INS Trishul पहुंचा ग्रीस, भूमध्य सागर में किया जाएगा तैनात
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय नौसेना (Indian Navy) का अग्रिम पंक्ति का युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल (INS Trishul) भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में अपनी लंबी दूरी की परिचालन तैनाती के दौरान पांच दिवसीय पोर्ट कॉल के तहत 31 अक्टूबर 2026 को ग्रीस के सौदा बे (Souda Bay) पहुंचा।

INS त्रिशूल के बारे में:
- परिचय: आईएनएस त्रिशूल (INS Trishul) भारतीय नौसेना का एक अग्रणी तलवार-श्रेणी (Talwar-class) का गाइडेड-मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट (Guided-missile Stealth Frigate) है।
- निर्माण: इसका निर्माण रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में ‘बाल्टिस्की जावोड’ (Baltiysky Zavod) शिपयार्ड द्वारा भारत-रूस संयुक्त उत्पादन के तहत किया गया था।
- कमिशन: इसे 2003 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
- क्षमता: यह जहाज उन्नत रडार-इवेडिंग (Stealth) क्षमता, सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, पनडुब्बी रोधी हथियारों और एक भारी लड़ाकू हेलीकॉप्टर से लैस है।
- डिस्प्लेसमेंट और गति: इसका कुल विस्थापन लगभग 4,000 टन है और यह 30 नॉट्स (>56 किमी/घंटा) से अधिक की गति प्राप्त कर सकता है।
- ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Upgrade): शुरुआत में इसमें क्लब-एन (Klub-N) मिसाइलें थीं, लेकिन हाल ही में इसे अपग्रेड करके यूनिवर्सल वर्टिकल लॉन्चर मॉड्यूल (UVLM) लगाया गया है, जिससे यह भारत की घातक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दागने में सक्षम है।
- वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence): यह दुश्मन के हवाई हमलों और एंटी-शिप मिसाइलों से निपटने के लिए श्टिल-1 (Shtil-1) एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम और AK-630 CIWS (क्लोज़-इन वेपन सिस्टम) से लैस है।
- एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW): पानी के नीचे पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने के लिए इसमें उन्नत Atlas Elektronik ACTAS (Stern-mounted Sonar) और एंटी-टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम लगे हैं।
- हेलिकॉप्टर संचालन: यह हवा से पनडुब्बी रोधी निगरानी के लिए Kamov-31 या Kamov-28 हेलिकॉप्टर संचालित कर सकता है।
- तैनाती और मिशन:
- दीर्घकालिक विदेशी तैनाती (Foreign Deployment): आईएनएस त्रिशूल वर्तमान में भूमध्य सागर, अटलांटिक महासागर और आस-पास के समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नौसेना की विदेशी तैनाती (Indian Navy overseas deployment) में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।
- क्रमानुगत यात्राएं (Sequential Visits): ग्रीस पहुंचने से पहले, अक्टूबर 2026 के मध्य में इस युद्धपोत ने स्पेन के वालेंसिया (Valencia) और 28 अक्टूबर 2026 तक इटली के सिवितावेच्चिया (Civitavecchia) बंदरगाहों का सफल दौरा किया, जहाँ इसने इटली की नौसेना के साथ द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास में भाग लिया था।
- यूनाइटेड किंगडम (UK) के प्लायमाउथ बंदरगाह पर पहुंचकर INS त्रिशूल ने रॉयल नेवी के साथ ‘कोंकण 26’ द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया।
- इसने फ्रांस के तूलॉन (Toulon) में फ्रांसीसी नौसेना के साथ रणनीतिक अभ्यास एक्सरसाइज वरुणा (Exercise Varuna) में भाग लिया।
- ग्रीस (सौदा बे) बंदरगाह तैनाती: इस पांच दिवसीय पोर्ट कॉल के दौरान दोनों मित्र देशों India-Greece की नौसेनाओं के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए कई गतिविधियां निर्धारित की गई हैं:
- व्यावसायिक चर्चा और क्रॉस-डेक दौरे (Cross-deck Visits): भारतीय और ग्रीक नौसेना (Hellenic Navy) के कर्मी एक-दूसरे के जहाजों का दौरा कर परिचालन अनुभवों को साझा करेंगे।
- नाटो प्रशिक्षण केंद्र का दौरा: भारतीय नौसेना के जवान सौदा बे स्थित नाटो मैरीटाइम इंटरडिक्शन ऑपरेशनल ट्रेनिंग सेंटर (NMIOTC) और नौसैनिक सहायता गतिविधियों का दौरा कर आधुनिक समुद्री सुरक्षा तौर-तरीकों से परिचित होंगे।
- राजनयिक संवाद: जहाज के कमांडिंग अधिकारी एथेंस में स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy in Athens) और यूनानी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रणनीतिक बैठकें आयोजित करेंगे।
- ऐतिहासिक श्रद्धांजलि: भारतीय नौसैनिक सौदा बे युद्ध कब्रिस्तान (Souda Bay War Cemetery) जाकर द्वितीय विश्व युद्ध के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
- सार्वजनिक आउटरीच: यह युद्धपोत स्थानीय नागरिकों और भारतीय प्रवासियों के लिए भी खुला (Open to Visitors) रखा जाएगा।
भारत-ग्रीस रक्षा संबंध और रणनीतिक महत्व:
- भूमध्य सागर में समुद्री सुरक्षा (Mediterranean Maritime Security): यह क्षेत्र वैश्विक व्यापारिक जहाजों का एक प्रमुख मार्ग (SLOC) है। इस क्षेत्र में आईएनएस त्रिशूल की उपस्थिति भारत को एक उत्तरदायी सुरक्षा भागीदार (Net Security Provider) के रूप में प्रदर्शित करती है।
- यूरोपीय रक्षा सहयोग का विस्तार (India European Defence Cooperation): हाल के वर्षों में भारत और ग्रीस के सैन्य संबंध (India Greece military cooperation) रणनीतिक साझेदारी में बदल गए हैं। यह नौसैनिक जुड़ाव द्विपक्षीय रक्षा संबंधों (India Greece defence relations) को और गहरा करता है।
- रणनीतिक बहुपक्षवाद (Strategic Pluralism): नाटो (NATO) सुविधाओं के साथ भारतीय नौसेना का यह समन्वय पश्चिमी मित्र राष्ट्रों के साथ भारत के बढ़ते अंतर-संचालनीयता (Interoperability) विश्वास को दर्शाता है, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: INS त्रिशूल क्या है और यह भारतीय नौसेना का कौन-सा युद्धपोत है?
उत्तर: यह भारतीय नौसेना (INS Trishul Indian Navy) का एक अग्रिम पंक्ति का गाइडेड-मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट (Guided-missile Stealth Frigate) है, जो आधुनिक हथियारों और सेंसर प्रणालियों से लैस है।
प्रश्न 2: INS त्रिशूल ग्रीस क्यों पहुंचा है?
उत्तर: यह युद्धपोत भूमध्य सागर में जारी अपनी परिचालन तैनाती (Indian Navy international mission) के तहत भारत-ग्रीस नौसैनिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 31 अक्टूबर 2026 को सौदा बे पहुंचा है।
प्रश्न 3: भूमध्य सागर में INS त्रिशूल की तैनाती का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य मित्र राष्ट्रों के साथ नौसैनिक कूटनीति (Naval Diplomacy) को बढ़ावा देना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और नाटो बलों के साथ परिचालन अनुभवों को साझा करना है।
प्रश्न 4: भारत और ग्रीस के बीच नौसैनिक सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह सहयोग दोनों देशों के साझा समुद्री हितों की रक्षा करने, भूमध्य-हिंद महासागर गलियारे को सुरक्षित रखने और द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी (India Greece defence relations) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 5: INS त्रिशूल की तैनाती से भारत की समुद्री रणनीति को क्या लाभ हो सकता है?
उत्तर: इससे भारतीय नौसेना की लंबी दूरी तक पहुँच (Blue Water Capability) की क्षमता सिद्ध होती है, वैश्विक समुद्री डोमेन में भारत की रणनीतिक छवि मजबूत होती है और यूरोप के साथ रक्षा कूटनीति प्रगाढ़ होती है।