President’s Colour Award: परिचय, शुरुआत, चयन एवं विशेषताएं
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने 1 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ पुलिस के 60वें स्थापना दिवस (हीरक जयंती) के अवसर पर आयोजित समारोह में बल को प्रतिष्ठित प्रेसिडेंट कलर सम्मान (President’s Colour Award) प्रदान किया।

प्रेसिडेंट कलर सम्मान के बारे मे:
- परिचय: President’s Colour Award, भारत में किसी भी सैन्य इकाई, सैन्य बल या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान (Highest National Honour) है। इसे हिंदी में ‘राष्ट्रपति का निशान’ (Rashtrapati ka Nishan) कहा जाता है।
- सामूहिक सम्मान: रक्षा पुरस्कार (Defence Awards) के विपरीत यह किसी व्यक्तिगत सैन्य अधिकारी या जवान को न देकर पूरी सैन्य इकाई या पुलिस बल (Military Unit Honour) को सामूहिक रूप से उनकी संप्रभु और असाधारण सेवाओं के बदले प्रदान किया जाता है।
- प्रदानकर्ता: यह सम्मान राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है, जो सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं (या राष्ट्रपति की ओर से किसी उच्च अधिकारी द्वारा विशेष समारोह में सौंपा जाता है)।
- सैन्य प्रतीक चिन्ह (Military Ceremonial Flag): इस सम्मान के रूप में एक विशेष रूप से डिजाइन किया गया औपचारिक ध्वज (Ceremonial Flag) प्रदान किया जाता है, जिसे बल के जवान सभी प्रमुख सरकारी परेडों और राष्ट्रीय उत्सवों के दौरान अत्यंत गर्व के साथ प्रदर्शित करते हैं।
- बल के सभी सदस्यों की वर्दी के बाएं हाथ की आस्तीन पर इस विशेष प्रतीक चिन्ह का एक बैच (Emblem) लगाने की अनुमति मिलती है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं शुरुआत (History of President’s Colour in India):
- औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति: स्वतंत्रता से पूर्व ब्रिटिश कालीन भारतीय सेना में रेजीमेंटों को ब्रिटिश सम्राट द्वारा ‘किंग्स कलर’ (King’s Colour) प्रदान किया जाता था। स्वतंत्रता के बाद इस औपनिवेशिक प्रथा को भारतीय स्वरूप में बदला गया।
- प्रेसिडेंट कलर 1951 (President’s Colour 1951): स्वतंत्र भारत में इस परंपरा की औपचारिक शुरुआत तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr Rajendra Prasad) द्वारा की गई थी।
- प्रथम प्राप्तकर्ता सेवा: 27 मई 1951 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारतीय नौसेना (Indian Navy) को देश का पहला प्रेसिडेंट कलर सम्मान प्रदान किया था।
- इसके तत्काल बाद 23 नवंबर 1951 को भारतीय सेना (Indian Army) के इन्फैंट्री रेजीमेंट को यह गौरव प्राप्त हुआ।
- भारतीय वायुसेना (Indian Air Force President’s Colour) को 1 अप्रैल 1954 को यह सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया था।
- चयन प्रक्रिया (President’s Colour Selection Criteria): किसी भी सुरक्षा बल अथवा सैन्य विंग को इस सर्वोच्च सम्मान (Highest Military Honour) के लिए चयनित करने हेतु गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय द्वारा बेहद कड़े मूल्यांकन मानदंडों का पालन किया जाता है:
- न्यूनतम सेवा अवधि: पहला अनिवार्य नियम यह है कि उस विशिष्ट बल या इकाई ने देश में कम से कम 15 वर्ष की अनुकरणीय और निरंतर सेवा पूरी कर ली हो। (चंडीगढ़ पुलिस ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण होने पर यह गौरव अर्जित किया है)।
- वीरता और परिचालन रिकॉर्ड: इकाई का युद्ध काल और शांति काल दोनों ही परिस्थितियों में परिचालन रिकॉर्ड (Operational Track Record) बेदाग और वीरता से परिपूर्ण होना चाहिए। आतंकवाद विरोधी अभियानों या आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) बनाए रखने में बल का असाधारण योगदान परखा जाता है।
- उत्कृष्ट अनुशासन और बलिदान: बल के जवानों का आंतरिक अनुशासन, नैतिक आचरण और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान (Supreme Sacrifice) देने का गौरवशाली इतिहास होना आवश्यक है।
- आधुनिकीकरण और जनसेवा: समसामयिक युग में बल द्वारा अपनाए गए तकनीकी नवाचारों, त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया समय (Emergency Response Time) और सामुदायिक कल्याण (Community Welfare) में किए गए गुणात्मक सुधारों का भी विशेष मूल्यांकन किया जाता है।
प्रेसिडेंट कलर बनाम प्रेसिडेंट स्टैंडर्ड (Difference: Colour vs Standard):
सैन्य प्रोटोकॉल के तहत इन दोनों सम्मानों के बीच तकनीकी अंतर को समझना प्रशासनिक सेवा के परीक्षार्थियों के लिए आवश्यक है:
| आधार (Basis) | प्रेसिडेंट कलर (President’s Colour Award) | प्रेसिडेंट स्टैंडर्ड (President’s Standard Award) |
| प्रदान करने का क्षेत्र | यह मुख्य रूप से इन्फैंट्री (पैदल सेना) रेजीमेंटों, राज्य/यूटी पुलिस बलों, और प्रशिक्षण अकादमियों को दिया जाता है। | यह सेना की कवचधारी (Armoured) इकाइयों, कॉम्बैट एविएशन स्क्वाड्रन और मिसाइल रेजिमेंटों को मिलता है। |
| भौतिक आकार | यह आकार में थोड़ा बड़ा होता है और इसे पैदल मार्च करने वाली टुकड़ियों के ध्वजवाहक द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। | इसका आकार अपेक्षाकृत छोटा होता है और इसे बख्तरबंद वाहनों या लड़ाकू विमानों के कमांडरों के वाहनों पर लगाया जाता है। |
चंडीगढ़ पुलिस को मिलने का महत्व:
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 1 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ पुलिस को यह सम्मान दिए जाने के पीछे बल के कुछ अभूतपूर्व बेंचमार्क शामिल हैं:
- त्वरित न्याय और दोषसिद्धि दर: नए आपराधिक कानूनों (BNSS, BNS) के प्रभावी कार्यान्वयन के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने आपराधिक मामलों में 85% की राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) हासिल की है, जो मादक पदार्थ अधिनियम (NDPS) के तहत 93% तक है।
- तकनीकी सुशासन: बल द्वारा निर्मित विशेष ‘बीट पुलिसिंग ऐप’ के माध्यम से नागरिक बिना पुलिस स्टेशन जाए डिजिटल सेवाओं का लाभ ले रहे हैं, जिससे यह देश का अग्रणी स्मार्ट पुलिस बल बनकर उभरा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: प्रेसिडेंट कलर सम्मान क्या है और इसे किसे प्रदान किया जाता है?
उत्तर: यह भारत में किसी सैन्य इकाई या पुलिस बल को उनके न्यूनतम 15 वर्षों के असाधारण शौर्य, अनुशासन और निरंतर देश सेवा के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सामूहिक राष्ट्रीय सम्मान है।
प्रश्न 2: भारत में प्रेसिडेंट कलर सम्मान की शुरुआत कब हुई थी?
उत्तर: स्वतंत्र भारत में इस गौरवशाली सैन्य परंपरा की शुरुआत वर्ष 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा आधिकारिक रूप से की गई थी।
प्रश्न 3: प्रेसिडेंट कलर सम्मान प्राप्त करने वाली पहली भारतीय सैन्य सेवा कौन-सी थी?
उत्तर: 27 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा भारतीय नौसेना (Indian Navy) को देश का पहला राष्ट्रपति का निशान (President’s Colour) प्रदान किया गया था।
प्रश्न 4: किसी सैन्य इकाई को प्रेसिडेंट कलर सम्मान देने के लिए किन बातों का मूल्यांकन किया जाता है?
उत्तर: इसके तहत बल की न्यूनतम 15 वर्ष की बेदाग सेवा, परिचालन उत्कृष्टता, आंतरिक अनुशासन, तकनीकी नवाचार, जनसेवा और देश के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदानों का कड़ा मूल्यांकन होता है।
प्रश्न 5: प्रेसिडेंट कलर सम्मान और प्रेसिडेंट स्टैंडर्ड में क्या अंतर है?
उत्तर: प्रेसिडेंट कलर पैदल सेना (इन्फैंट्री) और राज्य पुलिस बलों को दिया जाने वाला बड़े आकार का ध्वज है, जबकि प्रेसिडेंट स्टैंडर्ड सेना की बख्तरबंद (Armoured) और लड़ाकू उड्डयन प्रणालियों को मिलने वाला विशेष मानक है।