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CEC Removal Process India- मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया, क्या हैं संवैधानिक प्रावधान?

CEC Removal Process India- मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया, क्या हैं संवैधानिक प्रावधान?

CEC Removal Process India

संदर्भ:

हाल ही में विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner – CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग को लेकर संसद के दोनों सदनों में एक नया प्रस्ताव नोटिस (Removal Motion Notice) लाने की घोषणा की। 

CEC Removal Process in India

भारतीय संविधान के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना (Chief Election Commissioner Removal) एक अत्यंत जटिल और बहुस्तरीय कानूनी प्रक्रिया है। 

  • संवैधानिक आधार: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324(5) मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC Removal Constitution) को एक विशेष संवैधानिक सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
    • इस अनुच्छेद के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश (Supreme Court Judge) को हटाया जाता है।
    • पद ग्रहण करने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त की सेवा शर्तों, कार्यकाल और वेतन-भत्तों में उनके लिए कोई भी अलाभकारी परिवर्तन (Disadvantageous Alterations) नहीं किया जा सकता।
  • संविधान का मूल ढांचा: भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव’ हमारे संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का एक अविभाज्य अंग हैं। हटाने की यह कठिन प्रक्रिया चुनाव आयोग को कार्यपालिका के राजनीतिक दबाव से पूरी तरह स्वतंत्र रखती है।
  • हटाने के वैधानिक आधार: संविधान के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner India) को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए केवल दो विशिष्ट और प्रमाणित वैधानिक आधार निर्धारित हैं:
  • साबित कदाचार (Proved Misbehaviour): भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग साबित होना।
  • अक्षमता (Incapacity): शारीरिक या मानसिक रूप से अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ होना।
  • संसदीय महाभियोग प्रक्रिया: मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया (CEC Removal Parliament Process) को पूर्ण करने के लिए संसद में ‘न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968’ [Judges (Inquiry) Act, 1968] के तहत निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है:
  • चरण 1: प्रस्ताव नोटिस पेश करना (Introduction of Motion):
    • यदि प्रस्ताव लोकसभा में लाना हो, तो कम से कम 100 सदस्यों के लिखित हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
    • यदि प्रस्ताव राज्यसभा में लाना हो, तो कम से कम 50 सदस्यों के लिखित हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।
  • चरण 2: अध्यक्ष/सभापति का निर्णय: सदन के पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष या सभापति) के पास यह विवेकाधीन शक्ति होती है कि वे इस प्रस्ताव को स्वीकार करें या अस्वीकार कर दें।
  • चरण 3: तीन-सदस्यीय जांच समिति का गठन: प्रस्ताव स्वीकार होने पर, आरोपों की गहन जांच के लिए एक स्वतंत्र तीन-सदस्यीय समिति बनाई जाती है। इसमें शामिल होते हैं:
    • उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का एक कार्यरत न्यायाधीश।
    • किसी उच्च न्यायालय (High Court) का एक मुख्य न्यायाधीश।
    • राष्ट्रपति की नजर में एक प्रतिष्ठित न्यायविद् (Distinguished Jurist)।
  • चरण 4: विशेष बहुमत द्वारा पारित होना (Voting with Special Majority): यदि समिति अपनी रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त को दोषी पाती है, तो संसद के दोनों सदनों (CEC Removal Parliament) में इस पर अलग-अलग चर्चा और मतदान होता है। इसे पास करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है:
    • सदन की कुल सदस्यता का बहुमत (यानी कुल सीटों के 50% से अधिक का समर्थन), तथा
    • उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई (2/3rd) बहुमत।
  • चरण 5: राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति: संसद के एक ही सत्र में दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित होने के बाद, प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। इसके बाद ही राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को पदमुक्त करने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं।

अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के भिन्न नियम:

  • असमान सुरक्षा: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों (ECs) की सेवा सुरक्षा में एक बड़ा संवैधानिक अंतर है।
  • सीधी सिफारिश: अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए संसद की मंजूरी या महाभियोग जैसी प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती।
    • संविधान के अनुसार, उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की लिखित सिफारिश पर ही राष्ट्रपति द्वारा सीधे पद से हटाया जा सकता है।
  • ऐतिहासिक न्यायिक हस्तक्षेप: ‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2023)‘ मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को मजबूत करने के लिए एक बहु-सदस्यीय चयन समिति (प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश) की आवश्यकता पर बल दिया था, जिसे बाद में संसद द्वारा अधिनियमित नए विधिक ढांचे (मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम) द्वारा संशोधित किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Chief Election Commissioner को हटाने की constitutional process क्या है?

उत्तर: सीईसी को हटाने की प्रक्रिया (CEC Impeachment Procedure) सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान है, जिसमें संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है।

प्रश्न 2: क्या President CEC को सीधे remove कर सकते हैं?

उत्तर: नहीं, राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को सीधे अपनी इच्छा से नहीं हटा सकते। वे केवल संसद द्वारा विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित कर भेजे जाने के बाद ही आदेश जारी करते हैं।

प्रश्न 3: Article 324 in CEC removal को लेकर क्या provision है?

उत्तर: अनुच्छेद 324(5) (Article 324 CEC Removal) यह प्रावधान करता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल साबित कदाचार या अक्षमता के आधार पर, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की रीति से ही हटाया जाएगा।

प्रश्न 4: CEC को हटाने के लिए Parliament की क्या भूमिका होती है?

उत्तर: संसद में प्रस्ताव (लोकसभा में 100, राज्यसभा में 50 सदस्यों द्वारा) लाया जाता है, जांच समिति गठित होती है, और दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3rd) विशेष बहुमत से इसे पास करना होता है।

प्रश्न 5: क्या CEC removal process Supreme Court Judge जैसी होती है?

उत्तर: हां, भारतीय संविधान के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner Constitution) को हटाने की विधिक, न्यायिक और संसदीय प्रक्रिया पूर्णतः सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान ही सुरक्षित रखी गई है।

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