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IUCN Red List of Ecosystems 2026 रिपोर्ट जारी, आकलन में 96% प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर खतरा

IUCN Red List of Ecosystems 2026 रिपोर्ट जारी, आकलन में 96% प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर खतरा

IUCN Red List of Ecosystems 2026

संदर्भ:

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature – IUCN) ने आर्मेनिया की राजधानी येरेवन में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (CBD COP17) में अपनी पहली IUCN वैश्विक रेड लिस्ट ऑफ इकोसिस्टम रिपोर्ट 2026 (IUCN Red List of Ecosystems 2026) जारी की।

IUCN वैश्विक रेड लिस्ट ऑफ इकोसिस्टम रिपोर्ट 2026 के मुख्य बिंदु:

  • IUCN रेड लिस्ट ऑफ इकोसिस्टम (RLE): यह वैश्विक स्तर पर पारिस्थितिकी तंत्रों के पतन के सापेक्ष जोखिमों को मापने वाला एक वैज्ञानिक ढांचा है, जो ‘प्रजातियों की रेड लिस्ट’ का पूरक है।
    • यह पहली बार है जब दुनिया भर के उथले पानी के प्रवाल भित्तियों (Shallow Water Coral Reefs) का इस तंत्र के तहत व्यापक मूल्यांकन किया गया है। 
  • क्षेत्र और भागीदारी: इस वैश्विक शोध में 80 से अधिक देशों और क्षेत्रों के 250 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिन्होंने 127 उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय पारिस्थितिक क्षेत्रों (Ecoregions) में फैले 1,88,362 वर्ग किलोमीटर के प्रवाल क्षेत्रों का विश्लेषण किया।
  • मुख्य निष्कर्ष:
  • गंभीर संकट का स्तर (Critical Threat Level): कुल मूल्यांकित 127 प्रवाल पारिस्थितिक क्षेत्रों में से 122 (यानी 96%) को ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है. यह कुल प्रवाल क्षेत्र का 99.8% हिस्सा है.
  • पतन का आसन्न जोखिम (Coral Reef Collapse Risk 2075): यदि वर्तमान वैश्विक तापमान वृद्धि (2.7°C का मध्यमार्गी परिदृश्य) जारी रही, तो ये उथले पानी के प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र (Coral Reef Ecosystem Threats) वर्ष 2075 तक पूरी तरह से ढह जाएंगे।
  • पूर्ण पतन का पहला उदाहरण: प्रशांत महासागर में स्थित ‘पश्चिमी गैलापागोस द्वीप समूह’ (Western Galápagos Islands) का प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र पहले ही पूर्ण रूप से ढह (Collapsed) चुका है.
  • वैश्विक हॉटस्पॉट पर संकट: दुनिया के सबसे बड़े और सबसे समृद्ध प्रवाल क्षेत्र—ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ (Great Barrier Reef Threats), दक्षिण-पूर्व एशिया का ‘कोरल ट्रायंगल’ (Coral Triangle Ecosystem), मेसोअमेरिकन बैरियर रीफ और लाल सागर के प्रवाल भित्ति—सभी इस सर्वोच्च खतरे की श्रेणी में शामिल हैं.
  • प्रवाल भित्तियों के क्षरण के मुख्य कारण (Primary Drivers of Degradation):
  • समुद्री ऊष्मा तनाव (Marine Heat Stress): वैश्विक तापन (Global Warming) के कारण तीव्र और लगातार आने वाली समुद्री हीटवेव (Marine Heatwaves) इसका सबसे बड़ा कारण हैं. इसके कारण होने वाली प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching Global Warming) की घटनाओं से मूंगों को उबरने का समय नहीं मिल पा रहा है. ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 50 वर्षों में ही 77% प्रवाल क्षेत्रों ने अत्यधिक ऊष्मा तनाव का सामना किया है. 
  • अति-मत्स्यन (Overfishing): लगभग 63% प्रवाल पारिस्थितिकी तंत्र प्रमुख शाकाहारी मछलियों (जैसे पैरटफिश) की कमी से जूझ रहे हैं, जो प्रवाल भित्तियों पर जमी शैवाल (Algae) को साफ कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखती हैं.
  • स्थानीय दबाव: तटीय विकास (Coastal Development), कृषि रसायनों का समुद्री प्रदूषण (Runoff Pollution), अत्यधिक पर्यटन और ‘क्राउन-ऑफ-थॉर्न्स स्टारफिश’ (Crown-of-Thorns Starfish) जैसी आक्रामक प्रजातियों का प्रकोप. 

प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र का महत्व:

  • समुद्र के वर्षावन (Rainforests of the Ocean): प्रवाल भित्तियाँ समुद्र के तल का 0.2% से भी कम हिस्सा घेरती हैं, लेकिन ये ज्ञात समुद्री जीवन (Climate Change Marine Life) की 25% से अधिक प्रजातियों को आश्रय प्रदान करती हैं.
    • प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs) समुद्र के भीतर स्थित ऐसे जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो छोटे समुद्री जीवों—प्रवाल पॉलीप्स (Coral Polyps)—द्वारा कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) के कंकाल स्रावित करके बनाए जाते हैं।
  • तटीय सुरक्षा और आजीविका: ये चक्रवातों, तीव्र समुद्री लहरों और सुनामी से तटरेखाओं की प्राकृतिक रक्षा करती हैं. इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोगों के लिए यह भोजन, मत्स्य पालन और पर्यटन राजस्व का प्राथमिक स्रोत हैं.
  • पारिस्थितिक पतन का प्रभाव: जब एक प्रवाल भित्ति ढह जाती है, तो जीवित मूंगे (Calcium Carbonate ढांचे) गायब हो जाते हैं और उनकी जगह केवल मलबे, स्पंज और हानिकारक शैवाल ले लेते हैं. इससे संपूर्ण समुद्री खाद्य श्रृंखला (Marine Food Web) नष्ट हो जाती है. 

संरक्षण के उपाय और भावी राह;

  • महत्वाकांक्षी जलवायु शमन (Ambitious Climate Mitigation): जब तक ग्रीनहाउस गैसों के वैश्विक उत्सर्जन को तेजी से कम नहीं किया जाता, तब तक स्थानीय संरक्षण प्रयास दीर्घकालिक पतन को नहीं रोक सकते.
  • ‘थर्मल रिफ्यूजिया’ का संरक्षण (Protecting Thermal Refugia): ऐसे गहरे या भौगोलिक प्रवाल क्षेत्रों (जैसे उत्तरी लाल सागर) की पहचान कर उन्हें पूर्णतः ‘गैर-निष्कर्षण क्षेत्र’ (Non-extractive Zones) घोषित करना, जो प्राकृतिक रूप से ऊष्मा-सहिष्णु (Heat Resilient) हैं.
  • तकनीकी बहाली (Technological Restoration): बायोरॉक तकनीक (Biorock Technology), माइक्रो-फ्रेगमेंटेशन (Micro-fragmentation) और आनुवंशिक रूप से संशोधित ऊष्मा-प्रतिरोधी प्रवाल प्रजातियों का बीजारोपण करना.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: IUCN की वैश्विक रेड लिस्ट ऑफ इकोसिस्टम रिपोर्ट 2026 में क्या सामने आया?

उत्तर: इस रिपोर्ट (IUCN Biodiversity Report) के पहले वैश्विक प्रवाल आकलन में यह चेतावनी दी गई है कि दुनिया के लगभग सभी उथले पानी के प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र पतन के बेहद उच्च जोखिम में हैं.

प्रश्न 2: दुनिया के कितने प्रतिशत प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर खतरे में हैं?

उत्तर: दुनिया भर के मूल्यांकित प्रवाल भित्ति क्षेत्रों में से 96% प्रवाल भित्तियों को ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है.

प्रश्न 3: प्रवाल भित्तियों के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे बड़े खतरे क्या हैं?

उत्तर: जलवायु परिवर्तन जनित समुद्री ऊष्मा तनाव (Marine Heat Stress), अत्यधिक मछली पकड़ना (Overfishing), तटीय प्रदूषण और विरंजन (Bleaching) इसके सबसे बड़े खतरे हैं. 

प्रश्न 4: IUCN के अनुसार प्रवाल भित्तियों के ढहने का जोखिम किस वर्ष तक बढ़ सकता है?

उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान में कमी नहीं की गई, तो अधिकांश प्रवाल भित्ति प्रणालियों के वर्ष 2075 तक पूरी तरह ढह जाने का अनुमान है.

प्रश्न 5: प्रवाल भित्तियों के संरक्षण के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं?

उत्तर: इसके लिए वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में कटौती, अति-मत्स्यन पर सख्त प्रतिबंध, समुद्री संरक्षित क्षेत्रों (MPAs) का विस्तार और बायोरॉक जैसी पुनर्जनन तकनीकों का उपयोग आवश्यक है.

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