India-Vietnam Relations: उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने हेतु NSA डोभाल पहुंचे हनोई
संदर्भ:
हाल ही में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Advisor India) अजीत डोभाल उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को सुदृढ़ करने के लिए आधिकारिक राजनयिक यात्रा पर हनोई पहुंचे।

अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा:
- रणनीतिक संदर्भ: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा (Ajit Doval Vietnam visit) अक्टूबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित चौथी भारत-वियतनाम सुरक्षा वार्ता (4th India-Vietnam Security Dialogue) के तुरंत बाद हो रही है।
- उन्नत साझेदारी की समीक्षा: हनोई पहुंचने पर भारतीय राजदूत छेरिंग शेरपा ने उनका स्वागत किया। डोभाल वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर राष्ट्रपति तो लाम से मुलाकात कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य मई 2026 में तय की गई “उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी” (Enhanced Comprehensive Strategic Partnership) की प्रगति की समीक्षा करना है।
- विज़न दस्तावेज संरेखण: यह कूटनीतिक संवाद भारत के ‘विकसित भारत 2047’ और वियतनाम के ‘विज़न 2045’ के राष्ट्रीय लक्ष्यों को आपस में जोड़ने पर केंद्रित है।
भारत-वियतनाम संबंध (India-Vietnam Relations)
- सभ्यतागत जुड़ाव: दोनों देशों के बीच संबंध दूसरी शताब्दी से भी पुराने हैं। वियतनाम की प्राचीन चंपा सभ्यता (Champa Civilization) पर भारतीय संस्कृति, हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव रहा है।
- भारत का ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ (ASI) वियतनाम के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘मी सान’ (My Son) मंदिरों का जीर्णोद्धार कर रहा है।
- स्वतंत्रता संग्राम: महात्मा गांधी और राष्ट्रपति हो ची मिन्ह ने अपने देशों के स्वतंत्रता आंदोलनों के दौरान वैचारिक संदेशों का आदान-प्रदान किया था।
- राजनयिक संबंध: भारत ने 1954 के जिनेवा समझौते के बाद अंतर्राष्ट्रीय नियंत्रण आयोग (ICSC) के सह-अध्यक्ष के रूप में भूमिका निभाई और 7 जनवरी 1972 को वियतनाम के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए।
- भू-राजनीतिक एवं रणनीतिक:
- ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का मुख्य स्तंभ: वियतनाम भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy), ‘विजन सागर’ (SAGAR) और ‘विजन महासागर’ (MAHASAGAR) का एक केंद्रीय स्तंभ है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific): दोनों देश एक स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वकालत करते हैं।
- चीन का मुकाबला: दोनों देशों की सीमाएं/हित चीन के साथ टकराते हैं। दक्षिण चीन सागर (SCS) में चीन की आक्रामक गतिविधियों के बीच वियतनाम के लिए भारत एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार है।
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग:
- रसद और सैन्य अभ्यास: दोनों देशों ने रक्षा सहयोग की ‘संयुक्त दूरदृष्टि वक्तव्य 2030’ (Joint Vision Statement 2030) और पारस्परिक रसद सहायता (Mutual Logistics Support MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त शांति स्थापना अभ्यास ‘VINBAX’ आयोजित किया जाता है।
- रक्षा क्षमता निर्माण (Line of Credit): भारत ने रक्षा खरीद के लिए वियतनाम को 100 मिलियन डॉलर (2014) और 500 मिलियन डॉलर (2016) की ऋण सहायता (LoC) दी थी, जिसके तहत 12 हाई-स्पीड गार्ड नावें वियतनाम को सौंपी गईं। इसके बाद 2024 में 120 मिलियन और 180 मिलियन डॉलर की नई क्रेडिट लाइन पर भी कार्य चल रहा है।
- रणनीतिक उपहार: भारत ने वियतनाम की नौसेना को अपना स्वदेश निर्मित मिसाइल कार्वेट INS कृपाण (INS Kirpan) उपहार में दिया है। इसके अलावा ‘ब्रह्मोस मिसाइल’ सौदे को लेकर भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत अग्रसर है।
- आर्थिक और व्यापारिक संबंध:
- द्विपक्षीय व्यापार: वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 16.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। मई 2026 की बैठक में दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को 25 बिलियन डॉलर तक ले जाने का नया महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत की ‘ओएनजीसी विदेश लिमिटेड’ (OVL) चीन के विरोध के बावजूद दक्षिण चीन सागर में वियतनाम के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में तेल और गैस की खोज ब्लॉकों (जैसे ब्लॉक 128) में सक्रिय है।
- आपूर्ति शृंखला विविधीकरण: वैश्विक स्तर पर ‘चाइना प्लस वन’ (China+1) रणनीति के तहत दोनों देश लचीली आपूर्ति शृंखलाओं (Resilient Supply Chains) के विकास में सहयोग कर रहे हैं।
- अंतरिक्ष सहयोग: ‘इसरो’ (ISRO) ने वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में एक उपग्रह ट्रैकिंग और डेटा रिसेप्शन स्टेशन ( civilian facility) स्थापित किया है, जो रणनीतिक रूप से दक्षिण चीन सागर में गतिविधियों पर नज़र रखने में भी सहायक हो सकता है।
- डिजिटल भुगतान और साइबर सुरक्षा: दोनों देशों ने यूपीआई (UPI) जैसे डिजिटल भुगतान प्रणालियों के एकीकरण और साइबर अपराधों से निपटने के लिए इंदिरा गांधी हाई-टेक क्राइम लेबोरेटरी के सुदृढ़ीकरण पर सहमति जताई है।
- महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals): दोनों देश सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा के लिए आवश्यक दुर्लभ मृदा खनिजों (Rare Earth Minerals) की खोज और प्रसंस्करण में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
- बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: दोनों देश आसियान (ASEAN), पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS), मेकांग-गंगा सहयोग (MGC) और संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे मंचों पर मिलकर काम करते हैं।
- वियतनाम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का लगातार समर्थन किया है। साथ ही, भारत ने वियतनाम को BRICS पार्टनर कंट्री के रूप में समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई है।
- भारत-आसियान सहयोग (India ASEAN Cooperation):
- आसियान में वियतनाम की भूमिका: भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) और व्यापक भारत आसियान सहयोग (India ASEAN cooperation) के तहत वियतनाम भारत का एक अत्यंत विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार है।
- हवाई संपर्क का विस्तार: सितंबर 2026 में दोनों देशों ने हवाई सेवा समझौते (Air Services Agreement) के तहत सीधी उड़ानों की संख्या बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है, जिससे पर्यटन और निवेश को सीधा बढ़ावा मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: NSA अजीत डोभाल वियतनाम के दौरे पर क्यों पहुंचे हैं?
उत्तर: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) सुरक्षा, रक्षा और समुद्री रणनीतिक मामलों में द्विपक्षीय सहयोग (India Vietnam strategic cooperation) को बढ़ाने और साझा हितों पर वियतनामी नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय राजनीतिक विमर्श करने हनोई पहुंचे हैं।
प्रश्न 2: भारत और वियतनाम के बीच उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी क्या है?
उत्तर: मई 2026 में वियतनामी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने पारंपरिक 2016 के संबंधों को उन्नत (Enhanced) कर उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल दिया, जिसमें रक्षा और उभरती तकनीक प्रमुख हैं।
प्रश्न 3: भारत और वियतनाम के संबंध किन प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत हो रहे हैं?
उत्तर: दोनों देशों के संबंध मुख्य रूप से रक्षा विनिर्माण, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, साइबर सुरक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, और द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्रों में तेजी से मजबूत हो रहे हैं।
प्रश्न 4: भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह सहयोग हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता, समुद्री सुरक्षा (Maritime Safety) और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।