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Mahatma Gandhi 157th Birth Anniversary, जानिए भारत के राष्ट्रपिता का जीवन परिचय, योगदान एवं महत्वपूर्ण तथ्य

Mahatma Gandhi 157th Birth Anniversary, जानिए भारत के राष्ट्रपिता का जीवन परिचय, योगदान एवं महत्वपूर्ण तथ्य

Mahatma Gandhi 157th Birth Anniversary

संदर्भ:

आज 2 अक्टूबर 2026 को भारत और वैश्विक समुदाय द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती (Mahatma Gandhi 157th Birth Anniversary) मनाई जा रही है। इस पावन दिन को संपूर्ण भारतवर्ष गांधी जयंती 2026 (Gandhi Jayanti 2026) के रूप में मना रहा है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ (International Day of Non-Violence) के रूप में याद किया जाता है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में:

  • जन्म एवं जन्मस्थान (Birth and Early Life): मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के तटीय शहर पोरबंदर में हुआ था।
    • उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर के दीवान थे और माता पुतलीबाई एक अत्यंत धार्मिक महिला थीं।
  • शिक्षा और कानूनी करियर: उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में हुई। वर्ष 1888 में वे कानून (Law) की पढ़ाई करने लंदन गए और 1891 में बैरिस्टर बनकर भारत लौटे।
  • दक्षिण अफ्रीका प्रस्थान: वर्ष 1893 में वे एक कानूनी मुकदमे के सिलसिले में दादा अब्दुल्ला एंड कंपनी के आमंत्रण पर दक्षिण अफ्रीका गए। वहाँ उन्होंने नस्लीय भेदभाव (Racial Discrimination) का सामना किया, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
  • सत्याग्रह और अहिंसा (Satyagraha and Non-Violence): उन्होंने अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध और सत्य के आग्रह को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया।
  • प्रमुख संस्थान: उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय कानूनों के खिलाफ लड़ने के लिए नटाल भारतीय कांग्रेस (1894) की स्थापना की। इसके साथ ही उन्होंने फीनिक्स सेटलमेंट (1904) और टॉलस्टॉय फार्म (1910) जैसे आश्रमों की स्थापना की।
  • अखबार: उन्होंने सामाजिक जागरूकता के लिए वहाँ ‘इंडियन ओपिनियन’ (Indian Opinion) नामक समाचार पत्र का संपादन किया।
  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान: वर्ष 9 जनवरी 1915 को गांधी जी भारत वापस लौटे (इस दिन को अब प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाया जाता है)। भारत आने के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर पूरे देश का भ्रमण किया। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में Freedom Movement में उनका योगदान मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित है:
  • चंपारण सत्याग्रह (1917): बिहार के चंपारण में तिनकठिया प्रणाली (नील की खेती) के खिलाफ भारत में गांधी जी का यह पहला सफल सत्याग्रह था।
  • अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918): प्लेग बोनस को लेकर मिल मालिकों और मजदूरों के विवाद में गांधी जी ने भारत में अपनी पहली भूख हड़ताल की।
  • खेड़ा सत्याग्रह (1918): फसल नष्ट होने के बावजूद कर वसूली के खिलाफ गुजरात के खेड़ा में किसानों के समर्थन में उन्होंने पहला पूर्ण असहयोग आंदोलन चलाया।
  • असहयोग आंदोलन (1920-22): रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में शुरू किया गया पहला बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन था। चौरी-चौरा की हिंसक घटना (फरवरी 1922) के बाद गांधी जी ने इसे वापस ले लिया, जो अहिंसा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
    • रॉलेट एक्ट (1919) एक दमनकारी कानून था जिसके तहत ब्रिटिश सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए दो साल तक जेल में रख सकती थी। 
    • जलियांवाला बाग हत्याकांड इसी कानून के विरोध तथा दो नेताओं की गिरफ्तारी के सिलसिले में 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ नरसंहार था।
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34): इसकी शुरुआत 12 मार्च 1930 को ऐतिहासिक दांडी मार्च से हुई, जहाँ गांधी जी ने नमक कानून तोड़कर ब्रिटिश एकाधिकार को चुनौती दी। इसके बाद 1931 में ‘गांधी-इरविन समझौता’ हुआ।
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942): द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद गांधी जी ने “करो या मरो” (Do or Die) का ऐतिहासिक नारा दिया, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी।

गांधीवादी दर्शन और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य:

  • ट्रस्टीशिप का सिद्धांत (Theory of Trusteeship): धन संचय के खिलाफ गांधी जी का मानना था कि अमीरों के पास मौजूद संपत्ति वास्तव में पूरे समाज की थाती है और वे केवल इसके ट्रस्टी (संरक्षक) हैं।
  • सर्वोदय और अंत्योदय: सर्वोदय का अर्थ है ‘सभी का उदय’ और अंत्योदय का अर्थ है ‘समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण’। यह विचार उन्होंने जॉन रस्किन की पुस्तक ‘अनटू दिस लास्ट’ से लिया था।
  • रचनात्मक कार्य: उन्होंने खादी को बढ़ावा देने, अस्पृश्यता उन्मूलन (Anti-Untouchability), और ‘नई तालीम’ (बुनियादी शिक्षा) के माध्यम से ग्रामीण आत्मनिर्भरता पर बल दिया। उन्होंने दलितों को ‘हरिजन’ (ईश्वर की संतान) नाम दिया।
गांधी जी से जुड़ी महत्वपूर्ण पुस्तकें/पत्रिकाएंमहत्वपूर्ण संगठन/आश्रम
हिन्द स्वराज (1909 – मौलिक दर्शन)साबरमती आश्रम, अहमदाबाद (1917)
सत्य के साथ मेरे प्रयोग (My Experiments with Truth – आत्मकथा)अखिल भारतीय हरिजन सेवक संघ (1932)
हरिजन, नवजीवन, यंग इंडिया (प्रमुख पत्रिकाएं)वर्धा आश्रम / सेवाग्राम, महाराष्ट्र (1936)

महात्मा गांधी की विरासत:

उनकी मृत्यु 30 जनवरी 1948 को हुई (जिसे शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है), लेकिन उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं:

  • वैश्विक प्रभाव: मार्टिन लूथर किंग जूनियर (अमेरिका) और नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका) जैसे महान वैश्विक नेताओं ने नागरिक अधिकारों की लड़ाई के लिए गांधीवादी सत्याग्रह को ही अपना मुख्य हथियार बनाया।
  • सतत विकास (Sustainable Development): गांधी जी का प्रसिद्ध कथन—“प्रकृति के पास हर मनुष्य की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन किसी के लालच के लिए नहीं“—आज के वैश्विक जलवायु संकट और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का मूल आधार है।
    • मोहनदास करमचंद गांधी को ‘महात्मा’ की उपाधि रवींद्रनाथ टैगोर ने (चंपारण के बाद) और ‘राष्ट्रपिता’ (Father of the Nation) की उपाधि सुभाष चंद्र बोस ने 1944 में दी थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Mahatma Gandhi 157th Birth Anniversary क्या है?

उत्तर: 2 अक्टूबर 2026 को भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्म तिथि के 156 वर्ष पूरे होने पर देश-विदेश में उनकी 157वीं जयंती मनाई जा रही है।

प्रश्न 2: गांधी जी को ‘महात्मा’ और ‘राष्ट्रपिता’ की उपाधि किसने दी थी?

उत्तर: मोहनदास करमचंद गांधी को ‘महात्मा’ की उपाधि रवींद्रनाथ टैगोर ने (चंपारण के बाद) और ‘राष्ट्रपिता’ (Father of the Nation) की उपाधि सुभाष चंद्र बोस ने 1944 में दी थी।

प्रश्न 3: गांधी जी का पहला राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह आंदोलन कौन सा था?

उत्तर: भारत में उनका पहला राष्ट्रव्यापी आंदोलन वर्ष 1919 में ब्रिटिश सरकार के दमनकारी रॉलेट एक्ट के खिलाफ आयोजित किया गया सत्याग्रह था।

प्रश्न 4: गांधी जी ने किस एकमात्र कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी?

उत्तर: महात्मा गांधी ने वर्ष 1924 में बेलगाम (कर्नाटक) में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 39वें वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।

प्रश्न 5: अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

उत्तर: संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा गांधी जी के अहिंसा के संदेश को वैश्विक सम्मान देने के लिए प्रतिवर्ष उनके जन्मदिन 2 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाता है।

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