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Academic Freedom Index 2026 रिपोर्ट जारी, भारत में शैक्षणिक स्वतंत्रता ‘गंभीर रूप से प्रतिबंधित’

Academic Freedom Index 2026 रिपोर्ट जारी, भारत में शैक्षणिक स्वतंत्रता ‘गंभीर रूप से प्रतिबंधित’

Academic Freedom Index 2026

संदर्भ:

हाल ही में ‘स्कॉलर्स एट रिस्क’ (Scholars at Risk – SAR) द्वारा वैश्विक स्तर पर जारी ‘फ्री टू थिंक 2026’ (Free to Think 2026) रिपोर्ट के अंतर्गत शैक्षणिक स्वतंत्रता सूचकांक 2026 (Academic Freedom Index 2026) में भारत को ‘गंभीर रूप से प्रतिबंधित’ (Severely Restricted) श्रेणी में रखा गया है।

शैक्षणिक स्वतंत्रता सूचकांक 2026 के मुख्य बिंदु:

अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क द्वारा 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 की अवधि में किए गए इस व्यापक वैश्विक अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

  • भारत की स्थिति:
    • स्कोर में भारी गिरावट: भारत का शैक्षणिक स्वतंत्रता सूचकांक (AFI) स्कोर जो वर्ष 2015 में 0.41 और 2022 में 0.38 था, वह अब वर्ष 2026 में घटकर 0.14 के न्यूनतम ऐतिहासिक स्तर पर आ गया है। 
    • वर्गीकरण: भारत को सूचकांक की ‘गंभीर रूप से प्रतिबंधित’ (Severely Restricted) श्रेणी में शामिल किया गया है। 
    • गिरावट के मुख्य कारण:
      • संस्थागत नियंत्रण: उच्च शिक्षा (Higher Education India 2026) पर केंद्र सरकार का बढ़ता प्रभाव, जिसके कारण कुलपतियों और प्रशासनिक नेतृत्व की नियुक्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ा है।
      • असहमति का दमन: विश्वविद्यालयों के परिसरों में छात्र विरोध प्रदर्शनों, रचनात्मक अभिव्यक्तियों और आलोचनात्मक विमर्शों पर बढ़ती पाबंदियाँ।
      • संकाय सदस्यों पर कार्रवाई: सरकार की नीतियों या पाठ्यक्रम में बदलावों पर असहमति जताने वाले प्राध्यापकों व शोधकर्ताओं (Faculty Members) के निलंबन और शैक्षणिक कार्यक्रमों को निरस्त करने की बढ़ती घटनाएं। 
  • वैश्विक रुझान:
    • वैश्विक गिरावट: रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में विश्लेषित 179 देशों में से 50 देशों में शैक्षणिक स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है, जबकि केवल 9 देशों में सुधार हुआ है।
    • विकसित देशों की स्थिति: संयुक्त राज्य अमेरिका (US) जैसे परिपक्व लोकतंत्रों में भी संस्थागत स्वायत्तता सूचकांक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
  • कैटेगरी आधारित वैश्विक वर्गीकरण:
    • गंभीर रूप से प्रतिबंधित (Severely Restricted): इस श्रेणी में भारत के साथ हांगकांग, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, वेस्ट बैंक और यूक्रेन शामिल हैं।
    • पूर्ण रूप से प्रतिबंधित (Completely Restricted): रिपोर्ट की सबसे निचली श्रेणी में अगानिस्तान, चीन, ईरान, रूस, तुर्की, सीरिया, वेनेजुएला, जिम्बाब्वे और गाजा को रखा गया है।
  • भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति: चीन (0.07 स्कोर) और अफगानिस्तान (0.09 स्कोर) की स्थिति भारत (0.14 स्कोर) से अधिक खराब है, और ये देश ‘पूर्ण रूप से प्रतिबंधित’ श्रेणी में हैं। 
  • पाकिस्तान को भारत के साथ ही ‘गंभीर रूप से प्रतिबंधित’ श्रेणी में रखा गया है, जबकि नेपाल और भूटान जैसे कुछ छोटे पड़ोसी देशों ने दक्षिण एशियाई क्षेत्र में बेहतर तुलनात्मक स्कोर प्रदर्शित किया है।

Academic Freedom Index क्या हैं?

  • परिचय: शैक्षणिक स्वतंत्रता सूचकांक (AFI) एक वैश्विक स्तर का गुणात्मक और सांख्यिकीय उपकरण है। इसके द्वारा यह मापा जाता है कि विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान, अध्यापन और ज्ञान के प्रसार को बिना किसी बाहरी, सरकारी या राजनीतिक हस्तक्षेप के कितनी स्वतंत्रता प्राप्त है। 
  • जारीकर्ता संस्था: यह सूचकांक वैश्विक स्तर पर ‘स्कॉलर्स एट रिस्क’ (Scholars at Risk – SAR) नेटवर्क के ‘अकादमिक स्वतंत्रता निगरानी परियोजना’ (Academic Freedom Monitoring Project) और वी-डेम इंस्टीट्यूट (V-Dem Institute) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाता है।
    • फ्री टू थिंक रिपोर्ट (Free to Think 2026); ‘स्कॉलर्स एट रिस्क’ प्रतिवर्ष अपनी व्यापक वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है जो अकादमिक समुदायों पर होने वाले हमलों का दस्तावेजीकरण करती है। 
  • मुख्य पैरामीटर: यह सूचकांक मुख्य रूप से निम्नलिखित पाँच प्रमुख संकेतकों (Parameters) के आधार पर प्रत्येक देश का मूल्यांकन करता है: 
  1. शोध और अध्यापन की स्वतंत्रता (Freedom to Research and Teach): शिक्षकों और विद्वानों को अपनी पसंद के विषयों पर शोध करने और बिना सेंसरशिप के पढ़ाने की स्वतंत्रता।
  2. संस्थागत स्वायत्तता (Institutional Autonomy): विश्वविद्यालयों को अपने आंतरिक प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और नियुक्तियों को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की विधिक शक्ति।
  3. अकादमिक आदान-प्रदान और प्रसार (Academic Exchange and Dissemination): राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक सम्मेलनों, प्रकाशनों और विचारों के आदान-प्रदान की स्वतंत्रता।
  4. परिसर की अखंडता (Campus Integrity): शैक्षणिक परिसरों (Campuses) का बाहरी सुरक्षा बलों की घुसपैठ, निगरानी प्रणालियों और राजनीतिक दमन से मुक्त होना।
  5. अकादमिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति (Academic and Cultural Expression): विश्वविद्यालय समुदाय को राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर अपनी सांस्कृतिक व बौद्धिक राय स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने का अधिकार।
  • पैमाना: सूचकांक में देशों को 0 से 1 के पैमाने पर स्कोर दिया जाता है।
    • ‘1’ का अर्थ पूर्ण शैक्षणिक स्वतंत्रता (Fully Free) और ‘0’ का अर्थ पूर्ण असमानता या पूर्ण प्रतिबंध (Completely Restricted) होता है।
    • इस स्कोर के आधार पर दुनिया भर के 179 देशों को पाँच अलग-अलग श्रेणियों (पूर्ण स्वतंत्र से लेकर पूर्ण प्रतिबंधित तक) में रैंक किया जाता है। 
  • महत्व:
    • सतत विकास लक्ष्य (SDG): यह सूचकांक SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG 16 (शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं) की प्राप्ति में भारत की बाधाओं का विश्लेषण करने में मदद करता है।
    • नीतिगत प्रासंगिकता: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों पर उत्कृष्ट बनाने का लक्ष्य है। परंतु, इस वैश्विक रिपोर्ट में भारत की गिरती रैंकिंग अकादमिक स्वायत्तता (University Freedom India) के समक्ष प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: शैक्षणिक स्वतंत्रता सूचकांक 2026 क्या है?

उत्तर: यह एक वैश्विक सूचकांक (Academic Freedom Index 2026) है जो दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में बिना सरकारी हस्तक्षेप के शोध, अध्यापन और अभिव्यक्ति की आजादी का मूल्यांकन करता है।

प्रश्न 2: भारत की स्थिति को रिपोर्ट में कैसे वर्गीकृत किया गया है?

उत्तर: सूचकांक में भारत को 0.14 स्कोर के साथ ‘गंभीर रूप से प्रतिबंधित’ (Severely Restricted) शैक्षणिक स्वतंत्रता वाले देशों की सूची में वर्गीकृत किया गया है। 

प्रश्न 3: भारत को गंभीर रूप से प्रतिबंधित श्रेणी में क्यों रखा गया है?

उत्तर: उच्च शिक्षा संस्थानों (Higher Education Freedom India) के प्रशासनिक निर्णयों में केंद्र सरकार के बढ़ते दखल, छात्रों की अभिव्यक्ति पर रोक और प्राध्यापकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाइयों के कारण भारत को इस श्रेणी में रखा गया है।

प्रश्न 4: ‘फ्री टू थिंक 2026’ रिपोर्ट किस संगठन ने जारी की है?

उत्तर: यह वार्षिक रिपोर्ट अमेरिका स्थित एक स्वतंत्र, गैर-लाभकारी अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क ‘स्कॉलर्स एट रिस्क’ (Scholars at Risk – SAR) द्वारा जारी की गई है।

प्रश्न 5: अकादमिक स्वतंत्रता रिपोर्ट में किन कारकों का परीक्षण किया जाता है?

उत्तर: इसमें शोध व शिक्षण की स्वतंत्रता, विश्वविद्यालयों की संस्थागत स्वायत्तता, अकादमिक आदान-प्रदान, कैंपस अखंडता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति जैसे पाँच आयामों का परीक्षण किया जाता है।

प्रश्न 6: उच्च शिक्षा स्वतंत्रता से जुड़े किन मुद्दों को रिपोर्ट में प्रलेखित किया गया है?

उत्तर: रिपोर्ट में संकाय सदस्यों की बर्खास्तगी, शैक्षणिक कार्यक्रमों का रद्दीकरण, छात्र असंतोष का दमन और नियामक संस्थाओं के माध्यम से विश्वविद्यालयों पर बढ़ते प्रशासनिक नियंत्रण को प्रलेखित किया गया है।

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