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Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI): पोलैंड भारत के नेतृत्व वाले CDRI में हुआ शामिल

Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI): पोलैंड भारत के नेतृत्व वाले CDRI में हुआ शामिल

Coalition for Disaster Resilient Infrastructure

संदर्भ:

हाल ही में पोलैंड (Poland) आधिकारिक तौर पर भारत के नेतृत्व वाले आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure – CDRI) में शामिल हो गया है। 

CDRI क्या है?

  • लॉन्च: सीडीआरआई (CDRI) भारत द्वारा प्रेरित एक वैश्विक बहु-हितधारक साझेदारी है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सितंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन (New York) में लॉन्च किया गया था.
  • मुख्यालय: इसका सचिवालय नई दिल्ली, भारत में स्थित है.
  • प्रकृति: यह राष्ट्रीय सरकारों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDBs), निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों का एक साझा मंच है. 
  • मुख्य उद्देश्य (CDRI Objectives):
  • नुकसान में कमी: प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाओं से होने वाले बुनियादी ढांचे के नुकसान में मापने योग्य कमी लाना.
  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का समर्थन: अवसंरचना प्रणालियों में लचीलापन लाकर सतत विकास और पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों को पूरा करना.
  • आवश्यक सेवाओं की सुरक्षा: आपदा के समय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी जीवन-रक्षक प्रणालियों की त्वरित बहाली सुनिश्चित करना.
  • सदस्यता (Membership): इसमें कई देश और संगठन शामिल हैं (वर्तमान में लगभग 40 देश और 7 संगठन इसके सदस्य हैं)।
  • प्रमुख कार्य:
  • ज्ञान साझाकरण (Knowledge Sharing): विभिन्न देशों को उनकी जोखिम परिस्थितियों के अनुरूप लचीली अवसंरचना (Climate Resilient Infrastructure) के निर्माण के लिए तकनीकी सहायता और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना.
  • मानकों का निर्धारण: बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए नए वैश्विक मानक, विनियमन और कड़े इंजीनियरिंग कोड तैयार करने में सहायता करना.
  • वित्तीय तंत्र (Financing Mechanisms): आपदा प्रतिरोधी परियोजनाओं के लिए वैश्विक पूंजी और निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए रणनीतियों का विकास करना.
  • वित्तीय ढांचा: CDRI द्वारा संचालित ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर रेजिलिएंस एक्सीलरेटर फंड’ (Infrastructure Resilience Accelerator Fund – IRAF) मुख्य रूप से विकासशील देशों और छोटे द्वीप विकासशील राज्यों (SIDS) में आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया एक विशेष वैश्विक वित्तीय तंत्र है।
    • यह फंड न्यूयॉर्क स्थित यूनाइटेड नेशन्स मल्टी-पार्टनर ट्रस्ट फंड ऑफिस (UN MPTFO) द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
  • वैश्विक फ्रेमवर्क से जुड़ाव: यह आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework 2015–2030), पेरिस जलवायु समझौता (Paris Agreement) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
  • पोलैंड का सीडीआरआई में शामिल होना (Poland Joins CDRI): यह घोषणा 22 अक्टूबर 2026 को पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान की गई।
  • भारत और पोलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को अगस्त 2024 में ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया गया था। इसके कारण:
    • जलवायु आपदाओं का सामना: पोलैंड और व्यापक यूरोपीय क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से अप्रत्याशित बाढ़, हीटवेव और चरम मौसमी घटनाओं का सामना कर रहे हैं.
  • यूरोपीय संघ की नीतियां: यूरोपीय संघ (EU) के हरित संक्रमण और बुनियादी ढांचा लचीलापन (Infrastructure Resilience) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पोलैंड को एक मजबूत वैश्विक नेटवर्क की आवश्यकता थी.
  • भारत-पोलैंड संबंध 2026 (India Poland Relations 2026)
  • व्यापारिक लक्ष्य: दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
  • बहुपक्षीय सहयोग: सीडीआरआई (CDRI India) के अतिरिक्त भारत ने पोलैंड को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया है। 

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना का महत्व

1. अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लाभ (Benefits to International Cooperation)

  • वैश्विक दक्षिण और उत्तर का मिलन: पोलैंड के शामिल होने से विकसित देशों (Global North) की उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ विकासशील और कम विकसित देशों (Global South) को मिल सकेगा.
  • डेटा और अनुसंधान का लोकतंत्रीकरण: यह साझेदारी चरम मौसम की भविष्यवाणियों और अवसंरचना सुरक्षा पर वैश्विक डेटा पूल को मजबूत करेगी.

2. जलवायु परिवर्तन और आपदाओं से निपटने में अवसंरचना का महत्व

  • प्रणालीगत लचीलापन: आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना (Disaster Resilient Infrastructure) यह सुनिश्चित करती है कि भूकंप, चक्रवात या बाढ़ आने पर भी पुल, बिजली ग्रिड और अस्पताल ढहने के बजाय कार्य करते रहें.
  • लागत-प्रभावी शमन: आपदा के बाद पुनर्निर्माण (Reconstruction) पर अरबों डॉलर खर्च करने की तुलना में पहले से ही लचीला बुनियादी ढांचा तैयार करना अत्यधिक किफायती और टिकाऊ होता है, जिससे आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) का लक्ष्य प्राप्त होता है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Poland भारत के नेतृत्व वाले CDRI में कब और क्यों शामिल हुआ?

उत्तर: पोलैंड 22 अक्टूबर 2026 को भारत यात्रा के दौरान शामिल हुआ ताकि वह जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से होने वाली बुनियादी ढांचे की क्षति को रोकने के लिए वैश्विक तकनीकी सहयोग प्राप्त कर सके.

प्रश्न 2: Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI) क्या है?

उत्तर: यह भारत के नेतृत्व में 2019 में शुरू की गई एक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी है, जो देशों को आपदा और जलवायु जोखिमों के प्रति अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद करती है. 

प्रश्न 3: CDRI का मुख्य उद्देश्य और प्रमुख कार्य क्या हैं?

उत्तर: इसका उद्देश्य आपदाओं से बुनियादी ढांचे के नुकसान को कम करना है। यह देशों को तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण और लचीले वित्तीय मानक (Resilient Standards) विकसित करने में मदद करता है.

प्रश्न 4: Poland के CDRI में शामिल होने से International Cooperation को क्या फायदा होगा?

उत्तर: इससे यूरोपीय संघ और भारत के बीच पर्यावरण कूटनीति मजबूत होगी तथा आपदा प्रबंधन में वैश्विक अनुसंधान (Global Research) और तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा.

प्रश्न 5: Disaster Resilient Infrastructure जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में कैसे मदद करता है?

उत्तर: यह चरम मौसमी घटनाओं में भी बिजली, संचार और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं को चालू रखता है, जिससे जान-माल की हानि कम होती है और त्वरित रिकवरी सुनिश्चित होती.

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