International Day for Biosphere Reserves: परिचय, उद्देश्य, शुरुआत एवं महत्व
संदर्भ:
3 नवंबर 2026 को अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिजर्व दिवस (International Day for Biosphere Reserves) मनाया जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिजर्व दिवस:
- परिचय: International Day for Biosphere Reserves, 3 नवंबर को प्रत्येक वर्ष मनाया जाने वाला ग्लोबल आयोजन है। यह विशेष दिन मानव और प्रकृति के बीच एक संतुलित और सामंजस्यपूर्ण संबंध को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की एक वैश्विक पहल है।
- बायोस्फीयर रिज़र्व (Biosphere Reserve – BR) एक ऐसा संरक्षित क्षेत्र है, जिसे जैव विविधता के संरक्षण और स्थानीय लोगों के सतत विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए मान्यता दी जाती है।
- मुख्य उद्देश्य:
- सतत विकास को बढ़ावा (Sustainable Development): प्रकृति के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के आर्थिक और सामाजिक विकास में संतुलन स्थापित करना।
- जागरूकता का प्रसार: आधुनिक समाज को पर्यावरण संकटों, जैसे जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के नुकसान के प्रति जागरूक करना और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण (Ecosystem Conservation) के महत्व को समझाना।
- वैश्विक सहयोग: जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) के क्षेत्र में दुनिया भर के शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और स्थानीय लोगों के बीच ज्ञान साझाकरण को सुगम बनाना।
- शुरुआत: इस दिवस को मनाने की घोषणा यूनेस्को (UNESCO) द्वारा वर्ष 2021 में आयोजित अपने 41वें महाधिवेशन (41st General Conference) के दौरान की गई थी।
- यह तिथि यूनेस्को के ऐतिहासिक मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम (Man and Biosphere Programme – MAB) की शुरुआत की वर्षगांठ का प्रतीक है, जिसे वर्ष 1971 में लॉन्च किया गया था।
- प्रथम आयोजन: आधिकारिक तौर पर पहला अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिजर्व दिवस (International Biosphere Reserve Day) 3 नवंबर 2022 को मनाया गया।
UNESCO का एमएबी कार्यक्रम और बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना:
- परिचय: यूनेस्को का एमएबी कार्यक्रम (UNESCO MAB Programme) एक अंतःविषय वैज्ञानिक कार्यक्रम (Intergovernmental Scientific Programme) है, जो लोगों और उनके पर्यावरण के बीच संबंधों में सुधार के लिए एक वैज्ञानिक आधार स्थापित करता है।
- इसके तहत घोषित बायोस्फीयर रिजर्व को तीन प्रमुख क्षेत्रों (Zonation) में विभाजित किया जाता है:
- कोर क्षेत्र (Core Area): यह पूरी तरह से संरक्षित और कानूनी रूप से सुरक्षित क्षेत्र होता है। यहाँ केवल वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation) और न्यूनतम गैर-विघटनकारी अनुसंधान (Non-disruptive Research) की अनुमति होती है।
- बफर क्षेत्र (Buffer Zone): यह कोर क्षेत्र के चारों ओर स्थित होता है। यहाँ ऐसी गतिविधियाँ आयोजित की जा सकती हैं जो संरक्षण लक्ष्यों से समझौता न करें, जैसे पर्यावरण-पर्यटन (Eco-tourism), वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरणीय शिक्षा।
- संक्रमण क्षेत्र (Transition Zone): यह सबसे बाहरी हिस्सा होता है। यहाँ स्थानीय समुदाय, वैज्ञानिक संगठन, गैर-सरकारी संगठन और अन्य हितधारक सतत कृषि, वानिकी और मानव बस्तियों जैसी गतिविधियों के लिए मिलकर काम करते हैं।
भारत में बायोस्फीयर रिजर्व का परिदृश्य (Biosphere Reserves in India):
- भारत में कुल संख्या: वर्तमान में भारत में कुल 18 अधिसूचित बायोस्फीयर रिजर्व (India’s Biosphere Reserves) हैं, जो विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- यूनेस्को की मान्यता (UNESCO Recognised Biosphere Reserves): इन 18 में से 12 बायोस्फीयर रिजर्व को यूनेस्को के ‘वर्ल्ड नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिजर्व्स’ (WNBR) के तहत वैश्विक मान्यता प्राप्त है।
- प्रथम बायोस्फीयर रिजर्व: वर्ष 1986 में स्थापित नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व (तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के त्रि-राज्य जंक्शन पर) भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व था।
- नवीनतम यूनेस्को मान्यता प्राप्त: मध्य प्रदेश का पन्ना बायोस्फीयर रिजर्व (2020 में शामिल) यूनेस्को की सूची में शामिल होने वाला भारत का 12वां रिजर्व है।
यूनेस्को मान्यता प्राप्त 12 भारतीय बायोस्फीयर रिजर्व की सूची:
- नीलगिरी (Nilgiri)
- मन्नार की खाड़ी (Gulf of Mannar)
- सुंदरबन (Sundarbans)
- नंदा देवी (Nanda Devi)
- नोकरेक (Nokrek)
- पंचमढ़ी (Pachmarhi)
- सिमलीपाल (Similipal)
- अचनकमार-अमरकंटक (Achanakmar-Amarkantak)
- ग्रेट निकोबार (Great Nicobar)
- अगस्त्यमलाई (Agasthyamala)
- कंचनजंगा (Khangchendzonga)
- पन्ना (Panna)
जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास में इसका महत्व:
- आनुवंशिक विविधता का संरक्षण: ये क्षेत्र संकटग्रस्त पौधों और जानवरों की प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में जीवित रखने के लिए एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं, जिससे पारिस्थितिक स्थिरता बनी रहती है।
- जलवायु लचीलापन (Climate Resilience): सघन वन और आर्द्रभूमि से युक्त बायोस्फीयर रिजर्व कार्बन सिंक (Carbon Sinks) के रूप में कार्य करते हैं, जो ग्रीनहाउस गैसों के अवशोषण द्वारा ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को कम करने में मदद करते हैं।
- सतत आजीविका और आदिवासी कल्याण: संक्रमण क्षेत्रों में रहने वाले पारंपरिक और आदिवासी समुदायों को सतत कृषि और लघु वनोपज (NTFP) के माध्यम से आजीविका सुरक्षा मिलती है, जो ग्रामीण विकास का एक बड़ा साधन है।
- वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं: ये क्षेत्र प्रकृति-आधारित समाधानों (Nature-based Solutions) के परीक्षण के लिए जीवित प्रयोगशालाओं के रूप में कार्य करते हैं, जहाँ से प्राप्त डेटा का उपयोग वैश्विक पर्यावरण नीतियों को बनाने में होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिजर्व दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित करने के लिए दुनिया भर में हर साल 3 नवंबर (Biosphere Reserve 3 November) को यह दिवस मनाया जाता है।
प्रश्न 2: अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिजर्व दिवस मनाने की शुरुआत किसने और कब की थी?
उत्तर: इस दिवस को मनाने की आधिकारिक घोषणा यूनेस्को द्वारा वर्ष 2021 में की गई थी और पहला आयोजन 3 नवंबर 2022 को हुआ था।
प्रश्न 3: बायोस्फीयर रिजर्व का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण (Ecosystem Conservation) सुनिश्चित करना और पर्यावरण के साथ स्थानीय समुदायों के आर्थिक विकास (Sustainable Development) का समन्वय करना है।
प्रश्न 4: भारत में कुल कितने अधिसूचित बायोस्फीयर रिजर्व हैं?
उत्तर: वर्तमान में भारत में कुल 18 अधिसूचित बायोस्फीयर रिजर्व हैं, जिनमें से 12 को यूनेस्को के वर्ल्ड नेटवर्क (WNBR) द्वारा वैश्विक मान्यता प्राप्त है।
प्रश्न 5: बायोस्फीयर रिजर्व जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास में कैसे योगदान देते हैं?
उत्तर: ये क्षेत्र पौधों और वन्यजीवों को सुरक्षा प्रदान करते हैं, कार्बन सिंक के रूप में जलवायु को संतुलित रखते हैं और स्थानीय लोगों को पर्यावरण-अनुकूल स्थायी आजीविका (Sustainable Livelihood) देते हैं।