेरी Aero Engine क्या है?

उत्तर: यह भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी गैस टरबाइन एरो-इंजन है, जिसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए सैन्य विमानों हेतु डिजाइन किया गया है।

प्रश्न 2: Kaveri engine किसने विकसित किया है?

उत्तर: इस अत्याधुनिक इंजन को DRDO की गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (GTRE) प्रयोगशाला द्वारा भारतीय विमानन उद्योग के सहयोग से विकसित किया गया है।

प्रश्न 3: Kaveri engine का use कहाँ होगा?

उत्तर: इसके वर्तमान 48.5 kN क्षमता वाले ड्राई वेरिएंट का उपयोग मुख्य रूप से भारत के आगामी ‘घातक’ स्टील्थ मानवरहित लड़ाकू ड्रोन (Stealth UCAV) में किया जाएगा।

प्रश्न 4: कावेरी इंजन की मुख्य features क्या हैं?

उत्तर: यह बिना आफ्टरबर्नर के चलने वाला लो-बायपास टर्बोफैन इंजन है, जो बेहद उच्च तापमान सहन करने, कम ईंधन खपत और उप-नैनोसेकंड नियंत्रण प्रणालियों से लैस है।

प्रश्न 5: Kaveri engine की technology क्या है?

उत्तर: यह उच्च दबाव अनुपात वाले कम्प्रेशर्स, उन्नत सिंगल-क्रिस्टल टरबाइन ब्लेड्स और निकल आधारित सुपरअलॉय जैसी आधुनिक स्वदेशी जेट इंजन तकनीक पर आधारित है।

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