International Solar Alliance (ISA): भारत लगातार तीसरी बार बना ISA का अध्यक्ष
संदर्भ:
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance – ISA) की नौवीं असेंबली में भारत को लगातार तीसरी बार इस वैश्विक संगठन का अध्यक्ष (International Solar Alliance President) चुना गया।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के बारे में:
- परिचय: International Solar Alliance (ISA), सौर ऊर्जा स्रोतों के कुशल उपयोग के माध्यम से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और कार्बन-मुक्त भविष्य के लिए काम करने वाला एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है।
- स्थापना: इसकी स्थापना 30 नवंबर 2015 को पेरिस जलवायु सम्मेलन (COP21) के दौरान भारत और फ्रांस द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी।
- मुख्यालय: इसका स्थायी अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन मुख्यालय भारत (ISA Headquarters India) के गुरुग्राम, हरियाणा में स्थित है।
- सदस्यता का विस्तार (International Solar Alliance Members): शुरुआत में यह केवल कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित सूर्य-प्रकाश समृद्ध देशों (Sun-shine Countries) का समूह था।
- हालांकि, बाद में इसके नियमों में संशोधन कर संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए सदस्यता खोल दी गई। वर्तमान में कुल 130 देश इसके हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य बन चुके हैं।
- नौवीं असेंबली और चुनाव परिणाम (9th ISA Assembly & Elections): अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन शिखर सम्मेलन (International Solar Alliance Summit) का आयोजन 2 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026’ (Bharat Renewable Energy Summit 2026) के साथ किया गया।
- अध्यक्ष पद पर पुनर्निर्वाचन: भारत लगातार तीसरी बार आईएसए का अध्यक्ष चुना गया (India Elected ISA President)। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी इस असेंबली के अध्यक्ष के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
- सह-अध्यक्ष (Co-President): फ्रांस को पुनः आगामी कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से सह-अध्यक्ष चुना गया है। यह भारत-फ्रांस सौर गठबंधन (India France Solar Alliance) की निरंतरता को दर्शाता है।
- वित्तीय पहल और प्रमुख रणनीतिक घटक (Financial Initiatives & Components): नौवीं असेंबली के दौरान वैश्विक सौर ऊर्जा सहयोग (Global Solar Energy Cooperation) को मजबूत करने के लिए कई बड़े वित्तीय संकल्प लिए गए हैं:
- अफ्रीका सौर सुविधा (Africa Solar Facility): अफ्रीका के वितरित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सुविधा शुरू की गई है। भारत ने इसमें 25 मिलियन डॉलर (लगभग ₹225 करोड़) का योगदान दिया है।
- नाइजीरिया फंड: नाइजीरिया में सस्ती बिजली पहुंचाने के लिए 300 मिलियन डॉलर के ‘नाइजीरिया वितरित नवीकरणीय ऊर्जा कोष’ का गठन किया गया है।
- भविष्य का लक्ष्य: आईएसए का लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में सदस्य देशों में 3 गीगावाट (GW) सौर परियोजनाओं को स्थापित करना और 1 अरब अमेरिकी डॉलर का वैश्विक निवेश आकर्षित करना है।
- ISA के उद्देश्य और कार्य:
- ऊर्जा गरीबी को दूर करना: वैश्विक दक्षिण (Global South) के कम विकसित और छोटे द्वीपीय देशों (SIDS) में जहां बिजली की दरें अत्यधिक (जैसे फिजी और मॉरीशस में ₹25–30 प्रति यूनिट) हैं, वहां सौर और बैटरी स्टोरेज तकनीक के माध्यम से सस्ती बिजली पहुंचाना।
- वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड (OSOWOG): इस महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा पहल (International Solar Energy Initiative) का मुख्य उद्देश्य एक वैश्विक ट्रांसनेशनल बिजली ग्रिड विकसित करना है, ताकि दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पादित सौर ऊर्जा को दूसरे हिस्से में स्थानांतरित किया जा सके।
- कृषि का सौरियन (Solarising Agriculture): भारत की सफल पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना के मॉडल को अफ्रीका और अन्य महाद्वीपों में अनुकूलित करना, जिससे सौर कृषि पंपों के जरिए 30 लाख से अधिक किसानों को सशक्त बनाया जा सके।
- क्षमता निर्माण (Capacity Building): इसके तहत 17 ‘सौर प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग संसाधन केंद्र’ (STAR-C), ‘ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर-SHINE’ और एआई-सक्षम ‘आईएसए अकादमी’ की स्थापना की गई है, जो विकासशील देशों में तकनीकी कौशल विकसित कर रही हैं।
भारत के लिए इसका महत्व:
- ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: आईएसए के माध्यम से भारत खुद को ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज और ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के वैश्विक नेता के रूप में स्थापित कर रहा है।
- पर्यावरणीय कूटनीति: यह गठबंधन पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने और पंचामृत (सकल शून्य उत्सर्जन लक्ष्य @2070) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
- प्रौद्योगिकी और आर्थिक लाभ: भारत में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy in India) की स्थापित क्षमता में भारी वृद्धि हुई है। आईएसए के जरिए भारतीय सौर निर्माता और कंपनियां वैश्विक बाजारों, विशेषकर अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में स्वयं को उतार सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) क्या है?
उत्तर: यह सौर ऊर्जा स्रोतों के कुशल उपयोग के माध्यम से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और कार्बन-मुक्त भविष्य के लिए काम करने वाला एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है।
प्रश्न 2: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना कब और किन देशों ने की थी?
उत्तर: आईएसए की स्थापना 30 नवंबर 2015 को पेरिस (फ्रांस) में भारत और फ्रांस द्वारा संयुक्त रूप से वैश्विक जलवायु सम्मेलन के दौरान की गई थी।
प्रश्न 3: भारत लगातार तीसरी बार ISA का अध्यक्ष कब चुना गया?
उत्तर: भारत को 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित आईएसए की नौवीं असेंबली के दौरान सर्वसम्मति से लगातार तीसरे कार्यकाल (2026-2028) के लिए अध्यक्ष चुना गया है।
प्रश्न 4: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय कहां स्थित है?
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का स्थायी और केंद्रीय सचिवालय (Headquarters) भारत के गुरुग्राम (हरियाणा) में स्थित है।
प्रश्न 5: ISA के प्रमुख उद्देश्य और कार्य क्या हैं?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर 1,000 अरब डॉलर से अधिक का निवेश जुटाकर सौर परियोजनाओं का विकास करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ को क्रियान्वित करना है।