Press Council of India Reconstitution 2026, कुल 13 नए सदस्य हुए मनोनीत
संदर्भ:
हाल ही में केंद्र सरकार ने प्रिंट मीडिया के नियामक शासी निकाय भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India – PCI) का पुनर्गठन किया। Press Council of India Reconstitution 2026 के तहत परिषद में 13 नए सदस्य (13 New Members of PCI) मनोनीत किए गए।
भारतीय प्रेस परिषद (PCI) के बारे में:
- परिचय: भारतीय प्रेस परिषद (PCI) एक सांविधिक (Statutory), स्वायत्त और अर्द्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) निकाय है।
- स्थापना: इसकी स्थापना सर्वप्रथम 1966 में प्रथम प्रेस आयोग की सिफारिशों के आधार पर की गई थी।
- अधिनियम: भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम, 1965 के तहत इसकी स्थापना की गई थी। वर्तमान में यह परिषद प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 (Press Council Act 1978) के तहत संचालित होती है।
- भूमिका: यह भारत में प्रेस की स्वतंत्रता (Press Freedom in India) की रक्षा करने और पत्रकारिता के मानकों (Journalism Standards in India) को बनाए रखने वाली देश की सर्वोच्च संस्था है।
- संरचना और नामांकन प्रक्रिया: प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के अनुसार, परिषद में कुल 28 सदस्य और 1 अध्यक्ष होते हैं:
- अध्यक्ष: पारंपरिक रूप से भारत के सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या कोई प्रतिष्ठित विधिक/साहित्यिक व्यक्तित्व इसके अध्यक्ष होते हैं।
- परिषद की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई करती हैं।
- सदस्यों का वर्गीकरण:
- 13 कार्यशील पत्रकार: (जिसमें 6 समाचार पत्रों के संपादक होने अनिवार्य हैं)।
- 6 समाचार पत्र प्रबंधकों के प्रतिनिधि।
- 1 समाचार एजेंसियों का प्रतिनिधि।
- 3 विशिष्ट ज्ञान वाले व्यक्ति: (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और साहित्य अकादमी द्वारा एक-एक मनोनीत)।
- 5 संसद सदस्य (MPs): (3 लोकसभा अध्यक्ष द्वारा और 2 राज्यसभा के सभापति द्वारा मनोनीत)।
- अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है।
- PCI Reconstitution 2026: सूचना और प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) ने परिषद के कार्यकाल की समाप्ति के बाद इसका पुनर्गठन किया गया।
- परिषद के विभिन्न वर्गों के अंतर्गत 13 नए सदस्यों को मनोनीत किया गया।
- नए मनोनीत सदस्यों में भारतीय पत्रकारिता जगत के वरिष्ठ संपादक, प्रतिष्ठित प्रबंधकीय अधिकारी और भाषाई समाचार पत्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
- इस परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य समकालीन डिजिटल-प्रिंट हाइब्रिड युग में मीडिया नैतिकता और विनियमन (Media Ethics and Regulation) को अधिक प्रासंगिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
- कार्य एवं शक्तियां:
- प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा: यह सुनिश्चित करना कि समाचार पत्रों और एजेंसियों पर कोई बाहरी या अनुचित दबाव न हो।
- आचार संहिता का निर्माण: पत्रकारों और समाचार पत्रों के लिए उच्च व्यावसायिक मानकों और मीडिया नैतिकता (Media Ethics) का निर्धारण करना।
- शिकायतों की सुनवाई (अर्द्ध-न्यायिक शक्ति): यदि कोई समाचार पत्र पत्रकारिता के मानकों का उल्लंघन करता है, तो आम नागरिक इसके खिलाफ पीसीआई में शिकायत कर सकते हैं।
- परिषद को गवाहों को समन करने, शपथ पर साक्ष्य लेने और संबंधित मीडिया संस्थान को ताड़ना (Admonish), चेतावनी (Warn) या भर्त्सना (Censure) करने का अधिकार है।
- विधिक सीमा: ध्यान रहे कि पीसीआई के पास किसी पत्रकार या समाचार पत्र पर जुर्माना लगाने या जेल भेजने की दंडात्मक शक्ति नहीं है। यह मुख्य रूप से नैतिक दबाव और प्रतिष्ठा के माध्यम से नियमन करती है। इसके निर्णय अंतिम होते हैं और उन्हें अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।
- महत्व: प्रिंट मीडिया में बढ़ती फर्जी खबरों (Fake News) पर अंकुश लगाने के लिए पीसीआई के दिशा-निर्देशों को कड़ा करने में यह नई टीम मदद करेगी।
प्रश्न 1: भारतीय प्रेस परिषद क्या है?
उत्तर: यह प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के तहत स्थापित एक सांविधिक और अर्द्ध-न्यायिक निकाय है, जो भारत में प्रिंट मीडिया के नियमन का कार्य करता है।
प्रश्न 2: भारतीय प्रेस परिषद का पुनर्गठन क्यों किया गया है?
उत्तर: परिषद का पुराना कार्यकाल समाप्त होने के बाद, समकालीन प्रिंट मीडिया परिदृश्य में पारदर्शिता, जवाबदेही और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए इसका पुनर्गठन (PCI Reconstitution 2026) किया गया है।
प्रश्न 3: भारतीय प्रेस परिषद में कितने नए सदस्यों को मनोनीत किया गया है?
उत्तर: केंद्र सरकार की हालिया आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, परिषद में विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत 13 नए सदस्यों को मनोनीत (13 New Members of PCI) किया गया है।
प्रश्न 4: भारतीय प्रेस परिषद के प्रमुख कार्य क्या हैं?
उत्तर: इसके प्रमुख कार्य प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना, पत्रकारिता आचार संहिता तय करना और मानकों का उल्लंघन करने वाले समाचार पत्रों के खिलाफ शिकायतों की अर्द्ध-न्यायिक सुनवाई करना है।
प्रश्न 5: भारतीय प्रेस परिषद पत्रकारिता के मानकों को बनाए रखने में कैसे मदद करती है?
उत्तर: यह शिकायतों की जांच कर दोषी मीडिया घरानों की सार्वजनिक भर्त्सना (Censure) करती है और नैतिक मानदंडों (Media Ethics) के माध्यम से स्व-नियमन (Self-Regulation) को बढ़ावा देती है।
