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Sirpur UNESCO World Heritage Tentative List- छत्तीसगढ़ का सिरपुर UNESCO विश्व विरासत की अस्थायी सूची में शामिल

Sirpur UNESCO World Heritage Tentative List- छत्तीसगढ़ का सिरपुर UNESCO विश्व विरासत की अस्थायी सूची में शामिल

Sirpur UNESCO World Heritage Tentative List

संदर्भ:

हाल ही में यूनेस्को विश्व विरासत की अस्थायी सूची में छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पुरातात्विक परिदृश्य सिरपुर (Sirpur UNESCO World Heritage Tentative List) को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया। 

  • पेरिस स्थित यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 20 अक्टूबर 2026 को भारत के तीन नए स्थलों को इस सूची में स्थान मिला, जिनमें से एक सिरपुर है। 
  • यूनेस्को की अस्थायी सूची (Tentative List) उन संपत्तियों/स्थलों की एक सूची होती है, जिन्हें कोई देश भविष्य में पूर्ण विश्व विरासत स्थल (World Heritage Site) के रूप में नामांकित करने के योग्य मानता है।

पुरातात्विक स्थल “सिरपुर” के बारे में:

  • भौगोलिक स्थिति: सिरपुर छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले (Mahasamund District) में स्थित है।
    • यह प्राचीन शहर पवित्र महानदी के पूर्वी तट (Eastern bank of Mahanadi River) पर बसा हुआ है।
    • यह राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 78 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
  • ऐतिहासिक महत्व:
    • दक्षिण कोसल की राजधानी: प्राचीन काल में सिरपुर का नाम ‘श्रीपुर’ (लक्ष्मी का शहर) था और यह दक्षिण कोसल (South Kosala) की राजधानी के रूप में फला-फूला।
    • धार्मिक सद्भाव का केंद्र: यह भारत के चुनिंदा स्थलों में से एक है जहां हिंदू, बौद्ध और जैन संस्कृतियों (Hindu-Buddhist-Jain Syncretic Traditions) का एक ही शहरी ताने-बाने के भीतर एक साथ अस्तित्व देखने को मिलता है।
    • चीनी यात्री का आगमन: 7वीं शताब्दी ईस्वी में प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु और यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) ने सिरपुर की यात्रा की थी और यहाँ के समृद्ध बौद्ध विहारों का अपनी पुस्तक में उल्लेख किया था।
    • कालखंड: यहाँ की पुरातात्विक संरचनाएँ मुख्य रूप से 5वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी ईस्वी (शरभपुरीय और पांडुवंशी राजवंशों के शासनकाल) के बीच की हैं।
  • स्थापत्य कला और प्रमुख प्राचीन मंदिर:
    • लक्ष्मण मंदिर (Sirpur Laxman Temple): यह सिरपुर का सबसे प्रसिद्ध आकर्षण है। यह भारत के सबसे शुरुआती और बेहतरीन बचे हुए ईंटों से बने मंदिरों (Brick Temples) में से एक है। इसका निर्माण लगभग 6वीं-7वीं शताब्दी ईस्वी में पांडुवंशी रानी वासटा द्वारा अपने पति राजा हर्षगुप्त की स्मृति में कराया गया था। यह अपनी उत्कृष्ट नक्काशीदार लाल ईंटों और नागर शैली के गर्भगृह के लिए प्रसिद्ध है।
    • गंधेश्वर महादेव मंदिर: महानदी के तट पर स्थित यह शिव मंदिर अपनी कलात्मक वास्तुकला और प्राचीन पुरातात्विक स्तंभों के लिए जाना जाता है।
    • बौद्ध बौद्ध विहार (Sirpur Buddhist Heritage): पुरातात्विक उत्खनन (Sirpur Archaeological Excavations) में यहाँ ‘आनंद प्रभु कुटी विहार’ और ‘स्वास्तिक विहार’ जैसे बड़े बौद्ध मठों के अवशेष मिले हैं, जहाँ कभी सैकड़ों भिक्षु रहकर अध्ययन करते थे।
    • तीवरदेव महाविहार: बौद्ध भिक्षुओं का एक अन्य विशाल और ऐतिहासिक केंद्र जो अपनी उत्कृष्ट बुद्ध प्रतिमाओं और मूर्तिकला के लिए विख्यात है।
    • बातेश्वर स्मारकों का समूह: इस पुरातात्विक परिदृश्य के केंद्र में स्थित कई छोटे और बड़े प्राचीन मंदिरों का समूह है। 
  • भूवैज्ञानिक महत्व: सिरपुर केवल एक सांस्कृतिक स्थल नहीं है, बल्कि भूवैज्ञानिक रूप से यह छत्तीसगढ़ बेसिन (Chhattisgarh Basin) में स्थित है। इसकी संरचना प्राचीन स्ट्रोमैटोलाइट्स (Stromatolites) (सेंटीमीटर-स्केल की परतदार तलछटी संरचनाएँ जो अरबों वर्ष पूर्व सायनोबैक्टीरिया के जीवाश्म से बनी थीं) के चूना पत्थर समूहों से प्रभावित है।
    • यह एक समृद्ध नदी तटीय व्यापार केंद्र (Riverside Trade Centre) भी था। यहाँ की बहु-धार्मिक कूटनीति और व्यापारिक गतिविधियों ने इसे प्राचीन भारत का एक सांस्कृतिक ‘मेल्टिंग पॉट’ (Melting Pot) बना दिया था।
  • बफर ज़ोन और जनजातीय संस्कृति: इसके आस-पास के बफर क्षेत्र में गोंड (Gond) और बैगा (Baiga) जनजातियाँ निवास करती हैं, जिनकी जीवित लोक संस्कृति यहाँ के प्राचीन स्मारकों को एक अनूठा पूरक आयाम प्रदान करती है।
    • साथ ही इसके समीप बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य (Barnawapara Wildlife Sanctuary) स्थित है।
  • भावी योजना: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा यह एक राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक घोषित है। छत्तीसगढ़ विरासत पर्यटन (Chhattisgarh Heritage Tourism) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार अब इसका विस्तृत डोज़ियर (Dossier) तैयार कर यूनेस्को के पास पूर्ण दर्जे के लिए भेजेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: सिरपुर को UNESCO की World Heritage Tentative List में क्यों शामिल किया गया?

उत्तर: सिरपुर को उसके अद्वितीय हिंदू, बौद्ध और जैन बहु-धार्मिक स्थापत्य कला, प्राचीन ईंट मंदिरों और महानदी तट पर स्थित ऐतिहासिक व्यापारिक परिदृश्य के कारण शामिल किया गया है।

प्रश्न 2: सिरपुर छत्तीसगढ़ के किस जिले में स्थित है?

उत्तर: सिरपुर छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले (Mahasamund District) में महानदी के पूर्वी तट पर स्थित है। 

प्रश्न 3: सिरपुर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व क्या है?

उत्तर: यह प्राचीन दक्षिण कोसल की राजधानी (‘श्रीपुर’) था। यहाँ 5वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी के दौरान धार्मिक सहिष्णुता, व्यापार और बौद्ध-हिंदू-जैन संस्कृतियों का अनूठा समन्वय था। 

प्रश्न 4: सिरपुर में कौन-कौन से प्राचीन मंदिर और पुरातात्विक स्थल हैं?

उत्तर: यहाँ प्रसिद्ध ईंटों से बना लक्ष्मण मंदिर, गंधेश्वर महादेव मंदिर, आनंद प्रभु कुटी बौद्ध विहार, तीवरदेव महाविहार और बातेश्वर स्मारक समूह प्रमुख हैं। 

प्रश्न 5: UNESCO की Tentative List क्या होती है?

उत्तर: यूनेस्को की अस्थायी सूची (Tentative List) उन संपत्तियों/स्थलों की एक सूची होती है, जिन्हें कोई देश भविष्य में पूर्ण विश्व विरासत स्थल (World Heritage Site) के रूप में नामांकित करने के योग्य मानता है।

प्रश्न 6: क्या सिरपुर को UNESCO World Heritage Site का दर्जा मिल गया है?

उत्तर: नहीं, अभी इसे अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल किया गया है। यह पूर्ण वैश्विक दर्जा (World Heritage Tag) प्राप्त करने की दिशा में पहला औपचारिक कदम है।

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