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WWF Living Planet Report 2026 जारी, पिछले 50 सालों में जंगली जीवों की संख्या में 73% गिरावट

WWF Living Planet Report 2026 जारी, पिछले 50 सालों में जंगली जीवों की संख्या में 73% गिरावट

WWF Living Planet Report 2026

संदर्भ:

हाल ही में वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (World Wide Fund for Nature – WWF) और जूलॉजिकल सोसायटी ऑफ लंदन (Zoological Society of London – ZSL) ने संयुक्त रूप से “द साइंस ऑफ होप” (The Science of Hope) शीर्षक से अपनी द्विवार्षिक लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 (Living Planet Report 2026) जारी की.

WWF लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 के मुख्य बिंदु:

  • वन्यजीवों की आबादी में गिरावट (Wildlife Decline in 50 Years): रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1970 से 2022 के बीच (लगभग 52 वर्षों की निगरानी अवधि में) वैश्विक स्तर पर कशेरुकी जीवों (Vertebrates) की आबादी के आकार में औसतन 73.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
  • डेटा का दायरा: इस वर्ष के लिविंग प्लैनेट इंडेक्स 2026 (Living Planet Index 2026) का दायरा पहले से अधिक व्यापक है। इसमें दुनिया भर की 5,495 प्रजातियों की लगभग 35,803 विशिष्ट आबादी (Populations) के रुझानों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है।
    • यह सूचकांक कशेरुकी जीवों की सापेक्ष आबादी की प्रचुरता (Relative Population Abundance) को मापता है। 
    • इसका अर्थ यह नहीं है कि पृथ्वी से 73% प्रजातियां पूरी तरह विलुप्त हो चुकी हैं, बल्कि यह केवल निगरानी की जा रही आबादी के औसत आकार में आई कमी को दर्शाता है। 
    • इंडेक्स में शामिल लगभग 50% वन्यजीव आबादी स्थिर या बढ़ती हुई पाई गई है, लेकिन दूसरी तरफ की गंभीर गिरावट ने इस औसत को बहुत नीचे ला दिया है। 
  • पारिस्थितिकी तंत्र-विशिष्ट गिरावट:
    • मीठे पानी का पारिस्थितिकी तंत्र (Freshwater Ecosystems): इस पारिस्थितिकी तंत्र ने सबसे तीव्र और विनाशकारी गिरावट का सामना किया है, जहाँ वन्यजीवों की आबादी में औसतन 85% की गिरावट आई है। नदियों पर बांधों का निर्माण, जल निष्कर्षण और अत्यधिक प्रदूषण इसके मुख्य कारण हैं।
    • स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Terrestrial Ecosystems): जंगलों और घास के मैदानों में रहने वाले जीवों की आबादी में औसतन 69% की कमी देखी गई है, जिसका मुख्य कारण वनों की अंधाधुंध कटाई है। 
    • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystems): महासागरों और तटीय क्षेत्रों में कशेरुकी जीवों की संख्या में औसतन 59% की गिरावट दर्ज की गई है, जो कि महासागरीय तापन और प्लास्टिक प्रदूषण का परिणाम है।
  • भौगोलिक और क्षेत्रीय प्रवृत्तियाँ:
    • लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र: यहाँ सबसे गंभीर और चिंताजनक औसतन 95% की गिरावट दर्ज की गई है।
    • अफ़्रीका महाद्वीप: इस क्षेत्र में वन्यजीवों की आबादी में औसतन 76% से 80% तक की कमी देखी गई है।
    • एशिया-प्रशांत क्षेत्र: भारत सहित इस पूरे जैव-विविधता संपन्न क्षेत्र में जंगली जीवों की संख्या में औसतन 49% से 60% के बीच गिरावट दर्ज हुई है।
    • उत्तरी अमेरिका और यूरोप: क्रमशः 28% और 23% की अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक आवासों का विनाश औद्योगिक क्रांति के दौर में पहले ही हो चुका था। 
  • भारत का विशेष संदर्भ: वैश्विक स्तर पर जारी इस गंभीर गिरावट के बीच, भारत ने इस रिपोर्ट में एक सकारात्मक बिंदु प्रस्तुत किया है: 
  • बाघों की आबादी में वृद्धि: अखिल भारतीय बाघ अनुमान (All India Tiger Estimation) के अनुसार भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 3,682 हो गई है।
  • अन्य प्रमुख प्रजातियों का पुनरुद्धार: एक सींग वाले गैंडे (Greater One-horned Rhinoceros) की संख्या 3,300 को पार कर गई है। इसी प्रकार एशियाई शेरों की आबादी 2025 में बढ़कर 891 हो गई है। हिम तेंदुओं (Snow Leopards) की पहली राष्ट्रव्यापी गणना में उनकी संख्या 718 अनुमानित की गई है।
  • जलीय जैव विविधता: गंगा नदी डॉल्फिन (Ganges River Dolphin) के पहले वैज्ञानिक सर्वेक्षण में इसकी आबादी 6,324 दर्ज की गई है, जो संधारणीय संरक्षण पहलों (Wildlife Protection Initiatives) की सफलता को प्रमाणित करती है। 

वन्यजीवों की आबादी में गिरावट के प्रमुख कारण:

वैज्ञानिक विश्लेषणों के अनुसार, यह पारिस्थितिकी संकट मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन बड़े कारकों (जो कुल नुकसान का 67% हिस्सा हैं) और अन्य सहायक कारकों की वजह से उत्पन्न हुआ है:

  • प्राकृतिक आवासों का विनाश और क्षरण (Habitat Destruction and Wildlife): यह वन्यजीवों की आबादी में गिरावट का सबसे बड़ा एकल कारण है (लगभग 30% योगदान)। मनुष्य की खाद्य प्रणालियाँ और विशेष रूप से कृषि का अनियंत्रित विस्तार और वनों की कटाई इसके लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार हैं।
  • अति-दोहन (Overexploitation): अवैध शिकार (Poaching), जंगली जीवों का अवैध व्यापार और अत्यधिक व्यावसायिक मत्स्य पालन इस गिरावट में 23% का योगदान देते हैं।
  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव (Climate Change Impact on Wildlife): बढ़ते वैश्विक तापमान और चरम मौसमी घटनाओं (जैसे दावानल और सूखा) का इस संकट में 14% का सीधा योगदान है। यह प्रजातियों को उनके अनुकूल आवासों से विस्थापित होने पर मजबूर कर रहा है।
  • अन्य सहायक कारक: प्रदूषण (विशेषकर प्लास्टिक और रासायनिक कीटनाशक), आक्रामक विदेशी प्रजातियों (Invasive Species) का प्रसार और संक्रामक बीमारियाँ शेष 33% नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं।

जैव विविधता संरक्षण और आगे की राह

रिपोर्ट “द साइंस ऑफ होप” के माध्यम से वर्ष 2030 तक पर्यावरण तंत्र को बचाने के लिए तीन प्रणालियों में तत्काल सकारात्मक टिपिंग पॉइंट्स (Positive Tipping Points) प्राप्त करने पर बल देती है:

  • ऊर्जा प्रणाली में परिवर्तन (Energy System): यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर तीन-चौथाई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। जीवाश्म ईंधनों से नवीकरणीय ऊर्जा (Renewables) की ओर तेजी से संक्रमण आवश्यक है।
  • खाद्य और कृषि प्रणाली (Food and Agriculture): प्रकृति-सकारात्मक उत्पादन प्रणालियों (Nature-positive Production) को अपनाना, संधारणीय आहार को बढ़ावा देना और खाद्य अपव्यय को कम करना अनिवार्य है।
  • वित्तीय प्रणाली में सुधार (Finance System): पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों के वित्तपोषण को तुरंत रोकना होगा। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर वार्षिक 942 अरब अमेरिकी डॉलर (US$942 Billion) के जैव विविधता वित्तपोषण अंतर को पाटने की आवश्यकता है।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन: सभी देशों को कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे (Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework) के तहत निर्धारित “30×30 लक्ष्य” (2030 तक 30% भूमि और महासागरों का संरक्षण) को पूर्ण राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ लागू करना चाहिए। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: WWF लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 क्या है?

उत्तर: यह WWF और जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (ZSL) द्वारा संयुक्त रूप से प्रत्येक दो वर्ष में जारी की जाने वाली एक प्रमुख वैज्ञानिक रिपोर्ट (WWF Conservation Report) है, जो वैश्विक जैव विविधता प्रवृत्तियों का आकलन करती है।

प्रश्न 2: रिपोर्ट के अनुसार पिछले 50 वर्षों में वन्यजीवों की संख्या में कितनी गिरावट आई है?

उत्तर: इस रिपोर्ट (Living Planet Report 2026) के अनुसार, वर्ष 1970 से 2022 के बीच वैश्विक स्तर पर निगरानी की जा रही कशेरुकी वन्यजीवों की आबादी के आकार में औसतन 73.2% की भारी गिरावट आई है। 

प्रश्न 3: वन्यजीवों की आबादी में गिरावट के प्रमुख कारण क्या हैं?

उत्तर: इसके तीन सबसे बड़े कारण प्राकृतिक आवासों का नुकसान और क्षरण (मुख्यतः कृषि विस्तार के कारण), जीवों का अति-दोहन (अवैध शिकार) और जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव हैं। 

प्रश्न 4: जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

उत्तर: इसके लिए ऊर्जा, खाद्य और वित्तीय प्रणालियों में आमूलचूल बदलाव, जैव विविधता वित्तपोषण के अंतर को पाटने और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ढांचे के वैश्विक लक्ष्यों को समय पर लागू करने की आवश्यकता है।

प्रश्न 5: WWF लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 पर्यावरण संरक्षण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह रिपोर्ट वैश्विक नीति निर्माताओं को पारिस्थितिकी तंत्र के पतन (Ecological Tipping Points) के प्रति आगाह करती है और मानव कल्याण तथा आर्थिक प्रणालियों की सुरक्षा के लिए ठोस साक्ष्य-आधारित समाधान (The Science of Hope) प्रदान करती है।

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